क्या अभी निवेश का सही समय है? 25 साल का पैटर्न दे रहा बड़े संकेत
Jul 28, 2026 04:01 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
मुख्य बातें
- साल 2000 के बाद के आंकड़े बताते हैं कि जिन निवेशकों ने बाजार के सबसे ऊंचे स्तर पर निवेश किया और फिर बड़ी गिरावट का सामना किया, उन्होंने भी लंबी अवधि में शानदार रिटर्न कमाया

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मिडिट ईस्ट के टेंशन की वजह से भारतीय शेयर बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। साल 2026 में अब तक निफ्टी 50 करीब 8.26% नीचे है। ऐसे में कई निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या अभी शेयर बाजार में निवेश करना सही रहेगा या नहीं। हालांकि, इतिहास बताता है कि सबसे खराब समय पर भी निवेश करना लंबे समय में हमेशा नुकसान का सौदा नहीं रहा है। कोई भी निवेशक बाजार में गिरावट से ठीक पहले पैसा नहीं लगाना चाहता लेकिन अगर दांव लगा दिया तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। लॉन्ग टर्म में आपका निवेश ठीकठाक रिटर्न दे सकता है। कम से कम पुराने पैटर्न तो इसी के संकेत देते हैं।
क्या रहा है पैटर्न?
FundsIndia के डेटा से पता चलता है कि साल 2000 के बाद आए सात बड़े शेयर बाजार क्रैश के दौरान भी धैर्य रखने वाले निवेशकों को आखिरकार फायदा हुआ। अध्ययन में डॉट-कॉम बबल, 2004 का चुनावी झटका, 2006 की वैश्विक ब्याज दरों की वजह से आई गिरावट, 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट, यूरोपीय कर्ज संकट, 2015 का युआन संकट और 2020 का कोविड क्रैश शामिल हैं।
आंकड़ों के मुताबिक सबसे बड़ी गिरावट 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान देखी गई। तब मार्केट अपने पीक से 59.5% गिर गया। फिर भी, जिस इन्वेस्टर ने उस क्रैश से पहले मार्केट के हाई पर इन्वेस्ट किया था, उसे जून 2026 तक 9% का सालाना रिटर्न मिला। असल में होल्डिंग पीरियड के दौरान इन्वेस्टमेंट 4.7 गुना बढ़ गया। इसी तरह, जिन इन्वेस्टर्स ने 2000 में डॉट-कॉम बबल फटने से पहले इन्वेस्ट किया था उन्हें लगभग 50.2% की गिरावट का सामना करना पड़ा। हालांकि, उनके इन्वेस्टमेंट से आखिर में 12% का सालाना रिटर्न मिला और जून 2026 तक उनकी वेल्थ 19.4 गुना बढ़ गई।
विश्लेषण में यह भी सामने आया कि इन सभी सात बड़े बाजार संकटों के दौरान इक्विटी ने सिर्फ सकारात्मक रिटर्न ही नहीं दिया बल्कि महंगाई को भी पीछे छोड़ दिया। इन वर्षों में औसत महंगाई दर 4% से 6% के बीच रही, जबकि सबसे कम इक्विटी रिटर्न भी 9% सालाना रहा।
निवेशकों के लिए जानना जरूरी
यह पैटर्न बताता है कि शेयर बाजार में लंबे समय तक निवेश बनाए रखना बेहतर होता है। अगर किसी निवेशक की टाइमिंग सबसे खराब भी रही हो तब भी पॉजिटिव रहकर इंतजार किया जा सकता है। अगर निवेशक ने बाजार की पीक पर भी निवेश किया हो, तब भी धैर्य रखने पर उसे लंबी अवधि में सकारात्मक रिटर्न मिला है।
