कई इलाकों में पेयजल सप्लाई के हालात बिगड़े: जलदाय विभाग: 250 इंजीनियरों ने नई जगह पर जॉइनिंग नहीं दी, कई डिविजन में ‘नो मैन इन चार्ज’ - Jaipur News
जयपुर42 मिनट पहले
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फाइल फोटो
- इंजीनियरों का संकट - संशोधित सूची के बाद दुबारा तबादलों के जुगाड़ में लगे अफसर, सिस्टम ठप
जलदाय विभाग में इंजीनियरों के तबादलों के बाद प्रदेश के कई इलाकों में पेयजल सप्लाई के हालात बिगड़ गए है। कई इलाकों में पेयजल संकट के साथ ही पानी की व्यवस्था संभालने वाले इंजीनियरों का भी संकट हो गया है। जलदाय विभाग में 10 जुलाई को 806 इंजीनियरों के तबादले हुए, लेकिन दस दिन बाद भी 250 इंजीनियरों ने नई जगह जॉइनिंग नहीं दी। इनमें कई अधिकारी पुराने पद से रिलीव भी हो चुके हैं।
नतीजा यह है कि प्रदेश के कई सर्किल, डिवीजन और सब-डिवीजन बिना जिम्मेदार इंजीनियर के चल रहे हैं। यानी जिस समय मानसून कमजोर है, कई जिलों में पेयजल संकट गहरा रहा है और दूषित पानी की शिकायतें बढ़ रही हैं, उसी समय विभाग का बड़ा हिस्सा ‘नो मैन इन चार्ज’ के हालात में पहुंच गया है। वहां पर जनता की सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।
सीएमओ भेजी संशोधित सूची
बताया जा रहा है कि विभाग की ओर से करीब 100 इंजीनियरों की संशोधित तबादला सूची तैयार की गई है। यह सूची मंजूरी के लिए सीएमओ भेजी जा रही है। तबादलों के बाद कई इंजीनियर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अपने आदेश बदलवाने व रुकवाने की कोशिश में जुट गए।
इंजीनियरों के हुए तबादला
- एडिशनल चीफ इंजीनियर : 12
- अधीक्षण अभियंता : 44
- एक्सईएन : 195
- एईएन : 379
- जेईएन : 176
एक्सईएन नहीं छोड़ना चाहते है डिविजन
जलदाय विभाग में पेमेंट और एक्जीक्यूटिव पावर एक्सईएन का पास है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जेजेएम प्रोजेक्ट व स्कीम के लिए फंड जारी करने के बाद कई डिविजनों के एक्सईएन पुरानी जगह नहीं छोड़ना चाहते है। ऐसे में तबादला निरस्त या संशोधन करवाने के लिए जनप्रतिनिधियों व ब्यूरोक्रेसी का दबाव बना रहे है। कई एक्सईएन ने तो पार्टी के केंद्रीय नेताओं तक की सिफारिश करवाई है। ताकि उन्हें पुरानी जगह लगाया जा सके। एक्सईएन के पास विकास कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृतियां, ठेके, भुगतान और परियोजनाओं की मॉनिटरिंग का काम होता है।
तबादलों पर स्टे के लिए हाईकोर्ट व रेट में : कई इंजीनियर तबादलों को चुनौती देने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट और राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण (रेट) में जा चुके है। दूसरी ओर, संशोधन और निरस्तीकरण के प्रस्तावों पर भी विभागीय स्तर पर चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि गर्मी व कमजोर मानसून से बने पेयजल संकट के हालात में यदि विभाग के लगभग एक-तिहाई तबादला प्रभावित इंजीनियर समय पर नई जगह कार्यभार ही ग्रहण नहीं करें, तो इसका सीधा असर जनता तक पहुंचने वाली सेवाओं पर पड़ना स्वाभाविक है।
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