मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर होंगे बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति, 255 सांसदों के मिले वोट

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर होंगे बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति, 255 सांसदों के मिले वोट

बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति कौन होंगे?

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीरबांग्लादेश के नए राष्ट्रपति बनने के करीब हैं. चुनाव में उन्हें अभी तक 255 वोट मिले हैं. वहीं, 11 दलों के गठबंधन के उम्मीदवार ओली अहमद को 88 वोट प्राप्त हुए. सीईसी एएमएम नासिर उद्दीन मिर्जा ने फखरुल इस्लाम आलमगीर को विजेता घोषित किया. देश के 23वें राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान आज, गुरुवार को शाम 5 बजे समाप्त हो गया. मतदान आज दोपहर 2 बजे शुरू हुआ था.

संसद सदस्यों ने अपने-अपने स्थान से मतदान किया. मतदान के लिए पहले मतपत्र के पीछे अपना पूरा नाम लिखा गया और फिर मुख्य मतपत्र पर पसंद के उम्मीदवार के नाम के आगे निर्धारित स्थान पर भी अपना नाम दर्ज किया गया. कार्यवाहक अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद और कार्यवाहक अध्यक्ष कैसर कमाल ने भी संसद सदस्य होने के नाते मतदान किया. दोनों के लिए संसद कक्ष में अलग-अलग सीटों की व्यवस्था की गई थी. नए राष्ट्रपति कल यानी 21 अगस्त 2026 तो शपथ लेंगे.

35 वर्षों के बाद राष्ट्रपति चुनाव

सांसद और गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने राष्ट्रपति चुनाव में अपना वोट डालने से पहले संसद भवन में पत्रकारों से बातचीत की. गृह मंत्री ने कहा कि 35 साल बाद संविधान के तहत राष्ट्रपति चुनाव हो रहा है, जिसमें सरकार और विपक्ष दोनों के उम्मीदवार मैदान में हैं. उन्होंने कहा कि कई बार राष्ट्रपति चुनाव बिना किसी मुकाबले के हुए हैं, लेकिन लोकतंत्र में चुनाव प्रतिस्पर्धा के साथ होना चाहिए. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस चुनाव के जरिए देश की जनता लोकतांत्रिक प्रक्रिया को देखेगी और यह लोकतंत्र के लिए एक नई शुरुआत साबित होगा.

12 वोटों पर टिकी असली राजनीतिक कहानी

13वीं राष्ट्रीय संसद में कुल 349 सदस्य हैं. बीएनपी के पास 247 और जमात के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन के पास 90 सदस्य हैं. बाकी 12 सदस्य दोनों बड़े धड़ों से बाहर हैं. इनमें तीन बीएनपी के सहयोगी दलों से, एक इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश से और आठ निर्दलीय हैं. समीकरण में मिर्जा फखरुल की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन इन 12 वोटों का रुख चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू होगा.

जीत से ज्यादा मायने रखेंगे बाहर के वोट

अगर ओली अहमद निर्दलीय या इस्लामी आंदोलन के वोट हासिल करते हैं, तो विपक्षी गठबंधन इसे अपनी राजनीतिक पकड़ की उपलब्धि के तौर पर पेश कर सकता है. वहीं, मिर्जा फखरुल को बीएनपी के बाहर से वोट मिलने पर सत्तारूढ़ दल उनके प्रति बढ़ती राजनीतिक स्वीकार्यता का संदेश देगा. ऐसे में ओली अहमद के लिए असली लक्ष्य राष्ट्रपति बनना नहीं, बल्कि गठबंधन के बाहर से कितने वोट जुटा पाना है.

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