टूटी 26 साल की परंपरा: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के पास अब नहीं पहुंचेगी राजस्थानी बहन की राखी - Jaipur News
जयपुर8 घंटे पहलेलेखक: पूजा शर्मा
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वर्ष 2000 में बिल क्लिंटन का स्वागत करतीं मोहिनी देवी। (फाइल फोटो)
नायला की मोहिनी देवी के निधन से ‘मानवीय सेतु’ खत्म हो गया
भारत-अमेरिका में कूटनीतिक रिश्तों से परे 26 साल पहले बना अनोखा ‘मानवीय सेतु’ हमेशा के लिए टूट गया है। जयपुर के नायला गांव से हर साल अमेरिका जाने वाला स्नेह का धागा अब थम गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को भाई मानने वाली और उन्हें हर वर्ष राखी भेजने वाली मोहिनी देवी का इस साल मार्च में निधन हो गया।
यह भावुक कहानी साल 2000 में शुरू हुई थी, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन नायला आए। नायला मोहिनी देवी का मायका था, जहां पति के साये से वंचित होने के बाद रह रही थीं। गांव वाले उन्हें ‘बुआजी’ बुलाते थे। इसी कारण गांव की तरफ से क्लिंटन को राखी बांधने का सौभाग्य मोहिनी देवी को मिला। जब क्लिंटन नायला पहुंचे, तो मोहिनी देवी ने रक्षासूत्र बांधकर इस पावन रिश्ते की नींव रखी। मोहिनी देवी हर साल क्लिंटन, उनकी पत्नी और बच्चों के लिए राखियां भेजती थीं। दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास से होती हुई यह राखी व्हाइट हाउस तक का सफर तय करती थी। जवाब में क्लिंटन की ओर से भी मोहिनी देवी के लिए खास उपहार और पत्र आते थे।
व्हाइट हाउस से भी आते थे गिफ्ट...जवाब में क्लिंटन की ओर से भी मोहिनी देवी के लिए खास उपहार और पत्र आते थे, जिनमें व्हाइट हाउस का विशेष बैज, पेन और बैग जैसी अनमोल यादें शामिल थीं। ‘न्यूयार्क टाइम्स’ समेत दुनिया भर के कई प्रमुख अखबारों में इस स्नेहपूर्ण रिश्ते की तस्वीरें छपीं, जिसके बाद जो भी अमेरिकी पर्यटक या अधिकारी जयपुर आते, वे मोहिनी देवी से मिलना नहीं भूलते थे।
यह रिश्ता भाई-बहन के निश्छल प्रेम के साथ-साथ दिल के बेहद करीब था। साल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जब बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन (जिन्हें मोहिनी देवी अपनी ‘भाभी’ मानती थीं) मैदान में उतरीं, तो उन्होंने उनकी जीत के लिए गांव में विशेष प्रार्थनाएं और अनुष्ठान किए थे। हालांकि, समय के साथ अमेरिका से पत्रों और उपहारों का आना भले ही कम हो गया, लेकिन मोहिनी देवी का अपने भाई के प्रति प्रेम कभी कम नहीं हुआ।
वे पिछले वर्ष तक लगातार राखी भेजती रहीं। मार्च 2026 में मोहिनी देवी के अंतिम सांस लेने के साथ ही यह मानवीय सेतु सदा के लिए शांत हो गया। उनके बड़े बेटे शंकरलाल गुप्ता भावुक मन से कहते हैं, “मां के दो सगे भाई थे, लेकिन बिल क्लिंटन से उनका लगाव इतना गहरा था कि वे उन्हें भी अपने सगे भाई से कम नहीं मानती थीं। उन्हें इस बात पर बेहद गर्व था कि उनका एक भाई अमेरिका का राष्ट्रपति है।’
आज मोहिनी देवी भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके घर की अलमारी में सहेज कर रखे गए व्हाइट हाउस के वे उपहार और अखबारों की पीली पड़ चुकी कतरनें आज भी उस अटूट रिश्ते की गवाही दे रही हैं-एक ऐसा रिश्ता जो राजस्थान के एक छोटे से गांव से शुरू होकर दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति के दिल तक जाता था।
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