विश्व अंगदान दिवस आज: झारखंड के मात्र 2687 लोगों ने ली मरणोपरांत अंगदान की शपथ, कॉर्निया और किडनी के लिए सबसे अधिक रजिस्ट्रेशन - Ranchi News

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रांची17 मिनट पहलेलेखक: अमन मिश्रा

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किडनी, लिवर, हार्ट और फेफड़ों के प्रत्यारोपण के लिए हर साल झारखंड से 2500 से अधिक मरीज चेन्नई, हैदराबाद, समेत अन्य राज्य जाते हैं। बावजूद अंगदान जागरूकता में झारखंड देश के पिछड़े राज्यों में है। विश्व अंगदान दिवस पर सामने आए आंकड़ों के अनुसार, मरणोपरांत अंगदान का संकल्प लेने वालों की संख्या में झारखंड 21वें स्थान पर है।

राज्य में अब तक सिर्फ 2687 लोगों ने संकल्प लिया है। राजस्थान में यह संख्या 1,42,142 है। पड़ोसी राज्यों में ओडिशा 9561 (12वें), प. बंगाल 9215 (13वें) व बिहार 5292 (17वें) पर हैं। झारखंड में मृतक अंगदान व्यवस्था अभी शुरू नहीं हो सकी है।

झारखंड में किन अंगों व टिश्यू के लिए कितने लोगों ने लिया संकल्प...

अंग / टिश्यूपंजीकरण
हार्ट1761
आंत1501
किडनी1868
लिवर1740
फेफड़ा1619
पैंक्रियाज1518
ब्लड वेसल्स1384
हड्डी1354
कार्टिलेज1283
कॉर्निया1920
हार्ट वाल्व1432
त्वचा1325

हाल : 4 को लाइसेंस, रिम्स में शुरू नहीं राज्य में 4 अस्पतालों को लाइसेंस जारी किया गया है, पर रिम्स में अब तक शुरुआत नहीं हो सकी है। केवल चार अस्पतालों के पास लिविंग किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस है।

राजस्थान से सीखने की जरूरत राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक ने अंगदान के क्षेत्र में प्रगति की है। राजस्थान में 1.42 लाख लोगों ने मरणोपरांत अंगदान ​की शपथ ली है।

क्र.सं.राज्यसंख्या
1राजस्थान1,42,142
2महाराष्ट्र1,17,941
3कर्नाटक66,922
4गुजरात48,632
5मध्य प्रदेश25,229
6तमिलनाडु19,205
7तेलंगाना17,124
8उत्तरप्रदेश16,309
9केरला14,309
10पंजाब11,729
11आंध्रप्रदेश11,047
12ओडिशा9,561
13प. बंगाल9,215
14हरियाणा8,773
15दिल्ली7,153
16उत्तराखंड5,454
17बिहार5,292
18हिमाचल4,157
19छत्तीसगढ़3,318
20जम्मू कश्मीर3,226
21झारखंड2,687

राज्य में मृतक अंगदान की अपार संभावनाएं

मोहन फाउंडेशन की प्रोजेक्ट डायरेक्टर जया जयराम ने कहा कि वर्ष 2025 में देश में हुए 73% मृतक अंगदान पांच राज्यों तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात में हुए। झारखंड में लिविंग किडनी ट्रांसप्लांट और कॉर्निया प्रत्यारोपण की शुरुआत हो चुकी है। यदि राज्य मृतक अंगदान नीति लागू कर जागरूकता बढ़ाए और अस्पतालों में व्यवस्था हो, तो जीवनरक्षक अंगों के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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