हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 27 पद खाली: 41 कर्मचारी डेपुटेशन पर, RTI से हुआ बड़ा खुलासा; 7 अधिकारियों को अतिरिक्त कार्यभार - Panipat News
पानीपत1 घंटे पहले
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हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त निर्देशों के बावजूद हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी जनशक्ति के संकट से जूझ रहा है। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी से खुलासा हुआ है कि बोर्ड में 27 महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं, 41 अधिकारी डेपुटेशन पर तैनात हैं और 7 अधिकारियों को क्षेत्रीय अधिकारियों (RO) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह RTI आवेदन दिल्ली निवासी वरुण गुलाटी द्वारा दाखिल किया गया था। सर्दियों का मौसम और स्मॉग की समस्या नजदीक आते ही बोर्ड में अधिकारियों की इस भारी कमी ने पर्यावरण निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल।
एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन: कोई नया मांग पत्र नहीं भेजा गया
अप्रैल 2023 में NGT ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को मजबूत करने का निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा था कि मुख्य नियामक पद (जैसे क्षेत्रीय अधिकारी, इंजीनियर और वैज्ञानिक) पूर्णकालिक होने चाहिए और उन्हें अतिरिक्त प्रभार नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद, HSPCB ने स्वीकार किया कि रिक्त पदों को भरने के लिए हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) या हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) को कोई नया Requisition (मांग पत्र) नहीं भेजा गया है और न ही पदों की संख्या बढ़ाने का कोई प्रस्ताव भेजा गया है।
खाली पदों का प्रमुख आंकड़ा
HSPCB में स्वीकृत 483 पदों के मुकाबले मुख्य खाली पदों की स्थिति इस प्रकार है।
सीनियर साइंटिस्: 7 पद रिक्त (2 मुख्य कार्यालय से सूचीबद्ध)
एनवायरनमेंटल इंजीनियर: 5 पद रिक्त
साइंटिस्ट-बी: 5 पद रिक्त
चीफ साइंटिफिक ऑफिसर: 2 पद रिक्त
असिस्टेंट एनवायरनमेंटल इंजीनियर: 2 पद रिक्त
अन्य पद: डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (1), अकाउंट्स ऑफिसर (1), असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (2) और प्राइवेट सेक्रेटरी (2) के पद भी खाली हैं।
वरूण गुलाटी, पर्यावरण प्रेमी।
7 इंजीनियर संभाल रहे दोहरी जिम्मेदारी
RTI जवाब के अनुसार, मुख्यालय में तैनात 7 वरिष्ठ अधिकारियों और इंजीनियरों को गुरुग्राम (साउथ), कैथल, महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी दादरी, फतेहाबाद और अंबाला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का अतिरिक्त क्षेत्रीय अधिकारी (RO) बनाकर दोहरी जिम्मेदारी सौंपी गई है। गुरुग्राम जैसे संवेदनशील औद्योगिक क्षेत्र में अधिकारियों के पास अतिरिक्त प्रभार होने से प्रदूषण शिकायतों के निपटारे, नियमित निरीक्षण और नियमों के कड़ाई से पालन पर विपरीत असर पड़ रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि राज्य सरकार को तुरंत खाली पदों पर पक्की भर्तियां कर तकनीकी जनशक्ति की कमी को दूर करना चाहिए।
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