कारगिल विजय दिवस: आंखों में आंसू, सीने से लगाएं बेटे की आखिरी निशानी... 27 साल बाद भी नहीं भरे जख्म, बेटे की याद में शहीद उदयभान सिंह की मां का झलका दर्द
Kargil Vijay Diwas: कारगिल विजय दिवस पर पूरा देश 1999 के कारगिल युद्ध के उन अमर वीरों को नमन कर रहा है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए. इन्हीं वीर सपूतों में जम्मू के शमाचक निवासी ग्रेनेडियर उदयमान सिंह भी शामिल हैं, जिन्होंने टाइगर हिल पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया. उनकी शहादत को 27 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन परिवार के लिए आज भी उनकी यादें उतनी ही ताजा हैं.
ग्रेनेडियर उदयमान सिंह भारतीय सेना की 18 ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट के जवान थे. वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में उन्हें टाइगर हिल पर कब्जा वापस लेने के सबसे कठिन ऑपरेशन में शामिल किया गया था. 4 जुलाई 1999 की रात भारतीय सेना की तीन बटालियनों ने दुश्मनों के कब्जे वाले टाइगर हिल पर चढ़ाई शुरू की. दुर्गम पहाड़ों और अंधेरे के बीच जवान चोटी तक पहुंचने में सफल रहे, लेकिन वहां पाकिस्तानी घुसपैठियों की ओर से भारी गोलीबारी शुरू हो गई.
इस भीषण युद्ध के दौरान ग्रेनेडियर उदयमान सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और 5 जुलाई 1999 को उन्होंने अपने दो साथियों के साथ मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे दिया. उनका पार्थिव शरीर चार दिन बाद 9 जुलाई को बरामद किया गया.
बेटे की याद में बनवाया मंदिर
उदयमान सिंह की मां कांता देवी आज भी अपने इकलौते बेटे की शहादत को गर्व और दर्द के साथ याद करती हैं. उन्होंने बेटे की स्मृति में एक मंदिर बनवाया है, जहां वह प्रतिदिन पूजा करती हैं और तिरंगे के नीचे दीप जलाकर अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित करती हैं. उनके पास आज भी बेटे का वह बटुआ सुरक्षित है, जो युद्ध के दौरान गोलियों से छलनी हो गया था.
कांता देवी कहती हैं कि यह उनके लिए केवल एक बटुआ नहीं, बल्कि बेटे की आखिरी निशानी है. उनकी अंतिम इच्छा है कि इस बटुए का आधा हिस्सा उनके अंतिम संस्कार के समय उनके साथ रखा जाए, ताकि बेटे की याद हमेशा उनके साथ बनी रहे.
‘अभी भी कम नहीं हुआ दर्द’
उदयमान सिंह की बहन वंदना लंगेह भी अपने भाई की वीरता को गर्व के साथ याद करती हैं. परिवार का कहना है कि बेटे को खोने का दर्द कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन इस बात का गर्व हमेशा रहेगा कि उसने देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया.
कारगिल विजय दिवस पर ग्रेनेडियर उदयमान सिंह की गाथा केवल एक सैनिक की बहादुरी की कहानी नहीं, बल्कि उन परिवारों के त्याग, साहस और देशभक्ति की मिसाल भी है, जिनके बलिदान की बदौलत देश की सीमाएं आज भी सुरक्षित हैं. उनका जीवन और शहादत आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा और राष्ट्रभक्ति के लिए हमेशा प्रेरित करती रहेगी.

रमन सैनी
रमन सैनी एक वरिष्ठ टेलीविजन पत्रकार हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है. फिलहाल टीवी9 भारतवर्ष में स्पेशल रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले इंडिया डेली लाइव में जम्मू कश्मीर ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. रमन सैनी ने अपने करियर के 15 वर्ष इंडिया टीवी के साथ बिताए. इसके बाद उन्होंने इंडिया डेली लाइव जॉइन किया, जहां से जम्मू कश्मीर की अहम रिपोर्टिंग का नेतृत्व किया. उनकी पत्रकारिता का मुख्य फोकस संघर्ष क्षेत्र, आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर रहा है. रमन सैनी ने आतंकवाद, सीमा पार घुसपैठ और लगातार होने वाली क्रॉस बॉर्डर फायरिंग की व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन हमला, दीनानगर पुलिस स्टेशन हमला जैसे बड़े आतंकी मामलों की कवरेज के अलावा उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर जैसी सैन्य कार्रवाइयों को भी कवर किया है.
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