29 किलो सोना, 972 किलो चांदी सरकारी तिजोरी में कैद: अपराधियों से जब्त सोना-चांदी को लेकर राज्य सरकार से सिफारिश; कैग ने कहा- नीलाम करो - Jaipur News
जयपुर39 मिनट पहलेलेखक: प्रमोद कुमार शर्मा
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फाइल फोटो
- कैग की ताजा रिपोर्ट में पहली बार ऐसा खुलासा
अपराधियों से जब्त 64.44 करोड़ रुपए का 29.011 किलो सोना और 972.75 किलो चांदी सरकारी खजाने में ‘कबाड़’ हो रही है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की समीक्षा रिपोर्ट ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि ये सोना-चांदी बरसों से सरकारी खजाने में रखे हैं, लेकिन अभी तक इसका नियमानुसार निस्तारण नहीं हो पाया है। कैग ने पहली बार इस तरह की जानकारी साझा की है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा ये जब्ती की गई है। इसे कोर्ट ने राजकीय संपत्ति घोषित किया है। हालांकि, वित्त विभाग ने इनकी वैल्यूएशन करवा ली है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2025 तक निस्तारण नहीं हुआ है। कैग ने इसे गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से जरूरी कार्रवाई की सिफारिश की है।
रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान कोषागार नियमावली-2012 के नियम 122 के तहत कोषालय जयपुर (शहर) को राज्य का रिजर्व कोषागार घोषित किया गया है। सामान्य और आपराधिक मामलों में न्यायालय द्वारा राजकीय संपत्ति घोषित किए गए सोना, चांदी, हीरे और अन्य बहुमूल्य सामान यहीं जमा किए जाते हैं। वित्त विभाग बहुमूल्य सामग्री को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया है। पहली श्रेणी पुरातात्विक महत्व की वस्तुओं की है। इन्हें पुरातत्व विभाग को हस्तांतरित किया जाना है। दूसरी श्रेणी के तहत रखे सोना-चांदी को मुंबई स्थित सरकारी की टकसाल में भेज शुद्ध धातु में परिवर्तित करा बेचना है।
उधर, कैग ने पाया कि पुरातात्विक महत्व की सामग्री को छोड़कर बाकी सोना-चांदी का वैल्यूएशन तो हो चुका था, लेकिन नियमानुसार निस्तारण नहीं किया गया। इसके मद्देनजर निदेशक एवं पदेन संयुक्त शासन सचिव, निदेशालय कोष एवं लेखा को सिफारिश की गई है कि राज्य सरकार के सक्षम स्तर से आवश्यक निर्देश जारी कर कोषाधिकारी जयपुर (शहर) के सुरक्षित कक्ष में रखे सोने-चांदी के आयटमों का नियमानुसार निस्तारण कराया जाए।

नियम- गलाकर बेचे सरकार न्यायालय द्वारा राजकीय संपत्ति घोषित सोना, चांदी, हीरे आदि को रिजर्व कोषागार जयपुर (शहर) समय-समय पर पुरातात्विक महत्व की सामग्री पुरातत्व विभाग को सौंपता है। वहीं, अन्य बहुमूल्य सामग्री को मुंबई स्थित भारत सरकार की टकसाल भेजकर शुद्ध धातु में बदलने और मॉनेटाइज करता है।
कैग ने यह उठाई आपत्ति सोना-चांदी का वैल्यूएशन होने के बावजूद मई 2025 तक नियमानुसार निस्तारण नहीं हुआ। लंबित प्रक्रिया शीघ्र पूरी करे। समय से निस्तारण नहीं होने से सरकार पर इसकी सुरक्षा और रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है। इससे सरकार को नुकसान हो रहा है।
...और इधर हिसाब-किताब भी ठीक नहीं
35 साल बाद भी 17 मामलों में सरकार नहीं दे सकी 29.79 करोड़ रुपए के खर्च का हिसाब : कैग
कैग की रिपोर्ट में समाने आया कि विभिन्न सरकारी विभागों में सरकारी धन के उपयोग का हिसाब 35 वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। कैग के मुताबिक, 17 एडवांस कंटींजेंसी (एसी) बिलों के बदले निर्धारित समय में डिटेल्ड कंटींजेंसी (डीसी) बिल जमा नहीं किए गए। इन लंबित मामलों में करीब 29.79 करोड़ का समायोजन अभी तक बाकी है। इनमें कुछ मामले 1990-91 से यानी करीब 35 वर्ष से लंबित है। इनके खर्च का पूरा लेखा-जोखा सरकार उपलब्ध नहीं करा सकी।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार एसी बिलों के माध्यम से विभाग को तत्काल जरूरत के लिए राशि जारी की जाती है। नियमों के तहत निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित विभागों को डीसी बिल प्रस्तुत कर यह बताना होता है कि पैसा किस मद में और किस उद्देश्य से खर्च किया गया। लेकिन 17 मामलों में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। कैग ने इसे वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन माना और सभी लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने की सिफारिश की है।
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