फायरिंग, आग और कर्फ्यू! एक बार फिर क्यों सुलग उठा नेपाल? 3 की हो चुकी है मौत, बालेन शाह का अपील भी बेअसर

Time Published: Friday, July 31, 2026, 15:31 [IST]

Nepal Communal Tension: भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव ने गंभीर रूप ले लिया है। सुनसरी जिले के देवानगंज से शुरू हुआ विवाद अब मधेश और कोशी प्रांत के कई जिलों तक फैल चुका है। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को गोली चलानी पड़ी, कई जगह आगजनी हुई और प्रशासन को अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू करना पड़ा।

अब तक तीन लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर एक स्थानीय विवाद कुछ ही दिनों में सीमा से लगे इतने बड़े इलाके में हिंसा में कैसे बदल गया और सरकार इसे समय रहते क्यों नहीं रोक सकी।

Nepal Communal Tension

देवानगंज से कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

हिंसा की शुरुआत रविवार को सुनसरी जिले की देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्तानगंज इलाके से हुई। दो समुदायों के धार्मिक कार्यक्रम एक साथ होने के दौरान लाउडस्पीकर और धार्मिक झंडों को लेकर विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। स्थिति बेकाबू होने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गोली चलाई, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए।

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देखते ही देखते कई जिलों तक कैसे फैल गई हिंसा?

सुनसरी की घटना के बाद विरोध प्रदर्शन तेजी से नेपाल के मधेश और कोशी प्रांत के अन्य जिलों तक फैल गया। सिराहा, सप्तरी, धनुषा, पर्सा और बिरगंज में भी तनाव बढ़ गया। सिराहा के गोलबाजार में प्रदर्शन के दौरान 15 वर्षीय गणेश यादव की गोली लगने से मौत हो गई। कई जगह आगजनी, तोड़फोड़ और बाजार बंद कराने की घटनाएं सामने आईं, जिससे पूरे इलाके में डर का माहौल बन गया।

क्यों लगाना पड़ा कर्फ्यू और सख्त पाबंदियां?

लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने सुनसरी, सिराहा, धनुषा और बिरगंज समेत कई इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया। बिरगंज में पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, रैली, धरना और सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगा दी गई। सुनसरी में ईस्ट-वेस्ट हाईवे के आसपास भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई। भारत-नेपाल सीमा से जुड़े रास्तों पर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

सरकार की भूमिका पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

विपक्ष, सुरक्षा विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि सरकार ने शुरुआती दिनों में हालात को गंभीरता से नहीं लिया। आलोचकों के मुताबिक प्रधानमंत्री ने चार दिन बाद सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक पांचवें दिन बुलाई गई। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समुदाय के नेताओं से समय पर संवाद नहीं होने से तनाव बढ़ता चला गया और हिंसा कई जिलों तक फैल गई।

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भारत से सटे इलाके इतने संवेदनशील क्यों हैं?

सुनसरी, सिराहा, धनुषा और पर्सा जैसे जिले बिहार से सटे हुए हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार, आवाजाही और सामाजिक संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माने जाते हैं। ऐसे इलाकों में किसी भी तरह का सांप्रदायिक तनाव सीमा पार गतिविधियों और व्यापार पर भी असर डाल सकता है। इसी वजह से नेपाल प्रशासन ने सीमा से जुड़े इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

मृतकों को 'शहीद' घोषित करने की मांग क्यों उठी?

देवानगंज गांवपालिका ने पुलिस फायरिंग में मारे गए दो लोगों को स्थानीय स्तर पर 'शहीद' घोषित करते हुए नेपाल सरकार से उन्हें आधिकारिक शहीद का दर्जा देने की सिफारिश की है। स्थानीय प्रशासन ने दोनों परिवारों को 10-10 लाख नेपाली रुपये की सहायता देने का फैसला किया है। गंभीर घायलों के लिए दो लाख और अन्य घायलों के लिए 50 हजार नेपाली रुपये मुआवजे की भी घोषणा की गई है।