एक चिता, 3 लाशें और पीछे रह गईं 2 मासूम बेटियां... आजमगढ़ हत्याकांड की दर्दनाक कहानी

Azamgarh News: “मौत ऐसी कि अपनो का कंधा भी नसीब नहीं हुआ”… ये कहानी आजमगढ़ के उस सनकी कातिल अरविंद सिंह की है, जिसने एक झटके में अपने ही परिवार को उजाड़ दिया. न तो खुद रहा, न पत्नी, न बेटा… परिवार में बची हैं तो सिर्फ 2 मासूम बच्चियां और एक बूढ़ी मां. बदनसीबी भी ऐसी कि पति-पत्नी और बेटे के अंतिम संस्कार में न तो परिवार से कोई आया और न ही ससुराल से. गांव वालों ने तो गांव में शवों को घुसने तक नहीं दिया. गांव की सीमा से ही शव वाहनों को लौटा दिया. भारत रक्षा दल नाम के एक सामाजिक संगठन ने अरविंद, उसकी पत्नी बबीता और बेटे शौर्य का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया.

दरअसल, मंगलवार शाम शुरू हुआ खूनी तांडव 7 घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ऑपरेशन के बाद खत्म हुआ. अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गहजी गांव में अरविंद सिंह (40) ने अपनी पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी. इसके बाद वह अपने तीन बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया. पुलिस ने उसे बाहर निकालने के लिए कई घंटे तक बातचीत की, लेकिन जब अंदर से गोली चलने की आवाज आई तो ATS कमांडो ने ऑपरेशन शुरू कर दिया. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अरविंद गंभीर रूप से घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मौत हो गई. इस पूरे घटनाक्रम में कुल पांच लोगों की जान गई.

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पत्नी और 2 पुजारियों की गोली मारकर हत्या

अरविंद सिंह शाम करीब 6 बजे बाजार से अपने घर पहुंचा था. उस समय घर में पूजा-पाठ चल रहा था. परिवार में पिछले कुछ दिनों से पूजा और अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा था. घर पहुंचने के बाद अरविंद ने पूजा कर रहे पुजारियों से सवाल-जवाब शुरू कर दिया. इसी दौरान उसका विवाद हो गया. मामला बढ़ने के बाद अरविंद ने घर में रखी रिवॉल्वर से फायरिंग कर दी. गोली लगने से उसकी पत्नी बबीता सिंह (40) और 2 पुजारियों महेंद्र पाठक (60) और अखिलेश मिश्रा (55) की मौत हो गई.

हत्या के बाद बच्चों के साथ कमरे में हुआ बंद

तीन लोगों की हत्या करने के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों के साथ कमरे में बंद हो गया. उसके पास रिवॉल्वर थी. सूचना मिलने के बाद पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंचीं. गांव को चारों तरफ से घेर लिया गया और लोगों को घटनास्थल से दूर किया गया. पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के जरिए अरविंद से बात की और उसे सरेंडर करने के लिए समझाने की कोशिश की. पुलिस की ओर से लगातार उसे बाहर आने के लिए कहा जाता रहा, लेकिन वह कमरे से बाहर नहीं आया.

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7 घंटे बाद ATS कमांडो ने शुरू किया ऑपरेशन

कई घंटे तक समझाने के बावजूद जब अरविंद ने सरेंडर नहीं किया तो पुलिस ने ऑपरेशन की तैयारी शुरू की. अधिकारियों के मुताबिक, अंदर से गोली चलने की आवाज आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की. ATS कमांडो ने घर को चारों तरफ से घेर लिया. ऑपरेशन के दौरान स्टन-टीयर गैस ग्रेनेड का भी इस्तेमाल किया गया. पुलिस के मुताबिक, अरविंद ने करीब 6 राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में ATS कमांडो की ओर से भी फायरिंग की गई.

बेटे को भी लगी गोली, इलाज के दौरान मौत

ऑपरेशन के दौरान अरविंद सिंह ने पुलिस पर दबाव बनाने के लिए अपने बेटे शौर्य सिंह को गोली मार दी थी. पुलिस ने घायल बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई. वहीं, पुलिस की जवाबी फायरिंग में अरविंद भी गंभीर रूप से घायल हो गया. उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया और हायर सेंटर रेफर किया गया. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इस तरह पत्नी बबीता, दोनों पुजारियों, बेटे शौर्य और आरोपी अरविंद समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई.

भाई की हत्या के बाद पूजा-पाठ को लेकर हुआ था विवाद

घटना की वजह को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, अरविंद के भाई की 2018 में हत्या हुई थी. इसके बाद परिवार की ओर से बताया गया कि अरविंद उस घटना को लेकर परेशान रहता था. परिजनों के मुताबिक, किसी व्यक्ति ने परिवार से भूत-प्रेत के साए की बात कही थी. इसके बाद अरविंद के सिर से इस साए को हटाने के लिए घर में पूजा-पाठ और अनुष्ठान शुरू कराया गया था. पिछले करीब चार दिनों से घर में पूजा चल रही थी.

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बताया गया कि अरविंद पूजा-पाठ का विरोध कर रहा था, जबकि उसकी मां और पत्नी बबीता पूजा कराना चाहती थीं. इसी बात को लेकर परिवार में विवाद चल रहा था. मंगलवार शाम जब अरविंद घर पहुंचा और पूजा होते देखी तो उसका पुजारियों से विवाद हो गया. इसके बाद गोलीबारी की घटना हुई.

बबीता के मायके वालों ने लगाए गंभीर आरोप

घटना के बाद बबीता के मायके वालों ने अरविंद के परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. बबीता की मां का आरोप है कि अरविंद के परिजनों ने उनकी बेटी का शव लेने से भी इनकार कर दिया. उन्होंने बबीता पर चरित्र को लेकर लगाए गए आरोपों को भी गलत बताया. बबीता की मां ने दावा किया कि अरविंद के भाई की मौत के बाद परिवार में उसके ऊपर उसके भाई की आत्मा आने की बात कही जाती थी. इसी भूत-प्रेत के साए को दूर करने के लिए पूजा-पाठ और अनुष्ठान कराया जा रहा था. बबीता की मां ने कहा कि उनकी बेटी को घटना के बाद झूठा बदनाम किया जा रहा है. उनकी बेटी पर लगाए जा रहे चरित्र संबंधी आरोप गलत हैं.

एक ही चिता पर जली मां-बाप और बेटे की लाश

इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार एक साथ किया गया. उससे भी हैरान करने वाली बात यह रही कि इनके अंतिम संस्कार में दोनों परिवारों की तरफ से कोई भी मौजूद नहीं था. यहां तक कि गांव का एक भी व्यक्ति श्मशान घाट पर दिखाई नहीं दिया. ग्रामीणों ने तो बबीता, अरविंद और उनके बेटे शौर्य के शवों को गांव के अंदर नहीं आने दिया, जिसके बाद भारत रक्षा दल नाम का सामाजिक संगठन आगे आया.

भारत रक्षा दल ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली और तीनों के शवों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार कराया. अब अरविंद के परिवार में सिर्फ 2 बच्चियां परी (5) और एक सात महीने की मासूम बची हैं. अरविंद की 70 वर्षीय बूढ़ी मां के ऊपर इनकी देखभाल की जिम्मेदारी है. अरविंद की ससुराल की तरफ से इन बच्चियों की जिम्मेदारी लेने कोई आगे नहीं आया. 5 साल की मासूम परी अपनी मां बबीता को याद कर रो रही है, जबकि 7 महीने की मासूम को तो कुछ पता ही नहीं है.

अवनीश उपाध्याय

अवनीश उपाध्याय

अवनीश उपाध्याय को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल से अधिक वर्षों का अनुभव है. डिजिटल कंटेंट पर बेहतरीन पकड़. राजनीति और अपराध से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी. लंबे समय तक हाईपरलोकल में काम करने की वजह से जमीन से जुड़ी खबरों की बेहतर समझ. पढ़ने, लिखने और घूमने का शौक. पूर्वांचल यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में स्नातक की पढ़ाई और इसी दौरान कई टीवी चैनल में काम किया.

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