भारत ने श्रीलंका को भेजीं 3 टन टीबी रोधी दवाइयां, एस. जयशंकर ने जताई सहयोग की प्रतिबद्धता

नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। भारत ने सोमवार को श्रीलंका की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को समर्थन देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए करीब तीन टन theeएंटी-ट्यूबरकुलोसिस (टीबी रोधी) दवाइयां कोलंबो भेजीं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि ये दवाइयां भारतीय वायुसेना के एक विमान के जरिए कोलंबो भेजी गईं।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "भारत श्रीलंका की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। करीब तीन टन टीबी रोधी दवाइयां आज आईएएफ के सी-130जे विमान से कोलंबो भेजी गईं।"
16 सितंबर को श्रीलंका के मन्नार स्थित जिला सामान्य अस्पताल में एक नए दो मंजिला दुर्घटना एवं आपातकालीन इकाई के निर्माण कार्य की शुरुआत हुई थी, जिसे भारत सरकार ने वित्तीय सहायता दी है। इस इकाई के शिलान्यास समारोह में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके, स्वास्थ्य एवं जनसंचार मंत्री नलिंदा जयतिस्स और श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा उपस्थित रहे।
भारतीय उच्चायोग के अनुसार, इस परियोजना के लिए भारत की ओर से 60 करोड़ श्रीलंकाई रुपए की अनुदान सहायता दी जा रही है।
उच्चायुक्त संतोष झा ने एक्स पर लिखा, "मन्नार जिला सामान्य अस्पताल में नई दो मंजिला दुर्घटना एवं आपातकालीन इकाई के शिलान्यास समारोह में राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और स्वास्थ्य मंत्री नलिंदा जयतिस्स के साथ शामिल होकर खुशी हुई।"
उन्होंने कहा कि भारत की 60 करोड़ श्रीलंकाई रुपए की अनुदान सहायता से संचालित इस परियोजना के तहत आवश्यक चिकित्सा उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे आपातकालीन स्थिति में 'गोल्डन ऑवर' के दौरान समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
संतोष झा ने इस परियोजना को भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत साझेदारी तथा जनकेंद्रित विकास के साझा संकल्प का उदाहरण बताया।
4 सितंबर को संतोष झा ने श्रीलंकाई संसद के स्पीकर जगत विक्रमरत्ने और आवास, निर्माण एवं जलापूर्ति उपमंत्री टी.बी. सारथ के साथ पोलोन्नारुवा में 21वें मॉडल गांव 'सुहदागामा' का उद्घाटन भी किया था।
उन्होंने कहा कि भारतीय अनुदान सहायता से संचालित यह मॉडल गांव परियोजना श्रीलंका के सभी 25 जिलों में फैली हुई है और जमीनी स्तर पर विकास को बढ़ावा देने में भारत-श्रीलंका साझेदारी की मजबूती को दर्शाती है।
पिछले महीने संतोष झा और भारत में श्रीलंका की उच्चायुक्त महिशिनी कोलोंन ने भारत-श्रीलंका फाउंडेशन (आईएसएलएफ) की चल रही पहलों की समीक्षा की और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए नए प्रस्तावों पर चर्चा की थी।
दोनों अधिकारियों ने 28 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित भारत-श्रीलंका फाउंडेशन के 41वें बोर्ड बैठक की संयुक्त अध्यक्षता की थी।
भारत-श्रीलंका फाउंडेशन एक ट्रस्ट फंड है, जिसकी स्थापना दोनों देशों की सरकारों ने आर्थिक, वैज्ञानिक, शैक्षिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देकर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से की थी। इसकी स्थापना 1998 में दोनों देशों के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत की गई थी।
संतोष झा ने कहा कि बैठक में फाउंडेशन की मौजूदा पहलों की समीक्षा की गई और शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान, प्रौद्योगिकी समेत विभिन्न क्षेत्रों में भारत-श्रीलंका संबंधों को और गहरा करने वाले नए प्रस्तावों पर विचार किया गया।
--आईएएनएस
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