हाईकोर्ट ने 3 हजार मदरसों की व्यवस्था पर मांगा जवाब: प्रभावी संचालन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण मामले में सरकार को हलफनामा पेश करने के निर्देश - Jodhpur News
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से करीब 3 हजार मदरसों के संचालन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण पर जवाब मांगा है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की बेंच ने सरकार को हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी।
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प्रतिपाल सिंह और अन्य की याचिका में मदरसों में प्रभावी नियंत्रण और शैक्षणिक पर्यवेक्षण की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। वकील मोती सिंह ने बताया कि राजस्थान मदरसा बोर्ड अधिनियम, 2020 में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रबंधन के पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।
शिक्षा के स्तर में सुधार और पारदर्शी प्रबंधन की मांग
याचिका में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षा के स्तर में सुधार और पारदर्शी प्रबंधन की मांग है। इसमें RBSE-CBSE से जुड़े मदरसों की सूची बनाने और शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप चलाने जैसे सुझाव दिए गए हैं।
इसके अलावा स्कूल के रूप में रजिस्टर्ड संस्थाओं को मदरसा बोर्ड से मिलने वाले अनुदान और वित्तीय सहायता की समीक्षा करने, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर के मदरसों के लिए शिक्षा विभाग की ओर से निर्धारित पाठ्यक्रम लागू करने तथा डाइट के माध्यम से समान परीक्षा आयोजित कराने की मांग की गई।
याचिका में मदरसा विद्यार्थियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए विशेष पोर्टल विकसित करने और प्रत्येक विद्यार्थी को विशिष्ट पहचान संख्या देने का सुझाव भी दिया गया है। साथ ही निर्धारित शैक्षणिक योग्यता नहीं रखने वाले संविदा या पैरा-टीचर्स के मानदेय पर रोक लगाने तथा धार्मिक शिक्षा देने वाले मौलवी, मुफ्ती आदि को सरकारी कोष से वेतन भुगतान नहीं करने की मांग रखी गई।
आरटीई अधिनियम के तहत शिक्षा उपलब्ध कराने का मुद्दा भी उठाया
याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सिफारिशों के अनुरूप गैर-मुस्लिम बच्चों को धार्मिक शिक्षा देने वाले मदरसों से सामान्य विद्यालयों में आरटीई अधिनियम के तहत शिक्षा उपलब्ध कराने का मुद्दा भी उठाया। मानकों का पालन नहीं करने वाले मदरसा संस्थानों का पंजीकरण रद्द करने और आवंटित भूमि वापस लेने की मांग भी की गई है।
हाईकोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता बी.एल. भाटी को राज्य सरकार की ओर से मदरसों के प्रभावी प्रबंधन, नियंत्रण और संचालन के लिए उठाए जा रहे और प्रस्तावित कदमों का विवरण देते हुए विस्तृत हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता के सुझावों पर भी विचार करने को कहा है।