राहुल गांधी के निवेश सलाहकार ने दी बड़ी सलाह, कहा- 3 साल का खर्च बचाकर रखें, नया कर्ज न लें, जानिए क्यों
Rahul Gandhi Investment Advisor Advice: राहुल गांधी के निवेश सलाहकार ने लोगों को 3 साल का खर्च बचाकर रखने और नया कर्ज न लेने की सलाह दी है। जानिए आखिर क्यों दी गई ये सलाह?
Muthukrishnan Dhandapani Finance Advice: आर्थिक हालात को लेकर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर और राहुल गांधी के निवेश सलाहकार के तौर पर पहचाने जाने वाले मुथुकृष्णन धनदापानी की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में है। उन्होंने लोगों को किसी संभावित संकट की भविष्यवाणी के बजाय अपनी वित्तीय तैयारी मजबूत करने की सलाह दी है। उनका सबसे अहम सुझाव है कि परिवार के जरूरी खर्चों के बराबर करीब तीन साल का इमरजेंसी फंड तैयार रखा जाए।
कमाई से ज्यादा जरूरी अब आय की सुरक्षा?
धनदापानी ने कहा कि आने वाले मुश्किल दौर से निपटने के लिए लोगों को नई उधारी से बचना चाहिए। उन्होंने नए लोन लेने और लंबे समय की बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धताओं, खासकर घर या रियल एस्टेट खरीदने, को फिलहाल टालने की बात कही। नौकरी को लेकर भी उनका संदेश अलग है। उनका कहना है कि ऐसे समय में सिर्फ पसंदीदा पद या खास भूमिका पर अड़े रहने के बजाय नियमित आय बनाए रखना ज्यादा अहम हो सकता है। यानी नौकरी बदलने या तलाशने वालों के लिए कमाई का स्रोत सुरक्षित रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। नीचे देखें पोस्ट-
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शेयर बाजार में गिरावट के बीच आई सलाह
धनदापानी की पोस्ट ऐसे समय आई जब भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। 29 सितंबर को Nifty 50 64.05 अंक गिरकर 22,716.20 पर रहा, जबकि Sensex 242.65 अंक टूटकर 72,529.07 पर बंद हुआ। दोनों प्रमुख सूचकांकों ने करीब छह महीने के निचले स्तर पर सत्र खत्म किया। बाजार पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता का दबाव रहा।
हालांकि, धनदापानी ने यह नहीं कहा कि कोई निश्चित आर्थिक संकट आने वाला है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि दुनिया पहले भी मुश्किल दौर देख चुकी है और आगे भी ऐसे दौर आ सकते हैं। उनके मुताबिक तैयारी का मकसद डर पैदा करना नहीं, बल्कि मुश्किल समय में परिवार की वित्तीय स्थिति को संभालने लायक बनाना है।
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तीन साल का फंड हर परिवार के लिए आसान नहीं
तीन साल के खर्च जितनी रकम जुटाना ज्यादातर परिवारों के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। इसलिए इस सलाह का व्यावहारिक मतलब यह भी है कि परिवार पहले अपने जरूरी मासिक खर्च की सही गणना करे और फिर धीरे-धीरे आपातकालीन बचत बढ़ाए। धनदापानी ने अंत में भरोसा जताया कि खराब दौर हमेशा नहीं रहता। आर्थिक चक्रों में उतार-चढ़ाव आते हैं और बेहतर समय दोबारा लौट सकता है।
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