अबूधाबी से 3-महीने बाद घर पहुंचा शव, परिजन बिलख पड़े: पोते की बॉडी देख दादी बोलीं- मेरो राकेश ने कुण मार्यो - Jhunjhunu News
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी में संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाने वाले झुंझुनूं जिले के मंड्रेला क्षेत्र (बेगूं का बास) निवासी राकेश कुमार (30) का पार्थिव शरीर करीब 3 महीने बाद एम्बुलेंस से शुक्रवार को उनके पैतृक गांव पहुंचा।
.
घर की आर्थिक हालत सुधारने की उम्मीद में राकेश पिछले साल 6 अक्टूबर 2025 को कर्ज लेकर विदेश गए थे। अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए। वे परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके निधन की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।

3 महीने बाद अबू धाबी से युवक का शव घर पहुंचा तो परिजन बिलख पड़े।

घर में चीख-पुकार मच गई, जिसे देखकर सभी की आंखें नम हो गईं।
शव के घर पहुंचते ही बिलख पड़े परिजन परिजनों के अनुसार, राकेश की मौत 22 अप्रैल 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। परिजनों का आरोप है कि संबंधित कंपनी और भारतीय दूतावास ने महीनों तक मौत के स्पष्ट कारणों की कोई जानकारी नहीं दी। शुक्रवार को शव के घर पहुंचते ही राकेश की मां बेटे के शव से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ीं, वहीं उनकी बुजुर्ग दादी बार-बार अपने पोते की मौत का कारण पूछती रहीं। दादी शव को देख बिलख पड़ी और पूछती रही कि 'राकेश, तन्ने के होग्यो... मेरो राकेश ने कुण मार्यो'। इसे देखकर ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं।
पूछने पर कंपनी बोली- यहां 20 हजार कर्मचारी हैं, किस-किस का ध्यान रखें? राकेश के साथ काम करने वाले कपिल ने बताया कि जब राकेश दो दिन तक कमरे पर नहीं लौटे, तो कंपनी को सूचना दी गई। इस पर अधिकारियों ने बेहद संवेदनहीन जवाब देते हुए कहा कि 'यहां 20 हजार कर्मचारी हैं, किस-किस का ध्यान रखें?' इसके अलावा, मृतक के मामा सुरेंद्र कुमार न्योला ने आरोप लगाया कि पहले से ही कर्ज में डूबे इस बेहद गरीब परिवार से शव को भारत लाने का खर्च भी वसूला गया, जो कि शर्मनाक है।
परिजन बोले- घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए परिजनों ने इस संकट की घड़ी में विदेश मंत्रालय, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली। राकेश के अंतिम संस्कार के दौरान ग्रामीणों और परिजनों ने सरकार से इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित कंपनी से उचित मुआवजा दिलवाने और विदेशों में कार्यरत भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाने की मांग की है, जिससे भविष्य में किसी और बेबस परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े।