मुंगेर में उद्घाटन से पहले फोरलेन सड़क में पड़ी दरार: 3,792 करोड़ की मुंगेर-मिर्जाचौकी परियोजना की गुणवत्ता पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने जताई चिंता - Munger News

मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन सड़क परियोजना उद्घाटन से पहले ही सवालों के घेरे में आ गई है। मुंगेर को भागलपुर और झारखंड के संथाल परगना स्थित मिर्जाचौकी से जोड़ने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के घोरघट और गनगनिया के बीच सड़क के एक हिस्से में बड़ी दरार उभर

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खास बात यह है कि इस मार्ग पर अभी वाहनों का पूर्ण परिचालन भी शुरू नहीं हुआ है।

सड़क किनारे धंस रही मिट्टी

स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क किनारे की मिट्टी पिछले कुछ दिनों से लगातार धंस रही थी। धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ती गई और अब सड़क की ऊपरी सतह तक पहुंचकर दरार का रूप ले चुकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो भारी वाहनों के दबाव से सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो सकता है और दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाएगा।

निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

दरार सामने आने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रही सड़क में उद्घाटन से पहले ही इस तरह की खराबी गंभीर चिंता का विषय है।

तकनीकी जानकारों का भी मानना है कि सड़क की नींव (बेस लेयर) कमजोर होने या मिट्टी के खिसकने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई हो सकती है।

3,792 करोड़ रुपये की है परियोजना

मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन सड़क परियोजना करीब 3,792 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही है। यह सड़क मुंगेर, भागलपुर और झारखंड के बीच बेहतर कनेक्टिविटी तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ऐसे में निर्माण के दौरान सामने आई इस समस्या ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

एनएचएआई ने कराया मौके का निरीक्षण

मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (नएचएआई) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मनीष कुमार ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया।

उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि अंदर की मिट्टी खिसकने के कारण सड़क में दरार आई है। निर्माण एजेंसी को तत्काल विस्तृत तकनीकी जांच कराने का निर्देश दिया गया है।

जरूरत पड़ी तो दोबारा बनेगी सड़क

प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यदि आवश्यकता पड़ी तो प्रभावित हिस्से को पूरी तरह उखाड़कर निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नए सिरे से निर्माण कराया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न हो और सड़क सुरक्षित बनी रहे।