जगह-जगह धंसे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी की पूरी कुंडली, 3 साल में NHAI की कितनी सड़कें टूटीं?

जगह-जगह धंसे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी की पूरी कुंडली, 3 साल में NHAI की कितनी सड़कें टूटीं?

लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस-वे में गड्ढे ही गड्ढे.

तारीख 13 जुलाई 2026. स्थान उत्तर प्रदेश का उन्नाव. दोपहर के 3 बज रहे थे. भारत सरकार के रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह मंच पर मुख्य अतिथि थे. मौका था कानपुर-लखनऊ के बीच तैयार यूपी के सबसे महंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन का. लाल फीता काटने के बाद भाषण देने आए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस एक्सप्रेसवे को अमेरिका की सड़कों जैसा बताया. गडकरी ने आगे भी इसी तरह काम करने का वचन भी दिया. गडकरी के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राजनाथ सिंह ने भी एक्सप्रेसवे को यूपी के लिए वरदान बताया.

हालांकि, 20 दिन बाद कहानी पलट चुकी है. 4700 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे में 80 से ज्यादा गड्ढे हो चुके हैं. कई जगहों पर सड़कें पूरी तरह धंस गई हैं. हालत इतनी खराब है कि सड़कों के पानी को सुखाने के लिए नेशनल हाईवे ऑथोरिटी के अधिकारी बिजली वाले पंखों का सहारा ले रहे हैं.

एक्सप्रेसवे में 84 गड्ढे, कैसे हो गए?

एक्सप्रेसवे बनने के 13 दिन बाद ही उन्नाव में पहला मामला देखने को मिला. यहां पर मिट्टी धंस गई. मिट्टी के धंसने से एक्सप्रेसवे में गड्ढे निकल आए. उस वक्त कंपनी ने आनन-फानन में इस गड्ढे को भर दिया. हालांकि, इसका वीडियो वायरल हो गया.

इसके बाद कई जगहों पर ऐसा देखने को मिला. मूल कारण मिट्टी का धंसना है. यानी एक्सप्रेसवे के बेस पर काम नहीं किया गया है. एनएचआईए ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है.

एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी किसकी है?

नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ने एक्सप्रेसवे के जगह-जगह पर टूटने को लेकर निर्माण कंपनी पीएनसी को नॉन-परफॉर्मर घोषित कर दिया है. इस कंपनी को अब आगे से अब नेशनल हाईवे के प्रोजेक्ट नहीं मिलेंगे. कंपनी का मुख्यालय आगरा में है. कंपनी के प्रबंधक बीजेपी सांसद नवीन जैन के भाई हैं.

यह कंपनी पहले भी विवादों में रह चुकी है. कंपनी के निदेशकों पर सीबीआई का मुकदमा तक लिखा जा चुका है. इतना ही नहीं, कंपनी पर गलत काम के लिए मध्य प्रदेश की छत्तरपुर कोर्ट से जुर्माना तक लगाया जा चुका है.

कंपनी के पास अभी कितने प्रोजेक्ट्स हैं?

पीएनसी इंफ्राटेक के पास अभी भी नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे की कम से कम 11 परियोजनाएं हैं. इनमें से 6 परियोजनाओं पर काम चल रहा है. 5 का ठेका कंपनी को मिला है. कंपनी की अधिकांश परियोजनाएं बिहार और यूपी में है. बिहार में पीएनसी इंफ्राटेक 3 परियोजनाओं पर काम कर रही है. वहीं यूपी में 2 परियोजनाओं पर काम कर ही है.

कंपनी के पास निम्न प्रोजेक्ट हैं-

1. गुजरात राज्य में भारतमाला परियोजना के तहत दिल्ली-वडोदरा (पैकेज 31) ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट (एनएच-148एन) के खंड के आठ लेन वाले एक्सेस-नियंत्रित एक्सप्रेसवे के निर्माण का प्रोजेक्ट.

2. ग्वालियर में स्वर्ण रेखा नदी पर गिरवाई पुलिस चौकी के पास महारानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा से एबी रोड (एनएच 46) तक चार लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर/फ्लाईओवर का निर्माण (द्वितीय चरण) का प्रोजेक्ट.

3. पुणे जिले में एक्सेस कंट्रोल्ड पुणे रिंग रोड के निर्माण का प्रोजेक्ट भी इसी कंपनी के पास है.

हाईवे टूटने की कितनी शिकायतें आती हैं?

केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने अप्रैल 2026 में सांसद ज्योत्सना महंत के एक सवाल के जवाब में बताया कि 3 साल में नेशनल हाईवे ऑथोरिटी के अधीन निर्मित 67 प्रोजेक्ट में शिकायतें आईं.

मंत्रालय के मुताबिक इनमें बिहार से 4, आंध्र से 3, छत्तीसगढ़ से 2, हरियाणा से 3, कर्नाटक से 2, गुजरात से एक शिकायतें आईं. अधिकांश शिकायतों में बेस के टूटने की बात कही गई थी.

NHAI ने इन शिकायतों के आधार पर कुछ कंपनियों को ब्लैकलिस्ट में डाला तो कुछ से जुर्माना वसूला.

अविनीश कुमार मिश्रा

अविनीश कुमार मिश्रा

भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद वर्ष 2019 से पत्रकारिता के पेशे में सक्रिय. राजनीतिक, सुप्रीम कोर्ट और विदेश मामलों की खबरों को कहानी के रूप में पेश करने में विशेषज्ञता. खबरें कहीं भी हों, उन्हें खोज निकालने में माहिर. टीवी9 भारतवर्ष से पहले एबीपी न्यूज़, दैनिक भास्कर और प्रभात खबर में काम किया. इस दौरान देश के दो आम चुनावों के साथ-साथ बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड के विधानसभा चुनाव कवर किए. बिहार के मधुबनी जिले का रहने वाला हूं.

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