आज का एक्सप्लेनर: दोस्त से मिलने गई लड़की, उसने 3 और दोस्तों को बुलाकर रेप-मर्डर किया; POCSO के 97% रेप मामलों में आरोपी जानने वाले ही क्यों
13 सितंबर 2026, सुबह का वक्त। दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में सड़क से सटे खेत में कुछ कुत्ते दिखे। ये एक लड़की की पुरानी हो चुकी लाश नोच रहे थे। एक हाथ शरीर से अलग कुछ दूर पड़ा था। शरीर पर चाकू घोंपने के निशान थे।
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पुलिस ने जांच शुरू की। 3 दिन बाद 4 लड़कों को गिरफ्तार किया है। इनमें 3 आरोपी नाबालिग हैं। एक तो लड़की का जानने वाला था।
आखिर क्या है दिल्ली में रेप-मर्डर का पूरा मामला और नाबालिगों में गंभीर अपराध की प्रवृत्ति क्यों बढ़ रही है; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: नाबालिग लड़की के रेप-मर्डर का पूरा मामला क्या है? जवाब: दिल्ली पुलिस के मुताबिक, पीड़िता काम की तलाश में थी। 10 सितंबर की शाम को वह अपने एक जानने वाले 17 साल के लड़के से मिलने पहुंची। उस लड़के ने अपने तीन और दोस्तों को बुला लिया।
लड़कों ने पहले शराब पी और उसके बाद नाबालिग के साथ रेप किया। एक पुलिस ऑफिसर के मुताबिक, जब पीड़िता ने पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी, तो आरोपियों ने चाकू से उसकी हत्या कर दी।
अगली सुबह स्वरूप नगर इलाके में कुशक रोड के पास एक खेत में शव फेंक दिया। ये उत्तर-पश्चिम दिल्ली का बाहरी इलाका है।
13 सितंबर की सुबह इलाके के लोगों ने शव देखा, तो पुलिस को खबर की। शरीर के कुछ हिस्सों को कुत्तों ने खा लिया था।
दिल्ली के आउटर नॉर्थ इलाके के DCP लोकेश्वरन आर. ने बताया कि मौके पर पहुंची फोरेंसिक टीम लड़की की पहचान नहीं कर पाई।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता के परिवार ने भी उसके लापता होने की खबर नहीं दी थी। परिवार ने पुलिस को बताया कि वो अक्सर घर से चली जाती थी और कुछ दिन बाद लौट आती थी।
पुलिस ने 50 से ज्यादा CCTV कैमरों के फुटेज चेक किए, तो एक टेंपो दिखा, जिस पर शक हुआ। रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए इसके मालिक को खोजा गया।
उसने पुलिस को बताया कि उसका छोटा भाई अक्सर टेंपो ले जाता था। इसके बाद पुलिस संदिग्धों तक पहुंची। 19 साल का आरोपी शिवम उर्फ सुदामा और तीन अन्य नाबालिग पकड़ में आए। टेंपो भी स्वरुप नगर की खड्डा कॉलोनी में खड़ा था।
नाबालिग आरोपियों में से 2 की उम्र 17 और एक की 16 साल है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हुए दो चाकू और आरोपियों के खून से सने कपड़े बरामद कर लिए हैं और आगे की जांच कर रही है।

पुलिस की हिरासत में एक आरोपी।
सवाल-2: 4 में से 3 आरोपी नाबालिग, आखिर बच्चों में इतना जहर क्यों भर रहा? जवाब: नाबालिगों के अपराधी बनने के पीछे 3 बड़ी वजहें हैं…
1. अश्लील वीडियो, ऑनलाइन गैंग कल्चर का असर
सोशल मीडिया पर ‘गैंग-कल्चर’ बढ़ा है। नाबालिग शेखी बघारने के लिए अपराध और गैंगवॉर से जुड़ा कॉन्टेंट शेयर करते हैं। चैलेंज वीडियोज देखकर अवैध और खतरनाक काम करते हैं।
क्राइम से जुड़ा कॉन्टेंट बार-बार देखने से किशोरों को ये नॉर्मल लगने लगता है और वह खुद क्राइम करने लगते हैं।’
ऐसे कई उदाहरण हैं, जब अश्लील वीडियो देखकर या ऑनलाइन दुनिया में ग्लैमर झाड़ने के लिए नाबालिगों ने अपराध किए…
- इसी हफ्ते की खबर है कि यूपी के गोरखपुर में कक्षा 4 का एक बच्चा फोन पर घंटों कॉन्टेंट देखता था। उसने अपनी 7 साल की बहन को पोर्न दिखाकर गंदी हरकतें कीं। स्कूल में अपनी टीचर की गंदी तस्वीर बनाई।
- जनवरी 2025 में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में ‘बीके कंपनी’ नाम के एक गिरोह के 2 नाबालिगों सहित 7 लोगों ने एक नाबालिग की हत्या करके उसका वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।
- 26 फरवरी 2025 को चेन्नई में 6 नकाबपोश लड़कों ने 28 साल के एक हिस्ट्रीशीटर का मर्डर कर दिया और सोशल मीडिया पर लिखा- रॉबर्ट 100% मर चुका है।
2. बेरोजगारी, अवसाद बनाता है अपराधी
अमेरिकी समाजशास्त्री रॉबर्ट मार्टिन की स्ट्रेन थ्योरी के मुताबिक, जब बच्चों को अपना मनपसंद गोल या कोई चीज नहीं मिलती तो मनोवैज्ञानिक दबाव, गुस्से, झुंझलाहट में अपराध करते हैं।
दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल में सीनियर साइकोलॉजिस्ट डॉ. रोमा कुमार के मुताबिक, ‘आपराधिक प्रवृत्ति के दोस्तों के दबाव में या अपनी पहचान बनाने, अच्छी लाइफस्टाइल के लिए या गरीबी के चलते मानसिक रूप से परेशान होकर चोरी जैसे अपराध करते हैं।’
3. गरीबी और नशा
दिसंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि गरीबी और नाबालिगों के अपराध करने में सीधा संबंध है।
उन्होंने NCRB के हवाले से बताया कि 2015 में 42.39% नाबालिग आरोपी 25,000 रुपए महीने की आय वाले परिवारों से थे। केवल 2.3% नाबालिग 2 से 3 लाख रुपए के बीच कमाई वाले परिवारों से थे।
हरियाणा पुलिस की स्टडी के मुताबिक, नशा करने वाले नाबालिग ज्यादा अपराध करते हैं। गांजा और भांग का नशा करने वाले नाबालिग अपराधियों का संबंध हत्या से, सूंघने वाला नशा करने वालों का संबंध रेप से और अफीम जैसा नशा करने वालों का संबंध चोरी और चेन स्नेचिंग जैसे अपराधों से था।

सवाल-3: क्या क्रूर तरीके से रेप-मर्डर के पीछे भी कोई साइकोलॉजिकल वजह है? जवाब: रेप करने के पीछे वजह सिर्फ सेक्स नहीं बल्कि कंट्रोल दिखाना होता है..
- मनोचिकित्सक डॉ. वैभव चतुर्वेदी के मुताबिक, 'यौन इच्छा के बजाय पावर और कंट्रोल रेप की प्राइमरी वजहें हैं। शराब और नशीली दवाएं हिचक कम कर देती हैं और अपराध की टेंडेंसी बढ़ जाती है। बलात्कारी का मुख्य उद्देश्य ताकत दिखाना होता है, उसके लिए महिला की उम्र मायने नहीं रखती।’
- मनोचिकित्सक प्रीतेश गौतम के मुताबिक, कुछ अपराधियों को खून देखकर संतुष्टि मिलती है। नवंबर 2023 में 16 साल के लड़के ने एक व्यक्ति की 60 बार चाकू घोंपकर हत्या की, उसके 350 रुपए लूटे और लाश के पास नाचा।
- डॉ. वैभव और डॉ. प्रीतेश कहते हैं कि बलात्कारी को अजनबी या किसी रिलेटिव पर हमला करना एक जैसा लगता है। वह पीड़ित को रिश्तेदार के बजाय अपना प्रभुत्व दिखाने की चीज की तरह देखते हैं।
सवाल-4: POCSO के आरोपियों में सबसे ज्यादा करीबी लोग क्यों हैं? जवाब: NCRB की 2024 की क्राइम रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों के साथ यौन अपराधों के POCSO कानून के तहत 'पेनीट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट', यानी जबरन शारीरिक संबंध बनाने के 96.6% मामलों में आरोपी बच्चों का पहले से परिचित था।
करीबियों के बच्चों के साथ यौन अपराध के पीछे 3 सोशल और साइकोलॉजिकल वजहें हैं…
1. पीड़ित तक आसान पहुंच, आरोपी पर भरोसा
- आरोपी और बच्चे के बीच पावर इम्बैलेंस होता है। आरोपी पीड़ित का करीबी और अक्सर उसकी निगरानी की भूमिका में होता है, जैसे- फैमिली मेंबर, रिश्तेदार, ट्यूटर या पड़ोसी। उसे बच्चे तक एकांत में पहुंच का आसान मौका मिल जाता है।
- चाइल्ड राइट्स संस्था 'प्रोटेक्ट एंड सेव द चिल्ड्रेन' की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पी. नागासाई मलाथी के मुताबिक, आरोपी बच्चे को धीरे-धीरे भरोसे में लेते हैं। उनकी भावनात्मक जरूरतों को पहचानकर ये उन्हें गिफ्ट देकर या तारीफ वगैरह करके एक खास रिश्ता बना लेते हैं।
2. दोस्ती, ऑनलाइन रिलेशनशिप का नया पैटर्न
- NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में POCSO एक्ट के तहत दर्ज रेप के करीब 50%, यानी 22,308 मामलों में फ्रेंड्स, ऑनलाइन फ्रेंड और लिव-इन पार्टनर्स आरोपी हैं। इन्होंने किशोरियों को शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए।
3. सेक्स एजुकेशन की कमी
- चिल्ड्रेन राइट एक्टिविस्ट रीता पानीकर पिंटो बताती हैं कि मॉडर्निज्म पर जोर के बावजूद सेक्स और सेक्सुएलिटी पर बात करना अभी भी टैबू है।
- करीब 70% बच्चे घर में ये चीजें डिस्कस नहीं कर सकते और न ही इसके बारे में पढ़ाया जाता है। इसलिए बच्चे अपनी और दूसरों की बाउंड्रीज नहीं समझ पाते। इसकी शुरुआत छोटे बच्चों को गुड टच और बैड टच समझाने से होनी चाहिए।
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