कुशीनगर में गंडक बाढ़ में 3 दिन फंसे रहे दंपती: झोपड़ी की छत पर गुजारे दिन-रात, बाढ़ क्षेत्र से SDRF ने 7 घंटे रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला - Paniyahwa(Khadda) News

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शैलेश यदुवंशी | पनियहवा (खड्डा), कुशीनगर1 घंटे पहले

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कुशीनगर में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर से विंध्याचलपुर दियारा क्षेत्र जलमग्न हो गया है। बढ़ते जलस्तर के बीच विंध्याचलपुर दियारा में फंसे एक दंपती को तीन दिन बाद सुरक्षित निकाला गया। बाढ़ के पानी से चारों ओर घिर जाने के कारण दोनों झोपड़ी की छत पर बैठकर मदद का इंतजार कर रहे थे।

बच्चों की सूचना पर प्रधान ने तत्काल एसडीएम को सूचना दी। प्रशासन के निर्देश पर एसडीआरएफ ने विशेष रेस्क्यू अभियान चलाकर दंपती को सुरक्षित निकाल लिया, जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

खबर से जुड़ी तस्वीरें…

विंध्याचलपुर दियारा में फंसे विनोद साहनी और पत्नी इसरावती देवी।

विंध्याचलपुर दियारा में फंसे विनोद साहनी और पत्नी इसरावती देवी।

नदी किनारे मौजूद एसडीएम सर्वेश सिंह ने दंपत्ति से मिलकर बातचीक की।

नदी किनारे मौजूद एसडीएम सर्वेश सिंह ने दंपत्ति से मिलकर बातचीक की।

अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला…

कुशीनगर के नौतार जंगल गांव विनोद साहनी (40) और उनकी पत्नी इसरावती देवी (35) विंध्याचलपुर दियारा खेत की रखवाली करने रोजाना जाते थे। रविवार को गंडक नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से विंध्याचलपुर दियारा पूरी तरह जलमग्न हो गया। दियारा में खेती कर रहे अधिकांश किसान तो समय रहते अपने पशुओं के साथ सुरक्षित अपने गांव पर लौट आए, लेकिन विनोद साहनी और उनकी पत्नी इसरावती देवी वहीं रुक गए। उन्हें डर था की अगर वो भी अन्य किसान की तरह हार मानकर घर वापस लौट गए तो पशु उनकी साल भर की मेहनत को बरबाद कर देंगे।

इसी डर से पति-पत्नी ने गांव में बने अस्थाई झोपड़ी में रुकने का फैसला लिया। चारों तरफ पानी भरने और तेज बहाव के कारण दंपती का बाहर निकलना नामुमकिन हो गया। अपनी जान बचाने के लिए दोनों ने झोपड़ी की छत पर शरण ली। दोनों भूखे-प्यासे तीन दिन तक मदद का इंतजार करते रहे। विनोद साहनी के तीन बेटे और एक बेटी है। वह खेती करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते है।

तेज बहाव के कारण ग्रामीणों की कोशिश हुई फेल

दंपती ने फोन पर अपने परिजनों को बाढ़ में फंसे होने की सूचना दी। परिजनों और ग्रामीणों ने अपनी तरफ से उन्हें निकालने की कोशिश की, लेकिन नदी का बहाव इतना खतरनाक था कि कोई भी साधारण नाविक वहां तक पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा सका। थक-हारकर परिजनों ने सोमवार देर शाम इस बात की जानकारी गांव के प्रधान को दी। प्रधान ने तत्काल खड्डा एसडीएम सर्वेश सिंह को सूचना दी।

एसडीएम के निर्देश पर चला विशेष रेस्क्यू अभियान

एसडीएम सर्वेश सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत राजस्व विभाग और एसडीआरएफ की टीम को अलर्ट किया। मंगलवार सुबह राजस्व टीम की मौजूदगी में एसडीआरएफ के जवानों ने उफनती लहरों के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। करीब 7 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद टीम दंपती तक पहुंची और उन्हें सुरक्षित बोट में बैठाकर किनारे लेकर आई। दंपती को सुरक्षित देख परिजनों की आंखों में आंसू आ गए।

प्रशासन की अपील: सुरक्षित स्थानों पर जाएं

नायब तहसीलदार खड्डा अभिषेक कुमार ने बताया-

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एसडीआरएफ की टीम ने 7 घंटे की मशक्कत के बाद पति-पत्नी दोनों को सुरक्षित रेस्क्यू कर बाहर निकाल लिया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। दियारा क्षेत्र में रह रहे किसानों से अपील है कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में वे तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।

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