सीएम ने फिर कहा-30 दिन में काम निपटाएं: मेरे पास शिकायत आने का मतलब नीचे काम ठीक से नहीं हुआ : सम्राट - Patna News

पटना18 मिनट पहले

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को उन शिकायत-समस्याओं को निपटाया, जो जिलों से दूर नहीं हुईं। इसे ‘राज्यस्तरीय सहयोग कार्यक्रम’ का नाम दिया गया है। यह हरेक महीने के दूसरे मंगलवार को होगा।

इस दौरान 129 चुनिंदा मामलों में से 100 मामले निपटे। मुख्यमंत्री ने कहा-मेरे पास आवेदन (शिकायत) आने का मतलब है कि नीचे के स्तरों पर काम ठीक से नहीं हुआ। उन्होंने अफसर-कर्मियों को फिर हिदायत दी-पब्लिक के काम को लटकाएं नहीं। 30 दिन में काम नहीं हुआ, तो 31 वें दिन जिम्मेदार अफसर-कर्मी स्वत: निलंबित हो जाएंगे। मुख्यमंत्री का कहना था कि जब तक जनता समाधान से संतुष्ट नहीं होगी, तब तक इसका लक्ष्य पूरा नहीं माना जाएगा।

शिकायत-समस्या दूर होने पर जहानाबाद की गुंजन कुमारी, मुजफ्फरपुर के राजीव कुमार, सीवान की अनिता देवी आदि खुश हुए। मुख्यमंत्री ने सचिवालय के आवेदन प्राप्ति केंद्र के नए शिलापट्ट और ‘सहयोग पथ’ का उद्‌घाटन किया। मुख्यमंत्री द्वारा जनता की शिकायतों की सुनवाई-समाधान के दौरान कई अफसर-कर्मी दोषी पाए गए। गोरौल के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी राजू कुमार निलंबित हुए। उन पर दाखिल-खारिज के निष्पादन में अनावश्यक विलंब का आरोप है। पुपरी (सीतामढ़ी) के तत्कालीन सीओ तथा राजस्व कर्मचारी पर कड़ी कार्रवाई होगी।

हर माह के दूसरे मंगलवार को होगा कार्यक्रम- सहयोग शिविर की बड़ी बातें पहले ही दिन बंपर समाधान : शिविर में दर्ज 129 आवेदनों में से 100 उपस्थित आवेदकों के मामलों का तुरंत निष्पादन हुआ। -30 दिनों का अल्टीमेटम : मुख्यमंत्री ने कहा-नीचे के स्तर से छूटी हुई समस्याओं का हर हाल में 30 दिनों के भीतर फाइनल निपटारा हो। -दस्तावेज कम होने पर रीजैक्शन नहीं : अब कागजात की कमी होने पर अफसर आवेदन को खारिज नहीं कर पाएंगे। आवेदक को नोटिस देकर दस्तावेज मंगाना होगा। -सोलर योजना का मास्टर स्ट्रोक : मुख्यमंत्री ने कहा-सोलर योजना के तहत 126 यूनिट से ज्यादा बिजली पैदा करने पर उपभोक्ताओं को बिजली के रुपए दिए जाएंगे। गांवों को ‘’सोलर विलेज’’ बनाया जाएगा। -पेंशन पर सख्त डेडलाइन : मुख्यमंत्री बोले-जिन वाजिब लोगों की पेंशन रुकी या लंबित है, उनके आवेदनों का निपटारा कर अगले महीने की 10 तारीख तक हर हाल में पेंशन दें।

इस पहल के मायने और बड़े बदलाव - सीधे समाधान मॉडल जब लोग सीओ, बीडीओ कार्यालय और कलेक्ट्रेट का चक्कर काटकर थक जाते हैं, तब मुख्यमंत्री तक पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री ने इस स्थिति को भांपा। कहा कि अगर कोई मामला उन तक आ रहा है, तो इसका मतलब प्रशासनिक कड़ियों में खामी है।

लोगों को सीधे राहत सिर्फ तकनीकी कारणों या किसी एक सर्टिफिकेट की कमी की वजह से गरीब कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। सरकार ने इस संस्कृति को बदला। आवेदकों को मौका देने का फैसला दिखाता है कि सरकार जनता को राहत देने के मूड में है।

रूरल इकोनॉमी को बूस्ट 125 यूनिट फ्री बिजली देने के साथ सौर ऊर्जा से कमाई का मॉडल बिहार के ग्रामीण इलाकों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। बरसात के बाद नई सड़कों के निर्माण में तेजी लाने का निर्देश सीधे तौर पर ग्रामीण कनेक्टिविटी को रफ्तार देने की बड़ी कोशिश है।

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