30 साल का सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड: क्या बैंक FD से बेहतर है यह सरकारी निवेश? जानें सही विकल्प
30 साल का सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड: क्या बैंक FD से बेहतर है यह सरकारी निवेश? जानें सही विकल्प
Published: Friday, August 14, 2026, 19:27 [IST]
भारत के 30 साल वाले सोवरेन ग्रीन बॉन्ड (SGrB) की आज यानी शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को नीलामी होने जा रही है। यह इस हफ्ते केंद्र सरकार की सिक्योरिटीज बिक्री का ही एक हिस्सा है। सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे लोग अब आरबीआई के इस गारंटीड बॉन्ड की तुलना आकर्षक ब्याज दे रही बैंक एफडी और रेट-सेंसिटिव गिल्ट फंड्स से कर रहे हैं। हालांकि, सही विकल्प चुनने से पहले ड्यूरेशन रिस्क, टैक्स कटने के बाद मिलने वाले असली रिटर्न और आने वाले कुछ सालों की लिक्विडिटी जरूरतों को समझना जरूरी है।
फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली छमाही (H1 FY27) के आधिकारिक जारी कैलेंडर के अनुसार, 10 से 14 अगस्त की इस विंडो में 5,000 करोड़ रुपये का 30-वर्षीय SGrB पेश किया गया है। इसके साथ ही 3 साल, 7 साल और 30 साल के पारंपरिक जी-सेक भी नीलामी में शामिल हैं। आरबीआई आमतौर पर शुक्रवार को ही इन सिक्योरिटीज की नीलामी करता है। इसके नतीजे उसी दिन घोषित होते हैं, दोपहर बाद से अलॉटमेंट दिखने लगता है और T+1 बेसिस पर सेटलमेंट हो जाता है। इसमें से 5 फीसदी हिस्सा नॉन-कॉम्पिटिटिव रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित रखा गया है।

आरबीआई जी-सेक बनाम बैंक एफडी बनाम गिल्ट फंड्स
यील्ड के मौजूदा रुझानों को देखें तो लंबी अवधि के बॉन्ड्स फायदे का सौदा लग रहे हैं, लेकिन ब्याज दरों का चक्र और टैक्स का गणित पूरी तस्वीर बदल देता है। जून के अंत के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का 30-वर्षीय यील्ड 7.3 फीसदी के करीब था। वहीं, 1 से 3 साल की टॉप बैंक एफडी पर 7.5 से 8.5 फीसदी का ब्याज ऑफर किया जा रहा है। गिल्ट और शॉर्ट-ड्यूरेशन फंड्स के एक साल का रिटर्न 5 से 6 फीसदी के आसपास घूम रहा है, जो पोर्टफोलियो ड्यूरेशन पर निर्भर करता है। इसलिए निवेशकों को सिर्फ विज्ञापनों में दिख रही ब्याज दरों पर नहीं, बल्कि अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से असली कमाई का हिसाब लगाना चाहिए।
| निवेश विकल्प | टैक्स से पहले अनुमानित रिटर्न | टैक्स के बाद अनुमानित रिटर्न (30% स्लैब) | टीडीएस (TDS) |
|---|---|---|---|
| 30-वर्षीय SGrB (ऑक्शन) | ~7.3% रेफरेंस यील्ड | कूपन इनकम पर ~5.1% | सरकारी प्रतिभूतियों पर कोई TDS नहीं |
| बैंक एफडी (1–3 साल) | ~7.5%–8.5% | ~5.3%–6.0% | सेक्शन 194A के तहत TDS लागू |
| गिल्ट/शॉर्ट-ड्यूरेशन फंड्स | हालिया 1-साल में ~6%–8% | रिडेम्पशन के समय स्लैब के अनुसार टैक्स | ग्रोथ प्लान पर कोई TDS नहीं |
ध्यान दें: SGrB की अंतिम यील्ड ऑक्शन में तय होगी; म्यूचुअल फंड रिटर्न बदल सकते हैं। एफडी की दरें बैंक और अवधि के हिसाब से अलग होती हैं। निवेश से पहले अपने टैक्स स्लैब और सरचार्ज की जांच जरूर करें।
ड्यूरेशन रिस्क: 3 साल और 7 साल बनाम 30 साल का SGrB, रिटेल डायरेक्ट चेकलिस्ट और टैक्स का नियम
जब ब्याज दरें बदलती हैं, तो लंबी अवधि वाले बॉन्ड्स की कीमतों में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव आता है, जबकि छोटी अवधि वाले बॉन्ड कम प्रभावित होते हैं। ऐसे में जो रिटायर्ड लोग निकट भविष्य के खर्चों को ध्यान में रखकर निवेश कर रहे हैं, उनके लिए 3 से 7 साल की एफडी या बॉन्ड्स बेहतर स्थिरता देते हैं। वहीं, जो निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव से सहज हैं, वे कॉस्ट-एवरेजिंग के लिए गिल्ट फंड्स में एसआईपी कर सकते हैं। अगर आप पहली बार बॉन्ड बाजार में कदम रख रहे हैं, तो आरबीआई रिटेल डायरेक्ट (RBI Retail Direct) के जरिए छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं। इसके लिए बस RDG अकाउंट खोलें, 'Primary Market' चुनें, बोली लगाएं, शाम को ऑक्शन का रिजल्ट देखें और T+1 दिन में बॉन्ड्स आपके खाते में आ जाएंगे।
नीलामी में हिस्सा लेने से पहले टैक्स से जुड़ी ये बातें याद रखें: जी-सेक और एफडी से मिलने वाले ब्याज पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। अप्रैल 2023 के नियमों के बाद अब डेट म्यूचुअल फंड पर भी स्लैब दर से ही टैक्स लगता है। राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार की सिक्योरिटीज पर मिलने वाले ब्याज पर कोई टीडीएस (TDS) नहीं कटता, जिससे कैश-फ्लो ट्रैक करना आसान हो जाता है। हालांकि, अगर आप मैच्योरिटी से पहले बॉन्ड बेचते हैं, तो होल्डिंग पीरियड के आधार पर कैपिटल गेंस टैक्स लगेगा। बोली लगाने से पहले आज के प्लेटफॉर्म कट-ऑफ टाइम को ध्यान से पढ़ लें।
Story first published: Friday, August 14, 2026, 19:27 [IST]
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