कलेक्ट्रेट में रो पड़ीं छात्राएं, बोलीं- भविष्य खराब मत करो: उज्जैन में 300 स्टूडेंट्स का प्रदर्शन; अभिभावक बोले- स्कूल 15Km दूर, बेटियों की सुरक्षा की चिंता - Ujjain News

कलेक्ट्रेट में रो पड़ीं छात्राएं, बोलीं- भविष्य खराब मत करो:उज्जैन में 300 स्टूडेंट्स का प्रदर्शन; अभिभावक बोले- स्कूल 15Km दूर, बेटियों की सुरक्षा की चिंता

उज्जैन12 घंटे पहले

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उज्जैन में सराफा स्कूल को दाऊदखेड़ी में शिफ्ट करने के विरोध में शुक्रवार को 300-350 छात्राओं ने कलेक्ट्रेट घेरा। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान 2 छात्राएं बेहोश हो गईं, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। प्रदर्शन में एक छात्रा रोने लगी और कहा- हमारा भविष्य बर्बाद मत करिए।

छात्रा दीपिका शर्मा ने कहा- स्कूल को शहर से करीब 12-15 किलोमीटर दूर दाऊदखेड़ी शिफ्ट किया जा रहा है। इतनी दूर स्कूल जाने में आने-जाने और सुरक्षा की परेशानी होगी। वहीं, सलोनी शर्मा ने कहा- हम ‘दाऊदखेड़ी नहीं जाएंगे’ और ‘ये मनमानी नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए।

अभिभावक उर्मिला विश्वकर्मा ने बताया- उनकी दो बेटियां 9वीं और 11वीं कक्षा में पढ़ती हैं। भैरूगढ़ से जयसिंहपुरा में बच्चों के लिए किराए का कमरा लिया है, लेकिन नए स्थान पर शराब की दुकान और असुरक्षित माहौल को लेकर चिंता है। 25-30 किलोमीटर दूर से छात्राएं कैसे आएंगी।

प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें देखिए

स्कूल शिफ्ट किए जाने के विरोध में कलेक्ट्रेट में रो पड़ी छात्रा।

स्कूल शिफ्ट किए जाने के विरोध में कलेक्ट्रेट में रो पड़ी छात्रा।

बड़ी संख्या में छात्राओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया।

बड़ी संख्या में छात्राओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया।

छात्राएं बोलीं- हमारी जिंदगी बर्बाद मत करिए। स्कूल दूर है।

छात्राएं बोलीं- हमारी जिंदगी बर्बाद मत करिए। स्कूल दूर है।

छात्राओं की सुरक्षा और परिवहन को लेकर चिंता

अभिभावक आशीष जैन ने बताया- दाऊदखेड़ी तक स्कूल पहुंचने में सुरक्षा, परिवहन और रोजाना आने-जाने की परेशानियों को लेकर चिंता है। स्कूल शहर से बाहर या दूर शिफ्ट होने पर विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर आने-जाने का अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

अभिभावक आजाद पटेल ने बताया- छात्राओं के लिए लंबी दूरी और कई बार बस बदलकर स्कूल पहुंचना परेशानी का कारण बन सकता है। अगर स्कूल शहर से बाहर शिफ्ट किया जाता है तो छात्राओं के आने-जाने और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा।

6 स्कूलों के 2500 से 2600 बच्चे प्रभावित होने का दावा

स्कूल बचाओ समिति से जुड़े एडवोकेट जितेंद्र सेंगर के मुताबिक, इस प्रक्रिया से करीब 6 स्कूलों के 2500-2600 बच्चे प्रभावित होंगे। सराफा के 9वीं से 12वीं तक के कन्या विद्यालय में करीब 300 से 350 छात्राएं पढ़ती हैं।

इसी तरह महाकाल मैदान स्थित कन्या माध्यमिक विद्यालय में कक्षा पहली से आठवीं तक करीब 350 छात्राएं हैं। इसके अलावा महाराजवाड़ा, सीएम राइज, नूतन और माधवेंद्र जैसे स्कूलों के विद्यार्थी भी इस बदलाव से प्रभावित होंगे।

जितेंद्र सेंगर के मुताबिक, सभी स्कूलों को मिलाकर 1000 से ज्यादा छात्राएं प्रभावित हो रही हैं, जबकि छात्र अलग हैं। सबसे बड़ी समस्या उन विद्यार्थियों की है, जो शहर से दूर ग्रामीण और बाहरी क्षेत्रों से पढ़ने आते हैं।

15-25 किलोमीटर दूर से स्कूल पहुंच रहे बच्चे

जितेंद्र सेंगर के मुताबिक, कई विद्यार्थी 15-25 किलोमीटर तक की दूरी तय करके स्कूल पहुंचते हैं। कुछ बच्चों को पहले अपने घर से चारधाम स्कूल या किसी निर्धारित स्थान तक आना पड़ता है। इसके बाद वहां से उन्हें बस मिलती है।

उनके अनुसार, कई बच्चे सुबह 7 से 8 बजे के बीच घर से निकलने के बावजूद स्कूल पहुंचने में काफी समय लगाते हैं। स्कूल की छुट्टी करीब साढ़े चार बजे होने के बाद बस से वापस आने में भी समय लगता है और कई बच्चे शाम 7 बजे तक घर पहुंचते हैं।

अभिभावक सोनू ठाकुर ने बताया- सबसे ज्यादा असर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर पड़ेगा। अगर बच्चों को रोज छोड़ने और लेने जाना पड़े तो मजदूरी, भट्ठे या ऑटो चलाने जैसे काम करने वाले माता-पिता के लिए पूरा दिन निकालना मुश्किल होगा।

छात्राओं ने कलेक्ट्रेट में प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

छात्राओं ने कलेक्ट्रेट में प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

8 किमी के दायरे में स्कूल होने का दावा

शिक्षा संघर्ष समिति के एडवोकेट जितेंद्र सेंगर ने स्कूलों को दाऊदखेड़ी शिफ्ट किए जाने के फैसले पर सवाल उठाया। RTE एक्ट में बच्चों के निवास स्थान से स्कूल की दूरी को लेकर प्रावधान हैं।

सेंगर के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर स्कूल की दूरी 1 से 3 किलोमीटर, माध्यमिक स्तर पर 5 किलोमीटर और दसवीं तक के विद्यार्थियों के लिए अधिकतम 8 किलोमीटर के दायरे में होनी चाहिए।

उन्होंने करीब 12 से 15 किलोमीटर दूर दाऊदखेड़ी स्कूल शिफ्ट किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी दूरी पर स्कूल होने से विद्यार्थियों को आने-जाने में परेशानी हो सकती है।

स्कूल प्रबंधन भी परेशान, लेकिन खुलकर विरोध नहीं

समिति से जुड़े लोगों के मुताबिक, प्रिंसिपल और शिक्षक निजी बातचीत में बच्चों के नुकसान की बात स्वीकार करते हैं, लेकिन खुलकर सामने आने से बच रहे हैं। अभिभावक, छात्राएं, शिक्षक और प्रिंसिपल कोई भी इस फैसले से खुश नहीं है। स्कूल प्रबंधन भी चाहता है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

DEO बोले- शासन का निर्णय, मॉनिटरिंग समिति लेगी अंतिम फैसला

जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र खत्री ने कहा कि यह शासन का निर्णय है। स्कूलों से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे। इस मामले में जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समिति अंतिम निर्णय लेगी। फिलहाल सराफा स्कूल को दाऊदखेड़ी शिफ्ट करने के मामले में अंतिम निर्णय जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समिति को लेना है।

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