सहजानंद सेवा समाज के मतदान में दो गुटों में हुई झड़प, चुनाव ​स्थगित, 31 जनवरी तक चुनाव कराने का निर्णय - Bokaro News

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सहजानंद सरस्वती समाज समिति का चुनाव रविवार को सेक्टर-8 बीएड कॉलेज में हो रहा था। इसमें मतदान के दौरान दो गुटों में झड़प हो गई। इसके बाद मतदान रोक दिया गया।

करीब 1234 मतदाताओं में 400 लोगों ने मतदान कर दिया था। झड़प के बाद दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर फर्जी वोटर बनाने और मनमाने तरीके से वोट करने, रजिस्टर और मतपेटी छीनने और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया। इसमें अध्यक्ष पद के उम्मीदवार पूर्व अध्यक्ष डॉ. टीपी सिंह और पूर्व डिप्टी मेयर अविनाश कुमार मैदान में थे। दोनों के समर्थक आमने-सामने हो गए। मामले को नियंत्रित करने के लिए सिटी डीएसपी राजीव रंजन पहुंचे थे। उसके बाद अपर समाहर्ता सुनील चंद्र और अन्य अधिकारी पहुंचकर मामले को नियंत्रित किया। इसके बाद जनरल बॉडी की बैठक हुई और चुनाव स्थगित कर 31 जनवरी तक चुनाव कराने का समय निर्धारित किया गया।

एक गुट के लोग अनुशासनहीनता कर रहे थे: सिंह चुनाव अधिकारी प्रमोद सिंह ने कहा कि तीन सदस्यीय चुनाव समिति में मुख्य संयोजक टीएन ठाकुर, राकेश राय और वे खुद थे। एक गुट के सदस्य नए सदस्य बनाने के लिए समिति द्वारा जारी क्यूआर कोड की जगह अपना क्यूआर कोड में सदस्यता शुल्क जमा करवा रहे थे और दबाव बना रहे थे। चुनाव के दौरान एक महिला ने टीएन ठाकुर के साथ अभद्रता की, मतपेटी और रजिस्टर छीन लिया। अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अविनाश कुमार के समर्थक गुंडागर्दी कर रहे थे। ऐसी घटना शोभा नहीं देती।

गलत तरीके से मतदान करवा रहे थे ​चुनाव अधिकारी: अभय कुमार मुन्ना संगठन सचिव पद के उम्मीदवार अभय कुमार मुन्ना ने कहा कि चुनाव संचालन समिति शुरू से ही गलत कर रही थी। न तो स्क्रूटनी की सूचना दी गई, ना ही नाम वापसी के बाद महासचिव के निर्विरोध चुनाव की घोषणा के लिए कोई बैठक हुई। मतदान के दौरान जब वोटर लिस्ट मांगा गया, तो चुनाव अधिकारी ने कहा लिस्ट नहीं मिलेगा, आधार कार्ड देखकर रजिस्टर में इंट्री कर मतदान करवा देंगे। बाद में मिलान होगा। जिस महिला पर आरोप लगा रहे हैं, उसे हमलोगों ने न तो सदस्य बनाया, ना ही जानते हैं। उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं होने के कारण उन्होंने विरोध किया। अध्यक्ष पद के उम्मीदवारी के लिए 20 हजार रुपए, उपाध्यक्ष के लिए 15 हजार रुपए, महासचिव व कोषाध्यक्ष के लिए 10 हजार, बाकी के लिए पांच हजार रुपए नामांकन शुल्क रखने की मनमानी भी चुनाव अधिकारियों ने की।