हर दिन 317 लोगों को काट रहा सांप! 3 साल में 987 मौतें, क्या कहती है सरकार की रिपोर्ट?
भारत में हर साल लाखों लोग सांप के काटने का शिकार होते हैं, लेकिन यह समस्या सिर्फ गांवों या जंगलों तक सीमित नहीं रह गई है. संसद में सरकार की ओर से पेश किए गए ताजा आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन साल में देशभर में 3.47 लाख से ज्यादा स्नेकबाइट के मामले दर्ज हुए हैं, जबकि 987 लोगों की मौत हुई. ये आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी स्नेकबाइट को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती मानता है और 2030 तक इससे होने वाली मौतों को आधा करने का लक्ष्य तय किया गया है.
राज्यसभा में शिवसेना (उद्धव) सांसद संजय राउत के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम चला रही है. साथ ही एंटी-स्नेक वेनम (ASV) को आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल किया गया है ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके.
तेजी से बढ़ रहे हैं मामले
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में एंटी-स्नेक वेनम की उत्पादन क्षमता फिलहाल जरूरत के मुताबिक पर्याप्त है और सरकारी और प्राइवेट कंपनियां मिलकर इसकी आपूर्ति कर रही हैं. हालांकि, राज्यवार आंकड़ों से यह भी सामने आया कि कई राज्यों में स्नेकबाइट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा और असम जैसे राज्यों में हर साल हजारों लोग सांप के काटने का शिकार हो रहे हैं.

किन राज्यों में है ज्यादा कतरा (Getty Image)
2030 तक मौतें घटाने का लक्ष्य
संसद में दिए गए जवाब के मुताबिक, सरकार ने राज्यों को स्वास्थ्यकर्मियों की ट्रेनिंग, जागरूकता अभियान, निगरानी व्यवस्था और आपातकालीन इलाज को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही 2024 में लॉन्च किए गए नेशनल एक्शन प्लान फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ स्नेकबाइट एनवेनोमिंग (NAPSE) के जरिए 2030 तक स्नेकबाइट से होने वाली मौतों में बड़ी कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है.
- 3 साल में 3.47 लाख से ज्यादा स्नेकबाइट के मामले दर्ज
- 2023-2025 के बीच 987 मौतें दर्ज
- 2025 में सबसे ज्यादा 1.40 लाख मामले और 429 मौतें
- कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में मौतों के आंकड़े सबसे ज्यादा
- सरकार ने कहा- देश में एंटी-स्नेक वेनम (ASV) का उत्पादन फिलहाल पर्याप्त
क्या कहता है सरकारी जवाब?
21 जुलाई 2026 को राज्यसभा में सांसद संजय राउत ने सरकार से पूछा कि एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध होने के बावजूद भारत में स्नेकबाइट से इतनी मौतें क्यों हो रही हैं. उन्होंने यह भी जानना चाहा कि पिछले तीन साल में कितने मामले सामने आए, कितनी मौतें हुईं और क्या देश में एंटी-स्नेक वेनम का उत्पादन पर्याप्त है.
इसके जवाब में स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि स्नेकबाइट से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ स्नेकबाइट एनवेनोमिंग’ लागू किया गया है. सरकार ने यह भी कहा कि एंटी-स्नेक वेनम को राष्ट्रीय और राज्य आवश्यक दवा सूची में शामिल किया गया है, ताकि सरकारी अस्पतालों में इसकी उपलब्धता बनी रहे.
तीन साल में कितना बढ़ा खतरा?
सरकार के संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार-
| साल | मामले | मौत |
| 2023 | 86,294 मामले | 183 मौतें |
| 2024 | 1,20,982 मामले | 375 मौतें |
| 2025 | 1,40,302 मामले | 429 मौतें |
यानी तीन सालों में कुल 3,47,578 स्नेकबाइट के मामले और 987 मौतें दर्ज की गईं. आंकड़े बताते हैं कि 2025 में मामले और मौतें, दोनों पिछले सालों की तुलना में ज्यादा रहीं.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा मामले?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2025 में सबसे ज्यादा स्नेकबाइट मामले पश्चिम बंगाल (27,471) में दर्ज हुए. इसके बाद कर्नाटक (16,805), तमिलनाडु (15,837) और ओडिशा (15,815) का स्थान रहा.
मौतों के मामले में कर्नाटक सबसे ऊपर रहा, जहां 2025 में 160 लोगों की मौत दर्ज हुई. इसके बाद पश्चिम बंगाल (65), झारखंड और मध्य प्रदेश (26-26), तमिलनाडु (26) और महाराष्ट्र (23) में सबसे ज्यादा मौतें हुईं.
सरकार क्या कदम उठा रही है?
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार स्नेकबाइट से होने वाली मौतों को कम करने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है.
- स्वास्थ्यकर्मियों को स्नेकबाइट के इलाज की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है.
- राज्यों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं.
- निगरानी प्रणाली (Surveillance) मजबूत की जा रही है.
- एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है.
- आपातकालीन दवाएं, एंबुलेंस और अन्य संसाधनों को मजबूत किया जा रहा है.
सरकार ने यह भी बताया कि अब तक 12 राज्यों ने स्नेकबाइट को नोटिफायबल डिजीज घोषित कर दिया है. यानी ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग करना अनिवार्य होगा, जिससे सही आंकड़े जुटाने और समय पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी.
राज्यों के आंकड़े क्या कहते हैं?
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले तीन सालों में देश के लगभग सभी राज्यों में स्नेकबाइट के मामले दर्ज हुए हैं. 2025 में सबसे ज्यादा मामले पश्चिम बंगाल (27,471) में सामने आए, जबकि इसके बाद कर्नाटक (16,805), तमिलनाडु (15,837), ओडिशा (15,815) और असम (11,817) का स्थान रहा. महाराष्ट्र में 8,558, गुजरात में 8,030, आंध्र प्रदेश में 4,707, बिहार में 4,346, झारखंड में 3,776, राजस्थान में 3,406 और मध्य प्रदेश में 3,081 मामले दर्ज किए गए.

सरकार का 2030 का लक्ष्य (Getty Image)
वहीं तेलंगाना (2,998), केरल (2,987), छत्तीसगढ़ (2,594), त्रिपुरा (1,146), जम्मू-कश्मीर (1,165) और उत्तर प्रदेश (1,086) में भी एक हजार से ज्यादा मामले सामने आए. दूसरी ओर, लद्दाख, लक्षद्वीप, चंडीगढ़, सिक्किम, नागालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में मामले अपेक्षाकृत कम रहे.
कहां हुई कितनी मौत?
मौतों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कर्नाटक सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य रहा, जहां 2025 में 160 लोगों की जान गई. इसके बाद पश्चिम बंगाल (65), झारखंड (26), मध्य प्रदेश (26), तमिलनाडु (26), ओडिशा (23), महाराष्ट्र (23), उत्तर प्रदेश (19), गुजरात (16), आंध्र प्रदेश (13) और असम (13) में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गईं.
कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों जैसे दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गोवा, चंडीगढ़, लद्दाख और लक्षद्वीप में 2025 के दौरान स्नेकबाइट से कोई मौत दर्ज नहीं हुई, बिहार में मौत के 3, छत्तीसगढ़ में 4 मौत के मामले सामने आए. कुल मिलाकर, 2023 में 86,294 मामले और 183 मौतें, 2024 में 1,20,982 मामले और 375 मौतें, जबकि 2025 में 1,40,302 मामले और 429 मौतें दर्ज की गईं, जिससे साफ है कि स्नेकबाइट के मामले और मौतें लगातार बढ़ रही हैं.
2030 का क्या है लक्ष्य?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2030 तक स्नेकबाइट से होने वाली मौतों और विकलांगता को आधा करने का लक्ष्य रखा है. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने मार्च 2024 में National Action Plan for Prevention and Control of Snakebite Envenoming (NAPSE) लॉन्च किया. इस योजना के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय और नीति आयोग समेत कई विभाग मिलकर काम कर रहे हैं.
क्या एंटी-स्नेक वेनम की कमी है?
सरकार ने संसद में साफ कहा कि ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से मिली जानकारी के अनुसार देश में सरकारी और निजी कंपनियों की कुल उत्पादन क्षमता फिलहाल जरूरत के मुताबिक पर्याप्त है. सरकार ने यह भी बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को संबंधित राज्य सरकारें सहयोग देती हैं, जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है.

अंकिता
शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.
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