परीक्षा में धांधली: सिपाही भर्ती में सेटरों का नया खेल, बस 33 गोले भरो, बाकी भरवा देंगे - Patna News
- Hindi News
- Local
- Bihar
- Patna
- New Game Of Setters In Soldier Recruitment, Just Fill 33 Boxes, The Rest Will Be Filled.
पटना24 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

बिहार पुलिस की दारोगा बहाली मुख्य परीक्षा में धांधली की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराए 108 दिन हो चुके हैं। ईओयू और आयोग के स्तर पर चल रही जांच अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है। अभ्यर्थियों ने 4 जून को ही ईओयू को डिजिटल सबूतों के साथ पहली शिकायत सौंपी थी। शुरुआती जांच के बाद ईओयू ने 30 अगस्त को पूर्णिया और गयाजी में दर्ज केस को टेकओवर भी कर लिया।
अभ्यर्थियों ने 15 जून को बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग को लिखित पत्र देकर गया और पूर्णिया में दर्ज मुकदमों का ब्योरा देते हुए जांच पूरी होने तक परिणाम रोकने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद आयोग ने 19 जून को आनन-फानन में परिणाम घोषित कर दिया।
जांच में यह बात साबित हो चुकी है कि धांधली हुई है, लेकिन ईओयू की एसआईटी अब तक गिरोह के सरगना तक नहीं पहुंची है। धांधली करने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। साढ़े तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जांच केवल नोटिस भेजने, केंद्राधीक्षकों को तलब करने और पूछताछ करने तक ही सिमटी हुई है। पूर्णिया के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय केंद्र के रूम नंबर 23 से परीक्षा अवधि में प्रश्न-पत्र बाहर भेजने के मामले में वीक्षक मृत्युंजय कुमार पर चार्जशीट समर्पित हो चुकी है। वहीं, गयाजी के गया कॉलेज केंद्र से सॉल्वर आशुतोष को जेल भेजा जा चुका है। इसके बावजूद प्रश्न-पत्र प्राप्त करने वाले मुख्य रिसीवरों और सॉल्वर गिरोह के अंतरजिला सिंडिकेट पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है।
केंद्रीय चयन पर्षद की सिपाही भर्ती परीक्षा में सेटरों और माफियाओं ने धांधली का पुराना फॉर्मूला बदल दिया। 1 अक्टूबर 2023 को पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होने के बाद गिरोह ने सीधे प्रश्नपत्र लीक कराने के बजाय परीक्षा केंद्र और सिस्टम के भीतर से ओएमआर शीट मैनेज करने की नई साजिश रची। आर्थिक अपराध इकाई की जांच में इसका खुलासा हुआ है। गिरोह ने अभ्यर्थियों को सख्त निर्देश दिया था कि वे परीक्षा हॉल में ओएमआर शीट पर 33 प्रश्नों के ही गोले भरें और बाकी खाली छोड़ दें, जिन्हें बाद में अंदरूनी सांठगांठ से सही उत्तरों के साथ भरा जाना था।
ईओयू के अनुसार, सेटर विशाल कुमार और अरवल निवासी मुख्य सरगना राजकिशोर के बीच की व्हाट्सएप चैट से इस रैकेट का पर्दाफाश हुआ। 2023 की परीक्षा में सुबह 8:30 बजे व्हाट्सएप ग्रुपों में आंसर-की भेजकर पेपर लीक कराया गया था, जिससे परीक्षा रद्द हो गई थी। इसके बाद माफिया ने नया कोड लागू किया। अभ्यर्थियों को निर्देश था कि परीक्षा खत्म होते ही वे प्रश्नपत्र का पहला सवाल, अंतिम सवाल, बुकलेट नंबर और ओएमआर शीट नंबर तुरंत सेटरों को भेजें। इसके आधार पर अंदरूनी मिलीभगत से संबंधित अभ्यर्थी की ओएमआर शीट को ट्रेस कर खाली छूटे गोलों को रंग दिया जाता था।
10 लाख में सौदा, प्रमाणपत्र और ब्लैंक एफिडेविट रखते थे बंधक
जांच में सामने आया है कि सिपाही पद के लिए प्रति अभ्यर्थी 8 लाख से 10 लाख में सौदा तय हुआ था। इसमें 1.5 लाख से 2 लाख एडवांस कैश लेते थे। रिजल्ट आने पर बाकी रकम ली जाती थी। शर्त रखी गई थी कि मेरिट या फिजिकल में छंटने पर 2 लाख जब्त रहेंगे। अभ्यर्थी पैसे देने से मुकर न जाएं, इसके लिए उनके मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र और हस्ताक्षर किए हुए ब्लैंक चेक गिरोह अपने पास बंधक रखता था।
हाईकोर्ट से झटका : 6 महीने में दूसरी बार सरगना की जमानत अर्जी खारिज
पटना हाईकोर्ट ने सिपाही बहाली में धांधली करने वाले गिरोह के मुख्य सरगना राजकिशोर (अरवल, करपी) की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति संदीप कुमार की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि 27 अप्रैल को याचिका खारिज होने के महज 6 महीने के भीतर दोबारा दाखिल करना पूरी तरह अपरिपक्व है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि बिना किसी ठोस परिस्थिति परिवर्तन के कुछ ही महीनों में बार-बार जमानत याचिका दाखिल करने की परिपाटी उचित नहीं है। हालांकि अदालत ने यह छूट दी कि यदि ट्रायल में कोई प्रगति नहीं होती है तो आरोपी बाद में नई अर्जी दे सकता है।
.