हनुमानगढ़ में शिक्षक संघ का 33वां जिला सम्मेलन: 389 शिक्षकों ने उठाईं 19 मांगें, ट्रांसफर नीति से लेकर डीपीसी तक पर जोर - Hanumangarh News
हनुमानगढ़ में शिक्षक संघ के 33वे सम्मेलन में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के ट्रांसफर से रोक हटाने, स्थायी ट्रांसफर नीति और बकाया डीपीसी पूरी करने की मांग।
हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित जाट भवन में राजस्थान शिक्षक संघ हनुमानगढ़ का 33वां जिला सम्मेलन आयोजित हुआ।
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जिला अध्यक्ष जगनंदन सिंह की अध्यक्षता में हुए सम्मेलन में जिले के विभिन्न स्कूलों से 78 महिलाओं समेत कुल 389 शिक्षकों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन में शिक्षक संगठन के इतिहास, शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों और शिक्षकों की 19 मांगों पर चर्चा हुई। राज्य सरकार से इन मांगों को पूरा करने की अपील की गई।
शिक्षा बजट और स्कूल बंद होने पर चिंता
सम्मेलन के मुख्य वक्ता STFI के संस्थापक सदस्य वकील सिंह ने शिक्षक संगठन के इतिहास, विकास, महत्व और मौजूदा चुनौतियों पर विचार रखे। उन्होंने शिक्षा पर कम होते बजट और स्कूलों के बंद होने से बढ़ रही आर्थिक असमानता पर चिंता जताई।
अखिल भारतीय किसान सभा के तहसील अध्यक्ष चरणप्रीत सिंह बराड़ ने वैज्ञानिक सोच के महत्व पर जोर देते हुए शिक्षकों से छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की अपील की।
जरूरतमंद छात्रों तक पहुंचे सरकारी योजनाओं का लाभ
मुख्य अतिथि डाइट प्रिंसिपल हनुमानगढ़ मधुबाला ने शिक्षकों से सरकार की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद छात्रों तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने शिक्षकों से अपने कार्यों के जरिए आदर्श शिक्षक के रूप में पहचान बनाने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि पूर्व प्रिंसिपल राकेश कुमार ढाका ने केशवानंद भारती चेरिटेबल ट्रस्ट संगरिया के शिक्षा क्षेत्र में योगदान की चर्चा की और सार्वजनिक संस्थाओं को बचाने की अपील की।
ट्रांसफर से लेकर स्थायी नीति तक मांग
सम्मेलन में शिक्षकों ने तृतीय श्रेणी शिक्षकों के ट्रांसफर पर लगी रोक हटाने की मांग प्रमुखता से उठाई। सभी कैटेगरी के शिक्षकों के लिए स्थायी ट्रांसफर नीति लागू करने की भी मांग की गई। अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों और संस्कृत शिक्षा विभाग में 2012 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता खत्म करने की मांग भी रखी गई।
बकाया डीपीसी पूरी करने और खाली पद दिखाने की मांग
शिक्षकों ने 1 अप्रैल 2026 तक की सभी बकाया डीपीसी समय पर पूरी करने की मांग की। पदोन्नति के बाद होने वाली काउंसलिंग में सभी खाली पद प्रदर्शित करने और दो साल से कम सेवा वाले शिक्षकों को प्राथमिकता देने की मांग भी रखी गई।

सम्मेलन में जिले के विभिन्न स्कूलों से 78 महिलाओं समेत कुल 389 शिक्षकों ने हिस्सा लिया।
पे प्रोटेक्शन और ग्रीष्मकालीन अवकाश का मुद्दा
सम्मेलन में पे प्रोटेक्शन के नाम पर कथित विसंगतिपूर्ण वित्तीय वसूली रोकने, व्यावहारिक शैक्षिक कैलेंडर लागू करने और ग्रीष्मकालीन अवकाश पूर्ववत करने की मांग उठी। शिक्षकों ने ट्रांसपोर्ट वाउचर का डेढ़ साल का बकाया भुगतान करने की मांग भी रखी।
स्कूलों में स्टाफ और मूलभूत सुविधाओं पर जोर
शिक्षकों ने विद्यालयों में पर्याप्त स्टाफ, बिजली-पानी और कमरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। SFG राशि न्यूनतम 50 हजार रुपए करने तथा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने पर भी जोर दिया गया।
इन मांगों को भी प्रस्ताव में किया शामिल
सम्मेलन में 2021 से क्रमोन्नत विद्यालयों में नए पदों की वित्तीय स्वीकृति, इंग्लिश मीडियम स्कूलों में सभी पद भरने और नव चयनित PTI के स्थायीकरण आदेश जारी करने की मांग की गई। इसके साथ RGHS योजना अनवरत जारी रखने और वेतन विसंगतियों के समाधान की मांग भी उठाई गई।
शिक्षकों ने संविदा भर्ती पर रोक लगाने, कार्यरत सहायक अध्यापकों व अन्य शिक्षाकर्मियों का स्थायीकरण करने, B.Ed इंटर्नशिप के दौरान वेतन कटौती रोकने और कंप्यूटर अनुदेशकों को शिक्षकों के समान वेतन देने की मांग रखी। OPS से छेड़छाड़ नहीं करने तथाप्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल डीपीसी प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग भी शामिल रही।
संस्कृत शिक्षा के लिए अलग मांगें
संस्कृत शिक्षा में वार्षिक डीपीसी कैलेंडर लागू करने और सामान्य शिक्षा की तरह स्टाफिंग पैटर्न लागू करने पर भी जोर दिया गया।
सेवानिवृत्त शिक्षक नेता भी रहे मौजूद
मंच का संचालन सभाध्यक्ष सतीश चोपड़ा और जिला मंत्री राम निवास ने संयुक्त रूप से किया। सम्मेलन में सेवानिवृत्त शिक्षक नेता बृज लाल छींपा, मनोहर बिश्नोई, साहब राम भादू, नौरंग भारती, हरदीप रमाणा, मनोहर लाल बंसल एवं प्राचार्य हरलाल ढाका सहित शिक्षक मौजूद रहे।