35 लाख रिश्वत केस में CGST सुपरिटेंडेंट को झटका: पंचकूला CBI कोर्ट ने डिस्चार्ज अर्जी खारिज की, ऑडियो रिकॉर्डिंग बनी अहम सबूत - Panchkula News
पंचकूला में स्थित सीबीआई की विशेष कोर्ट ने CGST रोहतक के सुपरिटेंडेंट रोहित शर्मा को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने 35 लाख रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में आरोपी अफसर की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी है। विशेष सीबीआई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी के खिल
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शिकायतकर्ता नरेश कुमार ने आरोप लगाया था कि CGST विभाग ने करीब 100 करोड़ रुपए के बड़े जीएसटी फर्जीवाड़े में उनके दोस्त गौरव कुमार को गिरफ्तार किया था। आरोपी सुपरिटेंडेंट रोहित शर्मा ने गौरव के छोटे भाइयों को इस केस में फंसाने की धमकी दी और उनका नाम निकालने के बदले 35 लाख रुपए की रिश्वत मांगी।
CBI की भनक लगते ही फेल हो गया था ट्रैप
शिकायत मिलने पर सीबीआई ने नरेश और रोहित शर्मा के बीच हुई फोन बातचीत को रिकॉर्ड किया। कॉल रिकॉर्डिंग के अनुसार, आरोपी अफसर 30 लाख रुपए में मामला सेट करने और 15-15 लाख की 2 किश्तों में रकम लेने पर सहमत हुआ था। हालांकि, रिश्वत के लेनदेन से पहले ही आरोपी को सीबीआई में शिकायत दर्ज होने की भनक लग गई, जिससे ट्रैप सफल नहीं हो सका।
अब जानिए कोर्ट में दोनों पक्ष और टिप्पणी…
- फेल ट्रैप का मामला, डिस्चार्ज किया जाए : आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि यह एक 'फेल ट्रैप' का मामला है। इसमें न तो रिश्वत का पैसा बरामद हुआ और न ही उसे स्वीकार किया गया। इसके अलावा, शिकायतकर्ता ने यह शिकायत गुस्से और तनाव में दर्ज कराई थी।
- सीबीआई बोलीं- ऑडियो रिकॉर्डिंग से पुष्टि : सीनियर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर जसविंदर कुमार भट्टी ने कहा कि कानून के मुताबिक रिश्वत का प्रयास करना भी अपराध की श्रेणी में आता है। ऑडियो रिकॉर्डिंग की सीएफएसएल (CFSL) रिपोर्ट में आरोपी की आवाज की पुष्टि हो चुकी है।
- कोर्ट की टिप्पणी: कोर्ट ने माना कि आरोप तय करने के शुरुआती चरण में केस का मिनी-ट्रायल नहीं किया जा सकता। फोन बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट और साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया (Prima Facie) गंभीर संदेह पैदा होता है।
सह-आरोपी डिप्टी कमिश्नर को नहीं मिली थी मंजूरी
इस मामले में CGST के तात्कालीन डिप्टी कमिश्नर सचिन अहलावत का नाम भी सामने आया था। हालांकि, सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी (Prosecution Sanction) देने से इनकार कर दिया था।
जिसके बाद उच्च न्यायालय से भी उन्हें राहत मिल चुकी है। वहीं, रोहित शर्मा के खिलाफ मुकदमा चलाने की कानूनी मंजूरी मिलने के बाद अब सीबीआई कोर्ट उन पर औपचारिक रूप से आरोप तय करेगी।