ऐसी सीट जहां 37 साल हर मौसम में खिला 'कमल': आगरा उत्तर विधानसभा में 1985 से कभी नहीं हारी BJP, विपक्षी साध रहे निशाना - Agra News
आगरा2 घंटे पहले
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10 चुनाव...10 जीत। 37 साल से भाजपा का कब्जा। आगरा उत्तर विधानसभा सीट पर हर तरह के सियासी मौसम में भाजपा का कमल खिलता रहा है। विरोधियों की हर रणनीति ढेर होती रही है। 1985 में भाजपा ने कांग्रेस से यह सीट सिर्फ 145 वोट से छीनी थी, लेकिन इसके बाद ऐसा कब्जा जमाया कि 2022 में जीत का अंतर 1.12 लाख वोट तक पहुंच गया। अब 2027 का चुनाव सामने है। गैर भाजपाई दलों ने इस सीट पर भाजपा को घेरने के लिए अभी से मंथन शुरू कर दिया है।
यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव की हलचल तेज हो गई हैं। बसपा ने तो आगरा जिले से लगी सादाबाद सीट पर अपना प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है। दूसरे दल और दावेदार भी जोड़तोड़ में जुट गए हैं। मुद्दों को हवा देने के साथ ही चुनाव जीतने के गुणा-भाग पर रणनीति बननी शुरू हो गई है। इस बार आगरा उत्तर विधानसभा सीट पर अभी से शुरू हो चुकीं हलचल पर सबकी नजरें टिकी हैं।
अब विस्तार से पढ़िये…
आगरा में 9 विधानसभा सीट हैं-एत्मादपुर, आगरा छावनी, आगरा दक्षिण, आगरा उत्तर, आगरा ग्रामीण, फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़, फतेहाबाद और बाह। पिछले दो चुनावों (2022 और 2017) में इन सभी सीटों पर भाजपा ने चुनाव जीता। यानि पहले मोदी और फिर मोदी-योगी लहर में भाजपा ने जिले की 9 सीटों पर क्लीन स्वीप किया।

पुरुषोत्तम खंडेलवाल, भाजपा विधायक
मगर, इन 9 सीटों में सिर्फ आगरा उत्तर विधानसभा सीट ऐसी है, जिस पर भाजपा ने लगातार 10 चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। पहली बार 1985 के चुनाव में यह सीट भाजपा के कब्जे में आई, तब से लगातार इस सीट पर कमल ही खिल रहा है। भाजपा ने यह सीट कांग्रेस से छीनी थी। 1985 के चुनाव से पहले इस सीट पर लगातार 4 बार कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीत का झंडा फहराया था। हालांकि 1967 में जब यह सीट वजूद में आई, तब इस पर बीजेएस ने चुनाव जीता था। मगर, जीत का स्वाद चखने का बीजेएस का यह पहला और आखिरी मौका था।


2022 के विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे थे बसपा प्रत्याशी शब्बीर अब्बास। वर्तमान में ये सपा के महानगर अध्यक्ष हैं।
इन चुनावों में कांग्रेस ने जीती यह सीट
| वर्ष | कांग्रेस के जीते प्रत्याशी |
| 1980 | ओम प्रकाश जिंदल |
| 1977 | सुरेंद्र कुमार कालरा |
| 1974 | प्रकाश नारायण गुप्ता |
| 1969 | प्रकाश नारायण गुप्ता |
ऐसा नहीं है कि भाजपा के इस किले को ढहाने के लिए विरोधियों ने मशक्कत नहीं की। कांग्रेस के बाद बसपा ने जोर तो खूब लगाया लेकिन 41 सालों से इस सीट पर जमीं भाजपा की जड़ें तक नहीं हिला पाए। इस सीट के वजूद में आने के बाद से अब तक 322 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। इनमें सबसे अधिक प्रत्याशी 1993 के चुनाव में उतरे।

आगरा उत्तर सीट पर भाजपा का झंडा रहा है बुलंद।
जानिये उत्तर सीट पर किस चुनाव में कितने प्रत्याशियों ने आजमाई किस्मत…
| वर्ष | चुनाव में उतरे प्रत्याशी |
| 2022 | 13 |
| 2017 | 15 |
| 2012 | 21 |
| 2007 | 19 |
| 2002 | 16 |
| 1996 | 7 |
| 1993 | 47 |
| 1991 | 45 |
| 1989 | 33 |
| 1985 | 27 |
| 1980 | 15 |
| 1977 | 17 |
| 1974 | 18 |
| 1969 | 17 |
| 1967 | 12 |
145 वोट से हुई हार-जीत
आगरा उत्तर सीट पर 15 बार विधानसभा का चुनाव हो चुका है। इसमें अब तक की सबसे बड़ी जीत 2022 में भाजपा प्रत्याशी पुरुषोत्तम खंडेलवाल की रही। वहीं, सबसे कम अंतर वर्ष 1985 के चुनाव में रहा था। तब भाजपा के सत्य प्रकाश विकल ने कांग्रेस प्रत्याशी सतीश चंद्र को सिर्फ 145 वोट से हराया था।

लहर आने से पहले से ही भाजपा के कब्जे में है ये सीट
आगरा की 9 विधानसभा सीटों में से आगरा उत्तर विधानसभा सीट ऐसी सीट है, जिस पर वह भाजपा की लहर आने से ही काबिज है। राम मंदिर आंदोलन के समय हुआ 1991 का विधानसभा चुनाव हो या फिर 1993 का चुनाव, भाजपा इसी सीट पर इससे पहले ही कब्जा कर चुकी थी।

अब तक वैश्य प्रत्याशी ही चुनाव जीते
वरिष्ठ पत्रकार राजीव दीक्षित का मानना है, उत्तर विधानसभा सीट पर जातिय समीकरण भाजपा के फेवर में हैं। यह सीट वैश्य वोट बैंक बाहुल्य कहलाती है, जोकि भाजपा का कोर वोट बैंक माना जाता है। इसके बाद सर्वण भी इस सीट पर अच्छी-खासी संख्या में है। यही वजह है कि इस सीट पर वैश्य समाज का प्रत्याशी ही अब तक चुनाव जीतता आया है, चाहे वह किसी भी दल का रहा है।

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