फोन-लैपटॉप की जांच न होने से अटके 3818 केस: स्टेट साइबर विंग की लैब में 2015 से अब तक 8,369 केस में 14,946 डिवाइस आए, - Bhopal News

भोपाल54 मिनट पहलेलेखक: विशाल त्रिपाठी

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अब नई स्टेट साइबर फॉरेंसिक लैब के साथ रीजनल यूनिट्स बनाने की तैयारी, 4,551 मामलों में ही जांच पूरी हुई

भिंड जिले में 2022 में हुई एक महिला के साथ ज्यादती के आरोपी को अब तक सजा नहीं मिल सकी है। आरोपी ने नहाते वक्त उसका वीडियो बना लिया ​था। पुलिस ने मोबाइल जब्त भी किया लेकिन, चार साल बाद भी फॉरेंसिक लैब इसकी जांच ही नहीं कर पाई। रिपोर्ट न मिलने से चालान और ट्रायल अटका हुआ है।

यह अकेला मामला नहीं है। वर्ष 2015 से अब तक स्टेट साइबर विंग की लैब में साइबर फॉरेंसिक जांच के लिए 8,369 मामलों में 14,946 डिजिटल डिवाइस आए। इनमें से 3,818 केस अब भी लंबित हैं। इसे देखते हुए राज्य साइबर पुलिस ने 87 करोड़ रुपए की लागत से स्टेट साइबर फॉरेंसिक लैब और रीजनल यूनिट्स बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। इसके लिए 532 पद मांगे हैं।

असर... ड्रग और मोबाइल लूट के अंतरराज्यीय गिरोहों के बारे में भी नहीं मिल रहा सुराग

केस - 1 दो टुकड़े कर नृशंस हत्या, मोबाइल की रिपोर्ट पेंडिंग साल 2022... जूनी इंदौर क्षेत्र में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था। शव का कमर से नीचे का हिस्सा कटा हुआ था। हत्या और साक्ष्य मिटाने के इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने आरोपी से दो मोबाइल फोन जब्त किए थे। इन मोबाइल में वारदात से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य मिलने की संभावना थी। लेकिन अब तक इनकी फॉरेंसिक जांच नहीं हो सकी। इसके चलते मोबाइल में मौजूद कत्ल से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों को प्रमाणित नहीं किया जा पा रहा है।

केस - 2 अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट की जांच मोबाइल में बंद साल 2021... कोलार रोड पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर एक ट्रक चालक को 79 किग्रा गांजे के साथ पकड़ा था। एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज इस मामले में पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त किया था। इसके जरिए गांजे के सप्लायर, उससे जुड़े लोगों और पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क का पता लगाया जाना था। मोबाइल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया, लेकिन अब तक उसकी रिपोर्ट नहीं आई। इससे ड्रग नेटवर्क से जुड़े अहम डिजिटल सुराग सामने नहीं आ सके हैं।

केस - 3 नेपाल तक भेजे जा रहे चोरी किए गए मोबाइल फोन साल 2023... चोरी, लूट और डकैती के मोबाइल फोन नेपाल और अन्य राज्यों में खपाने वाले एक संगठित गिरोह को इंदौर क्राइम ब्रांच ने पकड़ा था। कार्रवाई के दौरान आरोपियों से 11 मोबाइल फोन और दो लैपटॉप जब्त किए गए थे। इनसे गिरोह के नेटवर्क, संपर्कों और लेन-देन से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिलने थे। फॉरेंसिक लैब से समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने से इन डिवाइस के डिजिटल डेटा को प्रमाणित कर कोर्ट में पेश नहीं किया जा पा रहा है।

ये तैयारी: स्टेट लैब, थाने और हेल्पलाइन हर जिले में डेडिकेटेड साइबर थाने

लागत: 271 करोड़ रुपए {दायरा: हर जिले में 1 साइबर थाना और हर सामान्य थाने में 1 साइबर हेल्प डेस्क बनेगी। मकसद: पीड़ितों को थाने स्तर पर फौरन तकनीकी मदद मिलेगी और जिले में ही एफआईआर दर्ज हो सकेगी।

लागत: 87 करोड़ रुपए {दायरा: भोपाल में मुख्य स्टेट लैब और संभागों में रीजनल फॉरेंसिक यूनिट्स तैयार होंगी। मकसद: वर्षों से अटके 3,818 मामलों के डिजिटल साक्ष्यों की जांच तेज होगी, जिससे ट्रायल नहीं लटकेगा।

1930 हेल्पलाइन कॉल सेंटर लागत: 52 करोड़ रुपए दायरा: 65 सीटों वाला अत्याधुनिक कॉल सेंटर बनेगा, जिसमें 115 कर्मी तैनात होंगे। मकसद: ठगी होते ही गोल्डन ऑवर में पीड़ितों का पैसा खातों और वॉलेट्स में फ्रीज करवाया जा सकेगा।

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