नेपाल के सैलाब में सब जलमग्न, मलबा उगल रहा लाशें; 392 की मौत, 1500 लोग लापता; टला नहीं है खतरा

Aug 28, 2026 11:26 am ISTभाषा, काठमांडू

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सीमा के दोनों तरफ लापता लोगों की कुल संख्या 1,468 रख पहुंच गई है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि 290 भारतीय नागरिकों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। भारत ने भी अपने नागरिकों का पता लगाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

Nepal floods

नेपाल के सैलाब में सब जलमग्न

नेपाल और तिब्बत में अचानक आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। गुरुवार को मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 392 हो गया। अब भी 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। सैलाब के बाद के दृश्य अच्छे नहीं हैं। मलबे से लोगों के शव क्षत विक्षत हालत में बरामद हो रहे हैं। वहीं संत बीतने के साथ ही लापता लोगों के मिलने की उम्मीद भी कम होती जा रही है। फिलहाल बचावकर्मी 290 भारतीय नागरिकों समेत लापता सैकड़ों लोगों का पता लगाने के लिए युद्धस्तर पर जुटे हुए हैं।

नेपाल पुलिस ने एक बयान में कहा है कि प्रभावित इलाकों से अब तक 50 विदेशियों समेत 796 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिये बचाया गया है, जबकि अन्य 796 लोगों को सड़क मार्ग से सुरक्षित निकाला गया है। हालांकि, बयान में विदेशी नागरिकों की राष्ट्रीयता का उल्लेख नहीं किया गया। वहीं यह भी बताया गया कि बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 389 हो गई है।

आया था जलजला

गौरतलब है कि बीते बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के टूटने से चट्टानें खिसक गई और बहुत बड़े पैमाने पर हिमस्खलन हुआ, जिसके कारण पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव मध्य नेपाल की ओर आया। इससे कई कस्बे और गांव तबाह हो गए, मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए और दर्जनों जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा।

अब भी बाढ़ का खतरा

भोटे कोशी नदी प्रणाली के उद्गम के पास एक नई अवरोध झील बनने के बाद निचले इलाकों में फिर बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर यह प्राकृतिक अवरोधक टूटता है तो नदी और उसके निचले इलाकों में पानी का तेज बहाव एक और बार आ सकता है। चीनी अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, गुरुवार सुबह तक नई अवरोधक झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और शुक्रवार को इसमें करीब 30 लाख घन मीटर और पानी आने की आशंका है। इससे प्राकृतिक अवरोध के टूटने को लेकर चिंता बढ़ गई है।

यह झील छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी है। ये नदियां तिब्बत से निकलती हैं और नेपाल में भोटे कोशी नदी तंत्र का हिस्सा बनती हैं। नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि उसे चीनी प्राधिकारियों से इस झील के बारे में जानकारी मिली है और भोटे कोशी एवं त्रिशूली नदी क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। विभाग ने लोगों से नदी किनारों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। यात्रियों, सुरक्षा कर्मियों और तलाश और बचाव दलों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

चीनी अधिकारी झील की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और संभावित बाढ़ का आकलन और जोखिम विश्लेषण कर रहे हैं। संचार और खोज उपकरणों से लैस चीन का एक बचाव दल ग्यिरोंग पहुंच गया है, ताकि नदी के ऊपरी हिस्से में बने अवरोध का आकलन किया जा सके। अधिकारियों को आशंका है कि इस अवरोध के कारण दूसरी आपदा आ सकती है और जारी बचाव अभियान और मुश्किल हो सकता है।

अपनों की तलाश जारी

नेपाल के अधिकारियों ने 910 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। बचावकर्मी कीचड़ और मलबे से भरे नदी क्षेत्रों में उनकी तलाश कर रहे हैं और अपने परिजनों का पता लगाने के लिए बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। वहीं अधिकारियों ने बताया कि तिब्बत में भी 558 लोग लापता हैं। इस तरह सीमा के दोनों ओर लापता लोगों की कुल संख्या 1,468 है। आपदा के बाद भारत ने भी अपने नागरिकों का पता लगाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 290 भारतीय नागरिकों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। मंत्रालय ने कहा कि उनका पता लगाने और उन्हें बचाने के लिए 'तत्काल प्रयास' किए जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि अब तक 84 भारतीय नागरिकों को बचाया गया है। इनमें निर्माणाधीन त्रिशूली-एक नदी प्रवाह आधारित जलविद्युत परियोजना में कार्यरत 63 श्रमिक और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार, तिब्बत की ओर मौजूद करीब 200 भारतीय नागरिकों ने वहां से सुरक्षित निकाले जाने के लिए सहायता मांगी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूतों के साथ डिजिटल माध्यम से एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में मौजूद भारतीयों की स्थिति और उनकी कुशलक्षेम का पता लगाने के लिए तत्काल प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय नेपाल के अधिकारियों, अन्य मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और संबंधित प्राधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है।

भारत ने नेपाल के लिए राहत सहायता भी बढ़ा दी है। बुधवार को 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) सामग्री भेजने के बाद बृहस्पतिवार को एक सैन्य परिवहन विमान से 37.5 टन और एचएडीआर सामग्री, दवाएं एवं खाद्य सामग्री भेजी गई। इस तरह अब तक कुल 47.5 टन सहायता भेजी जा चुकी है।

नेपाल में सब जलमग्न

नेपाल में सैलाब के बाद सब जलमग्न हो गया है। नेपाल के सड़क विभाग ने बताया है कि नुवाकोट के बेत्रावती से रसुवागढ़ी के बीच 42 किलोमीटर लंबी पूरी सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई है और कई कंक्रीट के पुल बह गए हैं। वहीं नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि बाढ़ से 35 सड़क पुल, 45 'सस्पेंशन' पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिससे प्रभावित जिलों में आवागमन बुरी तरह बाधित हुआ है। त्रिशूली और देवीघाट जलविद्युत परियोजनाओं के साथ-साथ बिजली से जुड़े अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।

धादिंग में गलछी-बैरेनी सड़क को फिर से खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। रसुवा में अचानक आई बाढ़ के बाद यह सड़क बंद हो गई थी। यह मार्ग काठमांडू और नेपाल के अन्य हिस्सों के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है और क्षेत्रीय नाकेबंदी और आपदा राहत अभियानों के दौरान भारी और हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए भी अहम है। व्यापक तबाही के कारण बचाव अभियान बेहद मुश्किल हो गया है। सुरक्षाकर्मी और स्थानीय अधिकारी भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में बहकर आए लोगों की तलाश में नदी किनारों और निचले इलाकों को खंगाल रहे हैं और लगातार शव बरामद हो रहे हैं।