रायपुर समेत 4 शहरों में ई-बसों का इंतजार...: छत्तीसगढ़ में फाइलें घूम रहीं, एमपी में दौड़ रहीं हैं ई-बसें - Raipur News

बिलासपुर/रायपुर35 मिनट पहले

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प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना में छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा को 240 इलेक्ट्रिक बसों की मंजूरी मिले एक साल से अधिक का समय बीत चुका है। इसके बावजूद, अब तक किसी भी शहर में इनका संचालन शुरू नहीं हो सका है। इसके उलट, पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के इंदौर समेत कई शहरों में ई-बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं।

मध्य प्रदेश में जहां ई-बसों से डीजल पर निर्भरता कम हुई है, वहीं छत्तीसगढ़ के लोग आज भी खटारा पुरानी सिटी बसों या निजी वाहनों के भरोसे हैं। सबसे ज्यादा जरूरत राजधानी रायपुर और बिलासपुर को है, जहां लंबे समय से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमराई हुई है।

दावे और हकीकत: राज्य सरकार का कहना है कि प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हाल ही में कैबिनेट ने बसों के संचालन के लिए आवश्यक पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म को मंजूरी दी है। इसके बाद ऑपरेटर बसों की आपूर्ति, चार्जिंग स्टेशन और डिपो का काम पूरा करेंगे। हालांकि, पहले दिसंबर 2025 तक बसें शुरू करने का दावा किया गया था, जो अब तक हवा में है।

रायपुर में डिपो, चार्जिंग स्टेशन और बिजली लाइन का काम ही नहीं हुआ रायपुर में 100 पीएम ई-बसें चलाने के लिए मार्च 2024 में स्वीकृति मिली थी। अब तक बसें नहीं आ पाईं। हालांकि इसका प्रमुख कारण इन्फ्रास्ट्रक्चर को बताया जा रहा है। ई-बसों के संचालन के लिए जरवाय में 2 हेक्टेयर भूमि पर डिपो और चार्जिंग स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन अब तक 20% काम ही हो सका है।

378 में से 272 सिटी बसें हो चुकीं कबाड़ कोरोना काल से पहले प्रदेश के नौ शहरों में 378 सिटी बसें संचालित थीं। लंबे समय तक संचालन बंद रहने से 272 बसें कबाड़ हो गईं। अब केवल 106 बसें बची हैं, जिनमें से रोजाना 70 से 80 बसें ही सड़कों पर उतरती हैं। दुर्ग-भिलाई और जगदलपुर में फिलहाल एक भी सिटी बस संचालित नहीं हो रही है।

इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण राज्य सरकार करा रही है। 3 माह में पूरा कराने को कहा गया है। बसें स्वीकृत हो चुकी है, ​दिसंबर तक ई-बसें आएंगी। - ताेखन साहू, केंद्रीय राज्य मंत्री

ई-बस को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र को गारंटी दे दी है। बिलासपुर के कोनी डिपो में 14 चार्जिंग पाइंट बनकर तैयार है। केंद्र से जब भी बसें आएंगी, संचालन करेंगे। -अनुपम तिवारी, नोडल अधिकारी, ई-बस सेवा

तीन वजहों से अटकी ई-बस सेवा

  • अनुबंध में देरी: बस आवंटन के बाद ऑपरेटरों के साथ कंसेशन एग्रीमेंट और अन्य औपचारिकताएं समय पर पूरी नहीं की जा सकीं।
  • अधूरा इंफ्रास्ट्रक्चर: ज्यादातर शहरों में चार्जिंग स्टेशन, डिपो और बिजली विभाग से जुड़ी तैयारियां अब तक अधूरी हैं।
  • देर से मिली मंजूरियां: राज्य सरकार ने जून 2026 में पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म और डायरेक्ट डेबिट मैंडेट को मंजूरी दी, जिससे फाइलें आगे बढ़ने में देरी हुई।

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