गजकेसरी योग: 4 अक्तूबर को गुरु-चंद्र की युति, इन राशियों के लिए बन सकते हैं तरक्की के योग

Thu, 24 Sep 2026 12:30 PM IST

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 24 Sep 2026 12:30 PM IST

सार

Gajakesari Yog 2026: अक्तूबर की शुरुआत में गुरु और चंद्रमा की युति से गजकेसरी योग बनने जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस योग का असर कुछ राशियों के करियर, धन और कारोबार से जुड़े मामलों पर देखने को मिल सकता है।

Gajakesari Yog 2026: अक्तूबर की शुरुआत में ग्रहों की चाल में एक खास बदलाव देखने को मिलेगा। 4 अक्तूबर 2026 को चंद्रमा कर्क राशि में पहुंचेंगे। इस राशि में गुरु बृहस्पति पहले से मौजूद हैं। ऐसे में कर्क राशि में गुरु और चंद्रमा का साथ आना ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण संयोग माना जाता है। इसी स्थिति को गजकेसरी योग के नाम से जाना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में गुरु को ज्ञान, समृद्धि, विस्तार और सम्मान से संबंधित ग्रह माना गया है, जबकि चंद्रमा मन, भावनाओं और सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए इन दोनों ग्रहों की युति को कई क्षेत्रों के लिए शुभ संकेत के तौर पर देखा जाता है। खास बात यह है कि गुरु इस समय कर्क राशि में स्थित हैं, जिसे उनकी उच्च राशि माना जाता है।

Gajakesari Rajyog on October 4 Guru-Chandra Yuti Brings New Opportunities for These Zodiac Signs

चंद्र-गुरु की युति - फोटो : Amar Ujala

4 से 6 अक्तूबर तक रहेगा गुरु-चंद्र का संयोग
पंचांग गणना के अनुसार चंद्रमा 4 अक्तूबर की शाम करीब 6 बजकर 31 मिनट पर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। यहां गुरु के साथ उनकी युति बनेगी। यह स्थिति 6 अक्तूबर की रात करीब 10 बजकर 17 मिनट तक रहने की बात कही गई है। इसके बाद चंद्रमा राशि परिवर्तन कर सिंह में चले जाएंगे। चंद्रमा की गति तेज होने के कारण ऐसे योग लंबे समय तक नहीं रहते। यही वजह है कि इस अवधि को ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। हालांकि अलग-अलग पंचांगों में ग्रहों के राशि परिवर्तन के समय में कुछ अंतर हो सकता है।

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क्या होता है गजकेसरी योग? - फोटो : adobe stock

क्या होता है गजकेसरी योग?

वैदिक ज्योतिष में गुरु और चंद्रमा की विशेष स्थिति से बनने वाले योग को गजकेसरी योग कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार गुरु ज्ञान, धन और विस्तार से जुड़े हैं, जबकि चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक माना जाता है। दोनों ग्रहों का शुभ संबंध बनने पर व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, आर्थिक स्थिति, करियर और प्रतिष्ठा से जुड़े सकारात्मक बदलावों की संभावना मानी जाती है। हालांकि किसी व्यक्ति की कुंडली में इस योग का वास्तविक प्रभाव उसकी चंद्र राशि, लग्न, ग्रहों की स्थिति और दशा-अंतर्दशा समेत कई कारकों पर निर्भर माना जाता है।

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कारोबारियों के लिए पुराने संपर्क उपयोगी साबित हो सकते हैं। - फोटो : amar ujala

तुला राशि
तुला राशि वालों के लिए यह संयोग कामकाज से जुड़े मामलों में नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। नौकरी करने वालों को किसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का मौका मिल सकता है। यदि लंबे समय से किसी प्रोजेक्ट या काम में रुकावट आ रही है तो उसमें आगे बढ़ने की स्थिति बन सकती है। कारोबारियों के लिए पुराने संपर्क उपयोगी साबित हो सकते हैं। किसी पुराने ग्राहक या व्यावसायिक संबंध के जरिए फायदा मिलने की संभावना बन सकती है। पैसों से जुड़े मामलों में अवसर तो मिल सकते हैं, लेकिन निवेश करते समय जल्दबाजी से बचना बेहतर रहेगा।

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आमदनी के नए विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। - फोटो : amar ujala

मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए गुरु-चंद्र की यह स्थिति साझेदारी और पेशेवर जीवन से जुड़े मामलों को प्रभावित कर सकती है। नौकरी में आपकी जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और काम में किए गए प्रयासों को पहचान मिल सकती है। व्यापार से जुड़े लोगों के सामने नया काम, प्रोजेक्ट या सौदा आ सकता है। यदि किसी योजना पर पहले से काम चल रहा है तो उसे आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। आमदनी के नए विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। निजी जीवन की बात करें तो जीवनसाथी के साथ तालमेल बेहतर होने की संभावना है। किसी महत्वपूर्ण फैसले में पार्टनर का सहयोग मिल सकता है।