एक पैर के सहारे 400 मीटर स्कूल जाती थी 7 साल की रागिनी, अब मदद को आगे आई AAP

मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी हों, अगर हौसला मजबूत हो तो मंजिल तक पहुंचने की राह निकल ही आती है. उत्तर प्रदेश के बलिया की सात वर्षीय रागिनी की कहानी इसकी मिसाल है.

मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी हों, अगर हौसला मजबूत हो तो मंजिल तक पहुंचने की राह निकल ही आती है. उत्तर प्रदेश के बलिया की सात वर्षीय रागिनी की कहानी इसकी मिसाल है.

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मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी हों, अगर हौसला मजबूत हो तो मंजिल तक पहुंचने की राह निकल ही आती है. उत्तर प्रदेश के बलिया की सात वर्षीय रागिनी की कहानी इसकी मिसाल है. छह महीने की उम्र में एक हादसे में अपना एक पैर गंवाने के बावजूद रागिनी ने पढ़ाई का सपना नहीं छोड़ा. वह रोजाना एक पैर के सहारे करीब 400 मीटर दूर स्कूल तक पहुंचने की कोशिश करती थी. अब उसकी इस संघर्ष भरी राह को आसान बनाने के लिए मदद के हाथ आगे आए हैं.

AAP कार्यकर्ताओं ने घर पहुंचकर की मदद

आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह के निर्देश पर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को रागिनी के घर पहुंचकर उसकी मदद की. प्रदेश प्रवक्ता सर्वेश मिश्रा, बलिया जिलाध्यक्ष प्रदीप यादव और महासचिव अंजनी तिवारी ने रागिनी को व्हीलचेयर, बैसाखी, कॉपी-किताब और कलम उपलब्ध कराई. इसके साथ परिवार को 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी दी गई.

इससे पहले रागिनी की स्थिति सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन की ओर से भी सहायता पहुंचाई गई है. जिलाधिकारी ने उसके घर जाकर मुलाकात की और ट्राईसाइकिल समेत पढ़ाई से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराई.

छह महीने की उम्र में हादसे ने बदल दी जिंदगी

रागिनी बलिया के मनियर ब्लॉक की दिघेड़ा ग्रामसभा के रानीपुर गांव की रहने वाली है. परिवार के मुताबिक, जब वह महज छह महीने की थी, तब एक हादसे में उसके पैर को गंभीर चोट लगी. तमाम कोशिशों के बावजूद उसका पैर सामान्य नहीं हो सका.

बचपन की इस मुश्किल के बावजूद रागिनी ने पढ़ाई से नाता नहीं तोड़ा. स्कूल उसके घर से करीब 400 मीटर की दूरी पर है, लेकिन यह दूरी उसके लिए आसान नहीं थी. कई बार उसे परिवार का सहारा लेना पड़ता था और कई बार वह खुद एक पैर के सहारे स्कूल जाने की कोशिश करती थी.

जल्द लगाया जाएगा कृत्रिम पैर

संजय सिंह ने कहा है कि रागिनी की शारीरिक परेशानी उसकी पढ़ाई के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए. पार्टी की ओर से अब उसके लिए कृत्रिम पैर लगवाने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए उसे कानपुर स्थित एलिम्को ले जाने की बात कही गई है.

उम्मीद है कि कृत्रिम पैर मिलने के बाद रागिनी के लिए स्कूल आने-जाने और रोजमर्रा के काम करना पहले से आसान होगा.

वीडियो कॉल पर संजय सिंह ने बढ़ाया हौसला

संजय सिंह ने रागिनी और उसके परिवार से फोन तथा वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की. उन्होंने बच्ची का हाल जाना और उसे खूब पढ़ने तथा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. उनका कहना है कि संसाधनों की कमी से जूझ रहे बच्चों की मदद समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है.

रागिनी की हिम्मत बनी मिसाल

रागिनी की कहानी सिर्फ मदद पाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उसके जज्बे और पढ़ाई के प्रति लगन की कहानी भी है. एक पैर के सहारे स्कूल तक पहुंचने की उसकी कोशिश ने लोगों का ध्यान खींचा. अब प्रशासन और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मदद से उसके सामने आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल रहे हैं.

रागिनी के परिवार ने मदद के लिए सभी का आभार जताया है. आने वाले दिनों में कृत्रिम पैर लगने के बाद उसकी पढ़ाई और जिंदगी को नई गति मिलने की उम्मीद है.

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