तुकाराम मुंढे के कारण बढ़े दूध के दाम! खोवा ₹400 किलो तो पनीर ने भी छुआ आसमान, महंगाई के पीछे FDA जिम्मेदार| Navbharat Live

Updated On: Jul 19, 2026 | 03:01 PM IST

विज्ञापन

सार

FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे की कार्रवाई से मिलावटखोरों पर कसा शिकंजा। बाजार में शुद्ध दूध, खोवा और पनीर की कमी से दाम आसमान पर, जनता पर बढ़ा महंगाई का बोझ।

tukaram mundhe fda action milk khoya paneer price hike maharashtra

दूध के दाम बढ़ने की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)

विस्तार

Tukaram Mundhe FDA Action: महाराष्ट्र में सख्त और ईमानदार अधिकारी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले तुकाराम मुंढे जब से अन्न व औषधि प्रशासन के आयुक्त बने हैं, तब से मिलावटखोरों की नींद उड़ी हुई है। उनके नेतृत्व में राज्यभर में शुरू हुई विशेष जांच मुहिम का असर अब सीधा बाजार की कीमतों पर दिखने लगा है। जहां एक तरफ जनता को शुद्ध दूध मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर इन उत्पादों के आसमान छूते दामों ने आम आदमी की जेब ढीली कर दी है।

महाराष्ट्र के नांदेड सहित कई जिलों में एफडीए की टीम ने मिलावटी दूध, खोवा और पनीर बनाने वालों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुंढे के निर्देशों पर हुई हालिया कार्रवाई में ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है जो दूध में शैम्पू, डिटर्जेंट, यूरिया और पाम ऑयल जैसे घातक रसायनों का इस्तेमाल कर रहे थे। इस मामले में 13 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रसायनों का सेवन लंबे समय तक करने से स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है, इसलिए इस सफाई अभियान की तारीफ हर कोई कर रहा है।

बाजार में मची खलबली: 90 रुपये पहुंचा दूध

तुकाराम मुंढे इफेक्ट का दूसरा पहलू काफी चिंताजनक है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मिलावटी और घटिया सामग्री बनाने वाली इकाइयों पर ताला लगने के कारण बाजार में शुद्ध दूध और दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति कम हो गई है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।

सम्बंधित ख़बरें

  • शुद्ध दूध: प्रति लीटर करीब 90 रुपये तक पहुंच गया है।
  • खोवा: इसका दाम 400 रुपये प्रति किलो हो गया है।
  • पनीर: अब 480 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है।
  • चिंता का विषय: शुद्धता के साथ महंगाई का बोझ

हालांकि यह सच है कि मिलावटखोरी रुकने से नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पदार्थ मिल रहे हैं, लेकिन क्या एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए 90 रुपये लीटर दूध खरीदना संभव है? विक्रेताओं का कहना है कि मिलावटी सामान सस्ते में उपलब्ध होता था, लेकिन अब शुद्ध माल की कमी और बढ़ते उत्पादन खर्च के कारण कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन गया है।

यह भी पढ़ें: Mumbai Rain: अलर्ट के तीन दिन! मुंबई में फिर लौटेगी आफत की बारिश, हवामान विभाग ने जारी की चेतावनी

संतुलन की जरूरत

अन्न व औषधि प्रशासन की इस कार्रवाई ने निस्संदेह समाज के स्वास्थ्य की रक्षा की है, जिसके लिए प्रशासन की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। लेकिन प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि शुद्धता केवल अमीरों की जागीर न बन जाए। अगर दूध और पनीर जैसी बुनियादी चीजों के दाम इसी तरह बढ़ते रहे, तो आम जनता के पोषण पर बुरा असर पड़ सकता है। सरकार को चाहिए कि मिलावटखोरों पर नकेल कसने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन लागत को नियंत्रित करने के उपाय भी करे, ताकि शुद्धता और सुलभता के बीच एक संतुलन बना रहे।

Follow Navbharatlive whatsapp