भागलपुर में 4000 करोड़ की ग्रीनफील्ड फोरलेन में फिर बड़ी दरार, उद्घाटन से पहले तीसरी बार गुणवत्ता पर सवाल

भागलपुर में 4000 करोड़ की ग्रीनफील्ड फोरलेन में फिर बड़ी दरार, उद्घाटन से पहले तीसरी बार गुणवत्ता पर सवाल

भागलपुर में 4000 करोड़ की ग्रीनफील्ड फोरलेन में फिर बड़ी दरार

भागलपुर में 4000 करोड़ रुपये की लागत से बन रही मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन सड़क की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं. अकबरनगर-शाहकुंड के गंगापुर के पास निर्माणाधीन फोरलेन पर करीब 50 मीटर लंबी और लगभग 2 इंच गहरी दरार दिखाई दी है. स्थानीय लोगों का दावा है कि इस सड़क पर यह तीसरी बार बड़ी दरार सामने आई है. बार-बार सामने आ रही इन समस्याओं को लेकर निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

मुंगेर से मिर्जाचौकी तक बन रहा यह ग्रीनफील्ड हाईवे चार पैकेज में तैयार किया जा रहा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क पर संरचनात्मक समस्या की शिकायतें मुख्य रूप से पैकेज-2 में ही सामने आती रही हैं. अधिकारियों की ओर से पहले भी इन समस्याओं की एक वजह बाढ़ और पानी के दबाव को बताया गया है.

ताजा मामला गंगापुर के पास सामने आया है, जहां सड़क की सतह पर लंबी दरार दिखाई दी. इसके साथ ही सड़क के किनारे मिट्टी धंसने की स्थिति भी राहगीरों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है.

दरार पर जूट के बोरे डालने का आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी के कर्मचारियों ने सड़क पर आई दरार को छिपाने के लिए उसके ऊपर जूट के बोरे डाल दिए. उनका कहना है कि इस तरीके से समस्या को आम लोगों और संबंधित अधिकारियों की नजर से दूर रखने की कोशिश की गई.

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब मुंगेर से भागलपुर तक फोरलेन के दो लेन को हाल ही में यातायात के लिए खोला गया है. ऐसे में सड़क पर दरार और किनारे की मिट्टी धंसने से वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है.

पहले भी क्षतिग्रस्त हो चुका है सड़क का हिस्सा

इस रूट पर सड़क की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं. खड़िया और कंजिया गांव के पास सड़क में दरार और अन्य तकनीकी समस्याएं सामने आई थीं. पिछले साल कंजिया गांव के पास सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद उसे काटकर दोबारा कंक्रीट की ढलाई की गई थी. हालांकि, बाद में बारिश के दौरान वह हिस्सा फिर क्षतिग्रस्त हो गया.

सितंबर 2024 में कंजिया गांव के सामने फोरलेन का ड्रेनेज भी धंस गया था. उस समय भी मिट्टी डालकर समस्या को भरने का आरोप लगा था. वहीं, एनएचएआई की ओर से इन समस्याओं के पीछे गंगा की बाढ़ और पानी के दबाव को प्रमुख वजह बताया जाता रहा है.

मामले को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है. उनका कहना है कि पूरे प्रोजेक्ट की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सड़क में बार-बार आ रही दरारों की वास्तविक वजह सामने आ सके.

एनएचएआई के टेक्निकल मैनेजर अभिनव कुमार ने कहा कि बारिश की वजह से इस तरह की समस्या हो सकती है. उन्होंने बताया कि नई दरार कब आई, इसकी फिलहाल आधिकारिक जानकारी नहीं है. हालांकि, मामले की पूरी जांच कराई जाएगी. यदि क्षतिग्रस्त हिस्सा गंभीर पाया जाता है तो पहले की तरह कंक्रीट को काटकर सड़क की दोबारा ढलाई कराई जाएगी.

शिवम

शिवम

घूमने का शौक, The-VOB , Daily hunt न्यूज़ में 3 साल से ज्यादा के काम का अनुभव.

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