दस साल बाद चीनी के दाम में बड़ा उछाल, 42 से 72 रुपए किलो पहुंची - Raisen News
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डेढ़ महीने में चीनी के दाम 42 रुपए किलो से बढ़कर 72 रुपए किलो तक पहुंच गए हैं। थोक बाजार में भाव 4200-4500 रुपए क्विंटल से बढ़कर 6800-6900 रुपए हो गए हैं। कई दुकानों पर चीनी 75 से 80 रुपए किलो तक बिक रही है। अचानक बढ़े दाम से घरों का बजट बिगड़ा है। मिठाई कारोबार की लागत बढ़ी है। चाय कारोबार की लागत बढ़ी है। कारोबारियों का कहना है कि 10 साल में पहली बार चीनी के भाव में इतनी तेज बढ़ोतरी दिखी है।
त्योहारी सीजन में असर ज्यादा दिखेगा। मिठाई कारोबारियों के मुताबिक चीनी महंगी होने से मिठाई की लागत बढ़ गई है। बाजार की स्थिति देखते हुए मिठाई के दाम 40 से 50 रुपए किलो तक बढ़ाने की तैयारी है। चाय विक्रेताओं का कहना है कि 10 रुपए में चाय बेचना मुश्किल हो रहा है। दाम नहीं घटे तो चाय की कीमत 15 रुपए करनी पड़ सकती है।
मिठाई व्यवसायी हनुमंत सिंह राजपुरोहित ने बताया कि चीनी के साथ ड्रायफ्रूट के दाम भी बढ़े हैं। मिठाइयों में चीनी की खपत अधिक होती है, इसलिए लागत में सीधा इजाफा हुआ है। बाजार की स्थिति को देखते हुए मिठाई के दाम 40 से 50 रुपए किलो तक बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। होटल संचालक सौरभ नेमा का कहना है कि लागत बढ़ने के कारण आने वाले दिनों में मिठाई महंगी करना मजबूरी होगी।
शहर में हर महीने 140 से 150 टन चीनी की खपत रायसेन शहर में रोजाना करीब 4 से 5 टन चीनी की खपत होती है। यानी महीने में 140 से 150 टन चीनी शहर में खप जाती है। पूरे जिले में यह आंकड़ा करीब 1000 से 1500 टन प्रतिमाह है। पहले जिले के लोग चीनी खरीदने पर हर महीने करीब 5 से 6 करोड़ रुपए खर्च करते थे। अब यही खर्च बढ़कर करीब 10 से 11 करोड़ रुपए पहुंचने का अनुमान है। यानी केवल चीनी खरीदने में ही लोगों की जेब पर करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
गृहिणी ज्योति धाकड़ ने बताया कि चीनी जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीज के दाम अचानक बढ़ने से घर का बजट प्रभावित हो रहा है। चीनी के साथ इससे बनने वाले खाद्य पदार्थ और मिठाइयां भी महंगी होंगी, जिसका असर त्योहारी खरीदारी पर भी पड़ेगा।
10 साल में गन्ने की कीमत 54% बढ़ी कारोबारियों के अनुसार चीनी के दाम बढ़ने के पीछे गन्ने की बढ़ती कीमत और एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के रस व शीरे के बढ़ते इस्तेमाल को प्रमुख कारण माना जा रहा है। केंद्र सरकार का गन्ने का एफआरपी 2016-17 में 230 रुपए प्रति क्विंटल था, जो 2025-26 में बढ़कर 355 रुपए हो गया। इस तरह 10 साल में गन्ने की कीमत 125 रुपए यानी करीब 54% बढ़ी है। दूसरी ओर एथेनॉल के लिए गन्ने और उससे बने उत्पादों की मांग बढ़ने से चीनी उत्पादन के लिए उपलब्धता प्रभावित होने की बात भी कारोबारी बता रहे हैं।