हरिद्वार में कांवड़ियों के डीजे ने किया कान में दर्द! 45 डेसिबल से बढ़कर 110 तक पहुंचा ध्वनि प्रदूषण

कांवड़ियों ने बढ़ाया ध्वनि प्रदूषणImage Credit source: PTI
Haridwar Kanwar Mela Noise Pollution: हरिद्वार में कांवड़ मेले के दौरान डीजे और वाहनों पर लगे बड़े साउंड सिस्टमों के कारण बहुत ध्वनि प्रदूषण हुआ. अंतर्राष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक और गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जंतु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दिनेश चंद्र भट्ट का कहना है कि कांवड़िये मेले के दौरान डाक कांवड़ के नाम पर जो डीजे आदि लेकर आते हैं, उनकी ऊंची आवाजें जबरदस्त ध्वनि प्रदूषण को फैलती हैं.
दिनेश चंद्र भट्ट ने कहा कि इससे मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है. साथ ही पशु-पक्षी की दिनचर्या भी प्रभावित होती है, जिस कारण कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार और ऋषिकेश तीर्थ नगरी में पक्षी नजर नहीं आते और यहां से दूर चले जाते हैं. उन्होंने कहा कि डीजे की कान-फाडू आवाजें हृदय रोगियों के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक है.
ध्वनि प्रदूषण 100 से 110 डेसिबल तक पहुंचा
प्रोफेसर भट्ट ने बताया कि हरिद्वार में कांवड़ मेले के दौरान डीजे और वाहनों पर लगे बड़े साउंड सिस्टमों के कारण ध्वनि प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों दिन में 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल की सीमा को पार कर 100 से 110 डेसिबल तक पहुंच गया था. कांवड़ यात्रा मार्गों और शिविरों में भारी बेस व लाउडस्पीकरों के कारण वास्तविक शोर का स्तर बेहद ऊंचा दर्ज किया गया. जो कान एवं हृदय की सेहत और नींद के लिए अत्यंत ही नुकसानदायक है.
प्रोफेसर भट्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश की सरकारों को सुझाव दिया है कि वह पूरी तरह से कांवड़ मेले के दौरान विशाल डीजे पर सख्ती के साथ पाबंदी लगाएं. वहीं लक्सर हरिद्वार मार्ग में स्थित मिस्सरपुर गांव की रहने वाली और आत्म सुरक्षा की राष्ट्रीय कोच आरती सैनी ने बताया कि कांवड़ियों ने गांव के खेतों में शौच आदि नित्य कर्म किया. उससे क्षेत्र में चारों ओर बदबू फैल गई, जिसने लोगों का रहना दुश्वार कर दिया और महामारी फैलने का डर लगा रहा.
कांवड़ मेले के दौरान पेड़ों पर नहीं दिखे पक्षी
आरती सैनी ने बताया कि कांवड़िये अपने साथ जो बड़े-बड़े कान-फाडू डीजे लेकर आए थे, उनकी ऊंची आवाजों ने लोगों को तो परेशान किया. साथ ही इतना जबरदस्त ध्वनि प्रदूषण किया कि घरेलू मवेशियों के अलावा खेतों में पेड़ों में बैठने वाले पक्षी भी प्रभावित हुए. डीजे के उच्च शोर से वह कांवड़ मेले के दौरान गांवों के खेतों में स्थित पेड़ों पर नजर नहीं आए.
200 से ज्यादा बड़े डीजे घुसने ही नहीं दिए गए
हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि इस बार प्रशासन ने 12 फुट से ऊंची कांवड़ और डीजे पर पाबंदी लगाई थी. 200 से ज्यादा बड़े डीजे हरिद्वार की सीमा में ही नहीं घुसने दिए गए. उनको वापस भेज दिया गया. हरिद्वार के टोल प्लाजा के पास जो बड़े-बड़े डीजे आपस में ऊंची आवाज करके प्रतियोगिता करते थे, उस पर भी पूरी पाबंदी लगाई गई.
ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि इस प्रतियोगिता के कारण कांवड़ियों में जबरदस्त झगड़ा होता था. इस बार बड़े डीजे की प्रतियोगिताओं में पाबंदी लगाने के कारण कांवड़ियों में झगड़ा नहीं हुआ.
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सुनील पांडे
पत्रकारिता के क्षेत्र में 41 वर्षों का अनुभव है. देश के विभिन्न राष्ट्रीय समाचार पत्रों में लेखन का कार्य कर चुके हैं.
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