पर्दे लगी बस में 47 KM तक दुष्कर्म, दिल्ली में फिर निर्भया जैसा कांड; सुरक्षा फेल
Aug 31, 2026 05:28 am ISTहिन्दुस्तान टीम, विशेष संवाददाता, नई दिल्ली

भारत की राजधानी दिल्ली एक बार फिर शर्मसार हुई है। यहां साल 2012 में निर्भया कांड की तरह एक और वारदात हुई है, जहां दरिदों ने नाबालिग के साथ ज्यादती की। अपराध का तरीका ठीक वैसा ही था। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

पीड़ित नाबालिग घर पर डांट से नाराज होकर निकली थी और बस का इंतजार कर रही थी।
राष्ट्रीय राजधानी में 14 साल पहले हुए निर्भया कांड की यादें फिर ताजा हो गईं। ग्रेटर नोएडा से कश्मीरी गेट के बीच चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा से चालक और कंडक्टर ने सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात चार अगस्त की है। कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर बस जब्त कर ली है।
पुलिस के अनुसार 16 वर्षीय पीड़िता परिवार सहित मैनपुरी जिले के एक गांव में रहती है। वह स्थानीय सरकारी इंटर कॉलेज में 11वीं की छात्रा है। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि तीन अगस्त को उसकी मां ने पढ़ाई नहीं करने पर डांटा था। इससे नाराज होकर वह अगले दिन चार अगस्त को बिना बताए घर से निकल गई। वह नोएडा सेक्टर-63 में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास आने के लिए बस में सवार हो गई। उन्होंने बताया कि नोएडा में भारी बारिश और अंधेरा होने से वह भूलवश परी चौक पर उतर गई।
खाली थी बस
पीड़िता ने बताया कि इसी दौरान एक अन्य बस आती दिखाई दी। पीड़िता ने बस रुकवाकर पूछा तो कंडक्टर ने बताया कि वे नोएडा सेक्टर-63 जा रहे हैं, इसके बाद पीड़िता बस में सवार हो गई। उसने बताया कि जब वह बस में सवार हुई तो कोई सवारी नहीं थी। बस चलने के कुछ समय बाद ही कंडक्टर ने छात्रा के साथ अश्लील हरकत शुरू कर दी।
पीड़िता ने बताया कि बस में कंडक्टर और ड्राइवर ने सामूहिक दुष्कर्म किया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। बस देर रात दिल्ली पहुंची और छात्रा को कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर उतार कर फरार हो गए।
पुलिस फुटेज के आधार पर आरोपियों तक पहुंची
बस से उतारे जाने के बाद पीड़िता कश्मीरी गेट पुलिस के पास पहुंची और पूरे मामले की जानकारी दी। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल कराया फिर बयान लिया। इसी के आधार पर सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण और मारपीट की धारा में प्राथमिकी दर्ज की। कोतवाली एसीपी शंकर बनर्जी की देखरेख में गठित टीम ने फुटेज के आधार पर चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप को तिमारपुर पार्किंग से पकड़ लिया।
पर्दे लगी बस 47 किलोमीटर तक दौड़ाते रहे दरिंदे, किसी ने नहीं देखा
चलती स्लीपर बस में 11वीं की छात्रा से दरिंदगी की वारदात ने यह साफ कर दिया है कि 2012 के निर्भया कांड के बाद सार्वजनिक और निजी यात्री बसों के लिए तय किए गए कड़े सुरक्षा मानक आज भी केवल कागजों तक सीमित हैं।
जिस स्लीपर बस में छात्रा से हैवानियत हुई, वह नियमों को ताक पर रखकर खिड़कियों पर पर्दे लटकाए 47 किलोमीटर तक दौड़ती रही, लेकिन रास्ते में न तो किसी पिकेट पर उसकी जांच हुई और न ही आपातकालीन सुरक्षा तंत्र काम आया।
वर्कशॉप से लौटते वक्त रची दरिंदगी की साजिश
सूत्रों के अनुसार, वारदात में इस्तेमाल स्लीपर बस में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसे ठीक कराने के लिए ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप उसे ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित एक वर्कशॉप ले गए थे। बस की मरम्मत के बाद दोनों खाली बस लेकर वापस उत्तरी दिल्ली की तिमारपुर पार्किंग लौट रहे थे।
इसी दौरान परी चौक पर अकेली खड़ी छात्रा ने बस को रुकने का इशारा किया। छात्रा को अकेला देख दोनों ने दुष्कर्म की साजिश रची और नोएडा सेक्टर-63 ले जाने का झांसा देकर उसे बस में बैठा लिया। वारदात को अंजाम देकर छात्रा को कश्मीरी गेट पर लावारिस छोड़कर दोनों आरोपी तिमारपुर पार्किंग पहुंचे और वहां बेखौफ आराम करने लगे, जहां से पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।
सड़कों से चेकिंग नदारद
परी चौक से लेकर कश्मीरी गेट बस अड्डे तक करीब 47 किलोमीटर के सफर के दौरान बस के भीतर खिड़कियों पर भारी पर्दे टंगे थे, जिससे बाहर से अंदर की कोई गतिविधि नहीं दिख सकती थी। इस पूरे रास्ते में बस को कहीं भी पुलिस चेकिंग का सामना नहीं करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि पूरा मार्ग एक्सप्रेसवे और रिंग रोड का हिस्सा है, जहां बैरिकेडिंग लगाने से भारी जाम की स्थिति बन जाती है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि नोएडा-दिल्ली बॉर्डर और प्रमुख चौराहों पर तैनात पुलिस बल ने संदिग्ध रूप से रात में दौड़ रही खाली बस पर नजर क्यों नहीं रखी।
जांच तेज
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने देर रात पीड़िता के परिजनों को दिल्ली बुलाया। इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों की देखरेख में पीड़िता की काउंसलिंग की गई और औपचारिकताएं पूरी कर उसे सुरक्षित परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों का पोटेंसी टेस्ट (पौरुषत्व परीक्षण) कराया है। साथ ही फोरेंसिक टीम ने बस से पीड़िता के बाल और अन्य जैविक साक्ष्य जुटाए हैं। पीड़िता के रक्त के नमूनों के साथ इन साक्ष्यों का डीएनए मिलान कराया जाएगा ताकि अदालत में पुख्ता साक्ष्य पेश किए जा सकें।
सुरक्षा नियम
चालक-परिचालक का सत्यापन, वाणिज्यिक बसों के चालक और परिचालक का पुलिस सत्यापन और उनकी यूनिफॉर्म पर नेमप्लेट अनिवार्य है। रात के समय निजी बसें बिना किसी आधिकारिक निगरानी या नियमित रूट लॉग के दौड़ रही हैं।
पर्दे व टिंटेड ग्लास पर रोक
सुप्रीम कोर्ट और मोटर वाहन नियमों के तहत यात्री बसों में खिड़कियों पर पर्दे लगाने या विजिबिलिटी रोकने पर सख्त पाबंदी है। बस में गहरे पर्दे लगे थे, जिससे अंदर हो रही दरिंदगी बाहर से पूरी तरह छिप गई।
जीपीएस और पैनिक बटन
सभी कमर्शियल यात्री वाहनों में लाइव वीएलटीडी और पैनिक बटन अनिवार्य हैं, जो कंट्रोल रूम से जुड़े हों। खाली बस चलती रही, लेकिन किसी भी आपातकालीन सिस्टम या कंट्रोल रूम से कोई अलर्ट ट्रिगर नहीं हुआ।
सीसीटीवी कैमरे
सार्वजनिक परिवहन और लंबी दूरी की स्लीपर बसों में आंतरिक सुरक्षा के लिए सीसीटीवी लगाना अनिवार्य किया गया था। बस के भीतर सुरक्षा निगरानी नदारद थी। पुलिस को केवल बाहरी रास्तों के सीसीटीवी पर निर्भर रहना पड़ा।