मगरमच्छ की तलाश में जाल, गश्त और रेस्क्यू... फिर भी पकड़ में क्यों नहीं आया शिकारी? 48 घंटे बाद भी वन विभाग नाकाम
Bahraich News: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के बौंडी थाना क्षेत्र में घाघरा नदी के किनारे एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. तिकुरी (मुरौवा) गांव निवासी मासूम सुनील सिंह (12) की मगरमच्छ के हमले में दर्दनाक मौत हो गई. बताया जा रहा कि बच्चा अपने चाचा के साथ धान की रोपाई के लिए खेत गया था. इसी दौरान वह नदी किनारे हाथ-मुंह धोने और शौच के लिए गया, तभी पहले से घात लगाए बैठे मगरमच्छ ने उस पर हमला कर दिया और उसे जबड़ों में दबाकर गहरे पानी में खींच ले गया. घटना का वीडियो भी मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बना लिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
घटना शुक्रवार दोपहर की है. जैसे ही मगरमच्छ ने सुनील पर हमला किया, उसके चाचा विजय राज सिंह और आसपास मौजूद ग्रामीण मौके की ओर दौड़े. चाचा ने बच्चे का हाथ पकड़कर उसे बचाने की भरसक कोशिश की. ग्रामीणों का कहना है कि करीब सात मिनट तक मगरमच्छ और लोगों के बीच बच्चे को छुड़ाने की जद्दोजहद चलती रही. लोगों ने लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से मगरमच्छ पर हमला भी किया, लेकिन वह बच्चे को छोड़ने के बजाय गहरे पानी में लेकर चला गया.
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5 घंटे चले रेस्क्यू के बाद मिला शव
घटना की सूचना मिलते ही बौंडी थाना पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. स्थानीय गोताखोरों की मदद से नदी में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया. टॉर्च की रोशनी में करीब पांच घंटे तक चले अभियान के बाद रात लगभग 10 बजे घटनास्थल से करीब 300 मीटर दूर नदी से सुनील का शव बरामद किया गया. शव की हालत बेहद दर्दनाक थी. मगरमच्छ उसके एक पैर और पेट के हिस्से को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर चुका था. इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
48 घंटे बाद भी पकड़ से बाहर मगरमच्छ
घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है. ग्रामीण लगातार मगरमच्छ को पकड़ने की मांग कर रहे हैं. वन विभाग ने नदी में जाल लगाकर मगरमच्छ को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया है, लेकिन घटना के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी उसे पकड़ा नहीं जा सका है. विभाग की टीम लगातार नदी के आसपास निगरानी कर रही है. हालांकि इस पूरे मामले में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कैमरे पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए.
3 बहनों का इकलौता भाई था सुनील
इस हादसे का सबसे मार्मिक पहलू यह है कि सुनील के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था. वह अपनी तीन बहनों का इकलौता भाई था और अपने चाचा के साथ रहकर जीवन बिता रहा था. परिवार की जिम्मेदारी भी उसी पर आने वाली थी. रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक है, लेकिन अब कलाइयों पर राखी बंधवाने वाला भाई हमेशा के लिए उनसे बिछड़ गया. इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
ग्रामीणों में दहशत, सुरक्षा की मांग
लगातार हो रही मगरमच्छ की गतिविधियों से घाघरा नदी के किनारे बसे गांवों में भय का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि नदी किनारे खेतों में काम करने वाले किसानों और बच्चों की सुरक्षा के लिए वन विभाग को स्थायी इंतजाम करने चाहिए. लोगों ने नदी के संवेदनशील इलाकों में चेतावनी बोर्ड लगाने, नियमित गश्त बढ़ाने और मगरमच्छ को जल्द पकड़ने की मांग की है. फिलहाल वन विभाग का रेस्क्यू अभियान जारी है. पूरे इलाके में सतर्कता बरती जा रही है.
(रिपोर्ट- अनिल तिवारी/बहराइच)

आशीष कुमार मिश्रा
आशीष कुमार मिश्रा की 6 साल से जर्नलिज्म की Journey जारी है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को बनाने में अहम योगदान भारत के राज्यों का है. इन राज्यों से जुड़ी हर खटपट, चाहे राजनीतिक हो या सामाजिक, वो आप तक पहुंचाने में जुटा हुआ हूं. उत्तर प्रदेश समेत देश के तमाम बड़े राज्यों की सियासत को समझता हूं और बेबाकी से उसे लिखता हूं. जर्नलिज्म की Journey 2017 में न्यूज चैनल समाचार टुडे से स्टार्ट हुई, फिर नेशनल वॉइस के साथ भी काम करने का मौका मिला. दो न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल की तरफ में रुख किया. 2018 में पहली बार हैदराबाद में ईटीवी भारत की डिजिटल विंग टीम से जुड़ा. यहां साढ़े 3 साल का समय बिताने के बाद 2021 में दैनिक भास्कर (लखनऊ) की टीम से जुड़ा. अब यह सफर 2022 से टीवी9 भारतवर्ष के साथ चल रहा है. पत्रकारिता का मैंने ककहरा दैनिक जागरण इंस्टीट्यूट से सीखा. यहीं से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.
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