वाट के नाम पर निगम की ‘वॉट: 5 हजार की ब्रांडेड बॉडी में 200 की चाइनीज LED प्लेट, मेंटेनेंस पर 13.60 करोड़ खर्च - Jaipur News
जयपुर39 मिनट पहलेलेखक: भरत सिसोदिया
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- भास्कर ने रोड लाइटें खुलवाईं तो सच आया सामने
- पहले ठेकेदार, अब निगम संभाल रहा मेंटेनेंस, खर्च बढ़ा
प्रदेशभर की सड़कों पर नगर निगम ऐसी स्ट्रीट लाइटें लगा रहा है, जो दूर से चमकती दिखती हैं, लेकिन सड़क पर उनकी पूरी रोशनी भी नहीं पहुंच पाती है। यानी पोल के नीचे उजाला और आगे अंधेरा। भास्कर टीम ने एक्सपर्ट के साथ जयपुर के विद्याधर नगर और मानसरोवर सेक्टर-8 में मौके पर रियलिटी चेक किया। लाइटें खुलवाकर अंदर के पार्ट्स की जांच में सामने आया कि बाहर से एमआई और बजाज जैसी ब्रांडेड दिखने वाली लाइटों में अंदर सस्ती चाइनीज एलईडी प्लेट लगी है।
5000 हजार रुपए की ब्रांडेड बॉडी में 200 रुपए की लाइट मिली। कई लाइटों में न एलईडी ड्राइवर मिला और न ही सर्ज प्रोटेक्शन डिवाइस (एसपीडी) है। नगर निगम में स्ट्रीट लाइट मेंटेनेंस के नाम पर घटिया सामग्री लगाने का भी मामला सामने आया है। खराब हो रही लाइटों की जगह कम गुणवत्ता वाली लाइटें लगाई जा रही हैं, जो जलती तो हैं, लेकिन उनका फोकस सड़क पर नहीं पड़ता।
प्रदेश में 14.50 लाख लाइटें पहले से लगीं, निकायों ने 1.50 लाख लगाईं; 2 लाख और लगाने का लक्ष्य
केंद्र के स्ट्रीट लाइटिंग नेशनल प्रोग्राम के तहत 2024 तक राजस्थान में 14.50 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइटें लग चुकी थीं। निकायों ने अपने स्तर पर 1.50 लाख लाइटें लगाईं। राज्य सरकार ने 2 लाख और लाइटें लगाने की घोषणा की है।

सब गोलमाल है... मेंटेनेंस का बिल पूरा, खर्च कम; ठेकेदार को ज्यादा भुगतान
यदि किसी ठेकेदार के पास 10 हजार पॉइंट हैं, तो 40 रुपए प्रति पॉइंट के हिसाब से उसे हर माह 4 लाख रुपए मिलते हैं। जांच में सामने आया कि वह करीब 50 हजार रुपए का घटिया सामान लगा रहा है।

चाइनीज प्लेटें लगी हैं; ड्राइवर-SPD गायब
- लाइटों में इन-बिल्ट ड्राइवर नहीं था, एसपीडी गायब था।
- कुछ में लगे पार्ट्स भी 120-150 रुपए के सस्ते चाइनीज थे।
- जयपुर के विद्याधर नगर और मानसरोवर सेक्टर-8 में जांच के दौरान सामने आया कि लाइटों में केवल एलईडी प्लेट मिली, जिसकी बाजार कीमत करीब 200 रु. है। यह प्लेट ठेलों पर इस्तेमाल होने वाली लाइटों में उपयोग होती है, जिसका फोकस सीमित रहता है।

पहले ठेकेदार, अब निगम संभाल रहा मेंटेनेंस, खर्च बढ़ा
पहले ईईएसएल कंपनी के पास 1.26 लाख एलईडी लाइटों और मेंटेनेंस का काम था। जयपुर के मानसरोवर, विद्याधर नगर, वैशाली नगर, सिविल लाइंस और झोटवाड़ा जोन इसमें शामिल थे। निगम कंपनी को 25 रुपए प्रति पॉइंट भुगतान कर रहा था। दिसंबर 2024 में कंपनी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मेंटेनेंस निगम की लाइट शाखा ने संभाला। जेडीए से ली गई 30 हजार लाइटें भी निगम मेंटेन कर रहा। ठेकेदारों को 40-80 रुपए/लाइट भुगतान कर रहे। 17 माह में 13.60 करोड़ खर्च हुए। यानी हर माह 80 लाख रुपए।
60 वाट की जगह 10 लक्स, मुख्य सड़कों पर भी मानक से कम रोशनी
- 60 वाट जैसी दिखने वाली लाइटों का फोकस 10 लक्स ही है। सड़कों पर भी यह करीब 20 लक्स तक ही पहुंच रहा है।
- ए-1 (120 वाट) लाइट: 30 लक्स, 25-30 मीटर रोड कवर
- ए-2 (60 वाट) लाइट: 15 लक्स, 10-15 मीटर रोड कवर
- बी-1 (30 वाट): 8 मीटर एरिया
- बी-2 (11-15 वाट): 5 मीटर एरिया।
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