नेपाल की बाढ़ में मिले हिंदुओं के शव दफनाए क्यों जा रहे? 5 सवालों में पूरी कहानी
नेपाल में भोटेकोशी बाढ़ और भूस्खलन के बाद मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. रविवार सुबह 11 बजे तक 735 शव मिलने की बात सामने आई, लेकिन इनमें सिर्फ 20 की पहचान हो पाई थी. बड़ी संख्या में हिंदुओं के शव नदी के बहाव के साथ दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच गए हैं. ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती शवों को सुरक्षित रखना और उनकी पहचान कराना है.
चितवन में अकेले 264 शव नदी किनारे से बरामद किए गए. इनमें केवल चार की पहचान हो सकी. बाकी शव अस्पतालों और अस्थायी शेल्टर्स में रखे गए थे. संख्या बढ़ने और शवों के खराब होने के कारण प्रशासन ने अज्ञात और लावारिस शवों को एयरटाइट यानी हवा बंद बैग में रखकर जमीन में दफनाने का फैसला किया है. लेकिन सवाल है कि क्या आपदा के बाद अज्ञात शवों को दफनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक है? और क्या इन्हें जल्द दफनाना जरूरी था?
1. सरकार शवों को दफना क्यों रही है?
सरकार का कहना है कि बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण उन्हें लंबे समय तक अस्पतालों या खुले स्थानों पर रखना मुश्किल हो रहा है. शव खराब होने लगे हैं और दुर्गंध भी फैल रही है. नेपाल पुलिस के प्रवक्ता DIG अभिनारायण काफले के मुताबिक, शवों को एयरटाइट बैग में रखकर दफनाया जा रहा है. हर शव की जानकारी सुरक्षित रखी जा रही है ताकि बाद में पहचान होने पर उसे कब्र से निकालकर परिवार को सौंपा जा सके.
2. क्या अज्ञात शवों को दफनाना अंतरराष्ट्रीय प्रथा है?
हां, लेकिन शर्तों के साथ. ICRC (इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस), WHO और IFRC (इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ द रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट) की गाइडलाइन के मुताबिक, अज्ञात शवों को अस्थायी तौर पर दफनाया जा सकता है, अगर उन्हें बाद में पहचानकर परिवार को सौंपने की व्यवस्था बनी रहे.
ICRC की गाइडलाइन में सामान्य तौर पर अलग-अलग और साफ तौर पर चिन्हित कब्रों को प्राथमिकता दी गई है. बहुत बड़ी संख्या में मौत होने और संसाधन सीमित होने पर ट्रेंच यानी सामूहिक गड्ढे का विकल्प भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन उसे भी व्यवस्थित और ट्रेस करने योग्य होना चाहिए.
3. दफनाते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
सबसे जरूरी है कि हर शव का अलग पहचान नंबर हो. शव और उसके बैग पर वाटरप्रूफ टैग लगाया जाना चाहिए. कब्र की जगह पर भी वही नंबर दर्ज होना चाहिए. ICRC के मुताबिक, दफन स्थल का नक्शा और रिकॉर्ड तैयार होना चाहिए और GPS लोकेशन दर्ज करना बेहद महत्वपूर्ण है. सामान्य गाइडलाइन में कब्र की गहराई करीब 1.5 से 3 मीटर रखने का सुझाव है. दफन स्थल को पानी के सोर्स से सुरक्षित दूरी पर रखना भी जरूरी है. यानी जमीन में दफन करना शव को गायब करना नहीं है. यह तभी सही प्रक्रिया है, जब भविष्य में उसे खोजकर पहचानने की पूरी जानकारी सुरक्षित रखी जाए.
4. क्या शवों को तुरंत दफन करना ही जरूरी है?
WHO कहता है कि सिर्फ महामारी के डर से शवों को जल्दबाजी में सामूहिक रूप से दफनाना उचित नहीं है. पहले फोटो, कपड़े, निजी सामान और पहचान से जुड़ी जानकारी दर्ज करनी चाहिए. इसके बाद शव को अस्थायी रूप से सुरक्षित रखा जा सकता है. नेपाल के फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. हरिहर वस्ती के मुताबिक, पहचान के लिए पहले चेहरा और शारीरिक पहचान, फिर फिंगरप्रिंट और दांतों के रिकॉर्ड और अंत में DNA का इस्तेमाल किया जा सकता है.
नेपाल पुलिस का कहना है कि शवों से DNA नमूने लिए जा रहे हैं और नंबर टैग लगाए जा रहे हैं. अगर बाद में किसी शव की पहचान होती है तो उसे कब्र से निकालकर परिवार को सौंपा जा सकता है.
5. बाढ़ में शवों की पहचान इतनी मुश्किल क्यों है?
भोटेकोशी जैसी बाढ़ में शव अक्सर कई किमी दूर बह जाते हैं, कीचड़ और पानी में लंबे समय तक पड़े रहते हैं और क्षत-विक्षत हो जाते हैं. नेपाल पुलिस के अनुसार मिले शवों में 211 शव क्षत-विक्षत अवस्था में थे. ऐसे मामलों में सिर्फ चेहरा देखकर पहचान करना मुश्किल हो जाता है. इसलिए DNA, फिंगरप्रिंट और दांतों के रिकॉर्ड ज्यादा अहम हो जाते हैं. INTERPOL भी बड़े हादसों में पहचान के लिए इन्हीं वैज्ञानिक तरीकों पर जोर देता है. उसके DVI सिस्टम में शव की जांच, परिवार से मिली जानकारी और फिर दोनों का मिलान किया जाता है.
इसलिए नेपाल में अज्ञात शवों को जमीन में दफनाना अपने आप में अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ नहीं है. असल सवाल यह है कि क्या हर शव का नंबर, DNA/फोरेंसिक डेटा, कब्र की सही लोकेशन और पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा रहा है. यही प्रक्रिया भविष्य में परिवारों को अपने लापता परिजनों की पहचान और शव वापस पाने का मौका देती है.
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शुभेंदु प्रताप भूमंडल
पत्रकारिता में बीते 5 साल से सक्रिय हैं. नेशनल और इंटरनेशनल न्यूज राइटिंग का अनुभव. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन, फिर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और वीडियो प्रोडक्शन की पढ़ाई. दैनिक भास्कर डिजिटल से करियर की शुरुआत. बतौर न्यूज ब्रीफ एडिटर भास्कर डिजिटल में 800 से ज्यादा बाइलाइन स्टोरी. वीडियो स्क्रिप्टिंग का भी अनुभव. अगस्त 2025 से टीवी9 डिजिटल के साथ नई पारी का आगाज.
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