नेपाल में फिर आया भूकंप, 5.3 की तीव्रता से दहला काठमांडू

Sep 08, 2026 11:11 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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नेपाल में यह भूकंप ऐसे समय आया है जब बीते दिनों यहां अचानक विनाशकारी बाढ़ आई थी। इस तबाई से प्रभावित इलाकों से और शव बरामद किए जाने के बाद मंगलवार को मृतकों की संख्या बढ़कर 1,357 हो गई है।

Nepal Kathmandu jolted by earthquake late Tuesday NCS report in Tibet too

नेपाल में बीते दिनों आई बाढ़ से भारी तबाही मची थी।

नेपाल की राजधानी काठमांडू में मंगलवार रात 5.3 तीव्रता का भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक, यह भूकंप रात 9 बजकर 38 मिनट 39 सेकंड (भारतीय समयानुसार) पर आया और इसका केंद्र जमीन से 143 किलोमीटर की गहराई में था। ताजा भूकंप के चलते जान-माल के नुकसान की जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।

नेपाल में यह भूकंप ऐसे समय आया है जब बीते दिनों यहां अचानक विनाशकारी बाढ़ आई थी। इस तबाई से प्रभावित इलाकों से और शव बरामद किए जाने के बाद मंगलवार को मृतकों की संख्या बढ़कर 1,357 हो गई। बचाव दल अब भी 5,326 लोगों की तलाश कर रहे हैं जबकि अब तक 13,583 लोगों को बचाया जा चुका है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को हिमस्खलन के कारण अचानक भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों व गांवों में भारी तबाही मचाई। अलग-अलग प्रभावित इलाकों से और शव मिलने के बाद मरने वालों की संख्या 1,357 हो गई है।

नेपाल में बाढ़ ने मचाई भारी तबाही

सुरक्षाबलों की संयुक्त कमान ने अब तक चितवन जिले से 363 शव, नवलपरासी पूर्व से 223, नवलपरासी पश्चिम से 222 और नुवाकोट से 197 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, रसुवा से 169, गोरखा से 75, धादिंग से 70 और तनहूं से 38 शव बरामद किए गए हैं। सोमवार तक केवल 102 शवों की पहचान की गई और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया। चीनी मीडिया की खबरों के मुताबिक इस आपदा से चीन नियंत्रित तिब्बत में भी कम से कम 43 लोगों की मौत हुई है, जबकि 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।

एनडीआरआरएमए के अनुसार, सोमवार तक रासुवा, नुवाकोट और धादिंग में सरकार द्वारा संचालित आश्रय शिविरों में करीब 3,500 लोग रह रहे थे। लेकिन बाढ़ से बेघर हुए कई अन्य लोगों ने जहां भी जगह मिली, वहां शरण ली है जिनमें स्कूल, मंदिर, मठ, खाली कार्यालय की इमारतें, सामुदायिक इमारतें और जंगलों में लगाए गए तंबू शामिल हैं। बाढ़ प्रभावित जिलों में जल विद्युत परियोजनाओं पर भी बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं और आशंका है कि इन परियोजनाओं की भूमिगत सुरंगों में करीब 121 लोग फंसे हो सकते हैं।