मानसून बीता, बांध नहीं भरे, 5 साल बाद पौंग-भाखड़ा डैम खाली रहे, रबी सीजन पर संकट - Hanumangarh News

जब बांधों का जल स्तर कम रहा, किसानों को पूरा पानी नहीं मिला, इससे नुकसान हुआ मानसून अवधि में जब बांध भरते नहीं तब किसानों को पूरा पानी नहीं मिलता। पिछले कई वर्षों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो जिन वर्षों में बांधों का जल स्तर डाउन रहा उन वर्षों में आंद

.

वर्ष 2002, 2004, 2010, 2018, 2021, 2024 में पौंग बांध का जल स्तर डाउन रहा। इन वर्षों में भी पर्याप्त पानी नहीं मिला। जानकारी के अनुसार पौंग बांध की भराव क्षमता 1390 फीट है, जबकि 18 सितंबर 2026 को डैम का जल स्तर 1371.80 फीट पर ही पहुंचा। यानी भराव क्षमता से बांध का लेवल करीब 19 फीट कम है। इसी तरह भाखड़ा बांध का जल स्तर 1644.92 फीट पर पहुंचा है, जबकि भराव क्षमता 1680 फीट है। आम तौर पर मानसून अवधि में बांधों में पानी की अच्छी आवक हो जाती है। गत वर्ष दोनों डैम भर गए थे। इसलिए किसानों को डिमांड के अनुसार पानी ​उपलब्ध हुआ। बांधों में पानी की सर्वाधिक आवक प्रत्येक वर्ष 21 जून से 20 सितंबर तक होती है। 20 सितंबर को जितना जल स्तर होता है उसके अनुसार राजस्थान सहित अन्य राज्यों के पानी का शेयर तय होता है। यह पानी अगले वर्ष 21 मई तक आबंटित शेयर के अनुसार संबंधित राज्य लेता है। जब पौंग और भाखड़ा बांध भराव क्षमता पर पहुंच जाते हैं तो राजस्थान के लिए ज्यादा पानी का शेयर आबंटित होता है। पौंग बांध में आने वाले कुल पानी का लगभग 49 प्रतिशत राजस्थान का शेयर है। यह पानी इंदिरा गांधी नहर परियोजना के माध्यम से पश्चिमी राजस्थान के हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर जिले सहित 12 जिलों में पहुंचता है। 6 जिलों में 16 लाख 17 हजार रकबा सिंचित होता है। 12 जिलों की 1.70 करोड़ आबादी को पेयजल उपलब्ध होता है। भाखड़ा बांध के जल स्तर के अनुसार भाखड़ा प्रणाली के किसानों को पानी मिलता है। भास्कर संवाददाता । हनुमानगढ़ इस बार मानसून अवधि में भाखड़ा और पौंग बांधों में अपेक्षा के अनुरूप पानी की आवक नहीं हुई। भाखड़ा डैम लगभग 36 फीट और पौंग बांध करीब 19 फीट खाली है। ऐसी स्थिति 5 वर्षों के बाद उत्पन्न हुई है। 2021 में भी मानसून अवधि में पानी की आवक कम हुई और बांध भरे नहीं थे। जबकि आईजीएनपी के किसान नहरों को चार में से दो समूह में चलाकर सिंचाई पानी देने की मांग कर रहे हैं। इस बार हनुमानगढ़-श्रीगंगानग र जिले में भी बारिश कम हुई है। खरीफ फसलों को नुकसान हुआ। आगामी रबी सीजन पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। 20 सितंबर तक बांधों में जितना पानी आएगा उसके अनुसार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की ओर से राजस्थान सहित पंजाब, हरियाणा व अन्य संबंधित राज्यों का शेयर तय करेगा। तकनीकी कमेटी की बैठक में बीबीएमबी की ओर से संबंधित राज्यों को आबंटित हुए पानी की रिपोर्ट दी जाएगी। आबंटित पानी के अनुसार राजस्थान द्वारा इंदिरा गांधी नहर परियोजना, भाखड़ा प्रणाली, गंग कैनाल और नोहर-सिद्धमुख परियोजना का रेगुलेशन घोषित किया जाएगा। बांधों का जल स्तर कम होने के कारण रबी सीजन के लिए बहुत कम पानी मिलने की उम्मीद है। ऐसे में किसानों को गेहूं की ​बजाए अन्य फसलों की बिजाई करनी होगी।