कुपवाड़ा के मेहजूर सुल्तान मीर ट्राउट मछली पालन से कमा रहे सालाना 5-6 लाख रुपये

13 सितंबर 2026, कुपवाड़ा (जम्मू-कश्मीर): कुपवाड़ा के मेहजूर सुल्तान मीर ट्राउट मछली पालन से कमा रहे सालाना 5-6 लाख रुपये – पहाड़ी जिले कुपवाड़ा के मेहजूर सुल्तान मीर ने मछली पालन को आधुनिक तकनीक से जोड़कर अपनी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल दी है। उन्होंने वर्ष 2021 में मत्स्य पालन क्षेत्र में कदम रखा और मत्स्य विभाग से संपर्क कर ट्राउट मछली पालन के लिए रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) यूनिट स्थापित की। आज इस व्यवसाय से वह हर साल करीब 5 से 6 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं।
आरएएस तकनीक में सीमित पानी का बार-बार शुद्धिकरण और पुनःउपयोग कर उसी में मछली पालन किया जाता है, जिससे कम जगह और कम पानी में भी अच्छी पैदावार मिलती है। पहाड़ी इलाकों में जहां बड़े तालाब या नदी किनारे की जमीन आसानी से नहीं मिलती, वहां यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी साबित होती है। ठंडे पहाड़ी इलाकों में ट्राउट मछली की मांग और कीमत दोनों अच्छी रहती है, जिसका सीधा फायदा सुल्तान मीर को मिल रहा है।
शुरुआत में सुल्तान मीर को तकनीकी जानकारी और यूनिट लगाने की प्रक्रिया समझने में समय लगा, लेकिन मत्स्य विभाग के अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखने से उन्हें हर कदम पर मार्गदर्शन मिलता रहा। धीरे-धीरे उन्होंने उत्पादन बढ़ाया और स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के शहरों में भी अपनी मछली बेचना शुरू किया।
सरकारी योजना से मिला सहारा
सुल्तान मीर को यूनिट लगाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत 40 प्रतिशत सब्सिडी मिली। यह योजना केंद्र सरकार मत्स्य पालन क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, उत्पादन और आय बढ़ाने के मकसद से चला रही है, और इसके तहत लाभार्थी की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग दर पर सब्सिडी दी जाती है। इसी सरकारी सहयोग ने शुरुआती निवेश का बोझ कम किया और उन्हें अपने दम पर व्यवसाय खड़ा करने का हौसला दिया।
उनकी सफलता से गांव के अन्य लोगों को भी रोजगार मिलना शुरू हुआ है, और कुछ युवा अब उनके यहां काम सीखकर खुद की यूनिट लगाने की योजना बना रहे हैं।
सुल्तान मीर बताते हैं कि शुरुआती दिनों में पानी के तापमान और ऑक्सीजन स्तर को सही बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन मत्स्य विभाग के प्रशिक्षण और लगातार निगरानी से उन्होंने इस पर काबू पा लिया। अब वह अपनी यूनिट की क्षमता और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, ताकि आने वाले समय में उत्पादन और आय दोनों में और इजाफा हो सके।
कुपवाड़ा जैसे ठंडे पहाड़ी जिलों में बहते हुए साफ पानी की उपलब्धता ट्राउट पालन के लिए अनुकूल मानी जाती है, और सुल्तान मीर के अलावा भी इलाके के कई युवा अब इस दिशा में रुख कर रहे हैं। स्थानीय मत्स्य विभाग समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर नए किसानों को तकनीकी बारीकियां सिखाता है, जिससे यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में और आगे बढ़ने की उम्मीद है।
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