सड़कें गायब, गांव डूबे, घरों में 5 फीट तक जमा कीचड़... असम में बाढ़ का दर्द, नावों के सहारे जिंदगी!

असम में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित.
Assam Flood: असम में बाढ़ ने इस बार ऐसा कहर बरपाया है, जिसकी तस्वीरें हर किसी को झकझोर रही हैं. लगातार हुई भारी बारिश और नदियों के उफान ने लाखों लोगों की जिंदगी को संकट में डाल दिया है. राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है, जबकि 5.24 लाख से ज्यादा लोग अब भी इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हैं. सबसे ज्यादा तबाही शिवसागर, चराईदेव और नाजिरा क्षेत्र में देखने को मिल रही है, जहां हजारों परिवार अब भी पानी, कीचड़ और बदहाली के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं.
असम इस समय भीषण बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है. कई जिलों में बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन अपने पीछे तबाही की ऐसी तस्वीर छोड़ गया है, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो रहा है. हजारों घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. कई गांवों में लोगों के घरों के अंदर पांच फुट तक कीचड़ जमा है, जिससे घरों में रहना लगभग असंभव हो गया है.
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कौन से इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित?
सबसे ज्यादा प्रभावित शिवसागर, चराईदेव और नाजिरा इलाके हैं. यहां सड़कें टूट चुकी हैं, खेत बर्बाद हो गए हैं और लोगों की वर्षों की मेहनत कुछ ही दिनों में पानी में बह गई. कई परिवारों के पास खाने-पीने का सामान तक नहीं बचा है. राहत शिविरों में बड़ी संख्या में लोग शरण लिए हुए हैं, जबकि कई गांवों तक अब भी राहत सामग्री पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है.
घरों में जमा गंदगी को हटाना बड़ी मुश्किल
बाढ़ का पानी भले कुछ जगहों पर कम हुआ हो, लेकिन असली मुश्किल अब शुरू हुई है. घरों के भीतर जमा कीचड़, सड़ांध और गंदगी लोगों के लिए नई परेशानी बन गई है. लोग अपने घरों की सफाई में जुटे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण यह काम बेहद कठिन हो गया है। कई परिवारों का राशन, कपड़े, फर्नीचर और जरूरी सामान पूरी तरह बर्बाद हो चुका है
प्रभावित इलाकों में अब भी कई ऐसे गांव हैं, जहां पहुंचने के लिए सड़क का कोई साधन नहीं है. नाव ही एकमात्र सहारा बनी हुई है. स्थानीय लोग, सामाजिक संगठन और स्वयंसेवी संस्थाएं अपने स्तर पर भोजन, पीने का पानी और अन्य राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि पीड़ितों का कहना है कि जरूरत के मुकाबले मदद अभी भी काफी कम है.
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बाढ़ पीड़ितों की आंखों में अपने उजड़े घरों का दर्द साफ दिखाई दे रहा है. कोई अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है तो कोई अपनी जीवनभर की कमाई को मिट्टी में मिला देखकर रो रहा है. कई परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में असम में ऐसी भयावह बाढ़ पहले कभी नहीं देखी.
राहत-बचाव कार्य जारी
प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार बचाव और राहत कार्य में जुटी हैं. प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर चलाए जा रहे हैं और जरूरतमंदों तक खाद्य सामग्री तथा अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अब भी सामान्य जीवन की वापसी का इंतजार कर रहे हैं.
असम की यह बाढ़ केवल पानी की आपदा नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन, रोजगार और भविष्य पर गहरा संकट बनकर सामने आई है. मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और लाखों लोग अब भी राहत के भरोसे हैं. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय, पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पेयजल और जल्द से जल्द सामान्य जीवन उपलब्ध कराना है.
(रिपोर्ट-शुभम शाह/असम)

आशीष कुमार मिश्रा
आशीष कुमार मिश्रा की 6 साल से जर्नलिज्म की Journey जारी है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को बनाने में अहम योगदान भारत के राज्यों का है. इन राज्यों से जुड़ी हर खटपट, चाहे राजनीतिक हो या सामाजिक, वो आप तक पहुंचाने में जुटा हुआ हूं. उत्तर प्रदेश समेत देश के तमाम बड़े राज्यों की सियासत को समझता हूं और बेबाकी से उसे लिखता हूं. जर्नलिज्म की Journey 2017 में न्यूज चैनल समाचार टुडे से स्टार्ट हुई, फिर नेशनल वॉइस के साथ भी काम करने का मौका मिला. दो न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल की तरफ में रुख किया. 2018 में पहली बार हैदराबाद में ईटीवी भारत की डिजिटल विंग टीम से जुड़ा. यहां साढ़े 3 साल का समय बिताने के बाद 2021 में दैनिक भास्कर (लखनऊ) की टीम से जुड़ा. अब यह सफर 2022 से टीवी9 भारतवर्ष के साथ चल रहा है. पत्रकारिता का मैंने ककहरा दैनिक जागरण इंस्टीट्यूट से सीखा. यहीं से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.
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