'बच्चे नहीं हो रहे थे, स्नान करते ही चमत्कार हुआ': लोलार्क कुंड पहुंचे 5 लाख लोग, बोले-इसके आगे IVF भी फेल; जानिए एक्सपर्ट राय - Varanasi News

'शादी के 8 साल बाद भी बच्चे नहीं हुए। गांव के लोगों ने बताया कि लोलार्क कुंड में स्नान करने से संतान की प्राप्ति होती है। इसलिए हम पत्नी के साथ वाराणसी पहुंचे, स्नान किया और 2 साल बाद बेटा हुआ। आज उसको स्नान कराकर मुंडन कराने आए थे।'

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यह कहना है बलिया के रहने वाले मुकेश का। ऐसे ही लाखों लोग उम्मीद लेकर लोलार्क छठ के दिन देश के कई राज्यों से काशी के लोलार्क कुंड में स्नान करने पहुंचे।

इस आस्था के पीछे कितनी सच्चाई है? क्या वाकई लोगों को स्नान के बाद बच्चे हुए हैं? यही जानने के लिए दैनिक भास्कर ने वहां जिन लोगों के बच्चे हुए उनसे बात की और एक्सपर्ट से भी जाना.…

पहले 3 तस्वीर देखें…

बच्चा होने पर लोगों ने ढोल-नगाड़े के बीच मुंडन कराया।

बच्चा होने पर लोगों ने ढोल-नगाड़े के बीच मुंडन कराया।

पति-पत्नी ने हाथ पकड़कर 7 डुबकी लगाई।

पति-पत्नी ने हाथ पकड़कर 7 डुबकी लगाई।

आस्था के आगे बारिश को इग्नोर किया, लाइन में लगे रहे।

आस्था के आगे बारिश को इग्नोर किया, लाइन में लगे रहे।

3 साल बच्चे नहीं हुए, स्नान के मिला संतान सुख

अपने बच्चों को लेकर लोलार्क कुंड जाने वाली गली में बैठीं नीलम ने कहा कि हमारी शादी को 3 साल हुए लेकिन बच्चे नहीं हो रहे थे। आसपास के लोगों से सुना कि इस कुंड में स्नान करने से संतान की प्राप्ति होती है, जिसके बाद हम अपने पति के साथ यहां स्नान करने आए। हमें 1 साल बाद ही पुत्र हुआ। आज हम यहां इस कुंड का धन्यवाद करने आए हैं और अपने पुत्र को भी स्नान कराया है और यही उसका मुंडन भी कराया।

सैदपुर की अर्चना ने लोलार्क कुंड पहुंचकर सूर्यदेव का धन्यवाद किया।

सैदपुर की अर्चना ने लोलार्क कुंड पहुंचकर सूर्यदेव का धन्यवाद किया।

डॉक्टर ने IVF की सलाह दी थी

सैदपुर की अर्चना ने बताया की उनके शादी को चार साल से अधिक का समय बीत चुका था। संतान नहीं हुई तो डॉक्टरों से परामर्श भी लिया, लेकिन ज़ब सफलता नहीं मिली। डॉक्टर ने IVF की सलाह दी थी। इसी बीच मामी से लोलार्क कुंड के बारे में सुना। फिर यहां स्नान किया। इसके एक साल के भीतर ही गोद भर गई।

कानपुर से आई मीरा ने बताया कि कुंड में पूजन के क्या नियम हैं।

कानपुर से आई मीरा ने बताया कि कुंड में पूजन के क्या नियम हैं।

‘पेट में ही खराब हो रहे थे बच्चे, स्नान से चमत्कार हुआ’

कानपुर से आई मीरा ने कहा कि दो-तीन साल से हम परेशान थे बच्चा पेट में ही खराब हो जा रहा था। हमने यहां के बारे में मोबाइल में देखा था जिसके बाद हम यहां स्नान करने आए और 1 साल बाद ही हमें बच्चा हुआ। उन्होंने बताया कि यहां स्नान करते समय एक फल का त्याग किया जाता है इसके अलावा जो कपड़ा आप पहने हैं उसे भी यहीं छोड़ दिया जाता है।

स्नान के बाद 60% लोगों को संतान सुख मिला

लोलार्क कुंड के सर्वे में सामने आया है कि यहां स्नान से 60% लोगों को संतान सुख मिला है। यह सर्वे 1995 में बीएचयू के भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. राणा पीबी सिंह और उनके शोध दल ने लोलार्क षष्ठी मेले के दौरान स्नान के लिए आए दंपतियों पर किया गया था। मेले के दौरान 300 से अधिक दंपतियों से प्रश्नावली और साक्षात्कार के आधार पर आंकड़े जुटाए गए थे।

तुलसी घाट स्थित लोलार्क कुंड को UNESCO ने भी कल्चरल एस्ट्रोनॉमी साइट बताया है। मिस्र के उल्टे पिरामिड जैसे आकार वाले 50 फीट गहरे और 15 फीट चौड़े इस कुंड में इस दिन महिलाएं सूनी कोख भरने का वरदान पाती हैं।

परंपरा, इतिहास और प्राचीन उल्लेख

लोलार्क षष्ठी और सूर्य उपासना की यह परंपरा गुप्तकाल (चौथी शताब्दी) से भी पुरानी मानी जाती है। 10वीं शताब्दी में गहड़वाल राजा गोविंदचंद्र ने इसका जीर्णोद्धार कराया था।

पौराणिक काल से ही सूर्य को आरोग्य और जीवन शक्ति (प्रजनन क्षमता) का कारक माना गया है। महाभारत और पुराणों के काल से ही इस कुंड का संबंध संतान प्राप्ति की मान्यता से जुड़ा है।

काशी खंड (स्कंद पुराण) में लोलार्क तीर्थ और लोलार्केश्वर महादेव की महिमा के बारे में बताया गया है। शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ में 12 आदित्यों (सूर्य रूपों) में लोलार्क सूर्य की जानकारी मिलती है। मत्स्य पुराण और कृत्यकल्पतरु में काशी के प्रमुख तीर्थों और लोलार्क क्षेत्र की स्थिति का जिक्र है।

1822 में जेम्स प्रिंसेप ने भी किया था लोलार्क कुंड का जिक्र

प्रो. राणा पीबी सिंह ने बताया, 19वीं सदी से पहले वाराणसी में कभी किसी को हैजा, कालरा, बांझपन या चर्म रोग नहीं होता था। यहां के कुंड और तालाबों में पहुंचा गंगाजल सचमुच में आयुर्वेदिक बूटियों का काम करता था।

1822 में जेम्स प्रिंसेप ने भी लिखा है कि काशी का लोलार्क कुंड गर्भधारण कराने में मदद करता है। इसके बाद डायना अक और खुद प्रो. सिंह ने अपनी किताब में इस जगह को फर्टिलिटी कल्ट के रूप में संबोधित किया है। उन्होंने अपनी टीम के साथ 2009 में रिसर्च पेपर भी पब्लिश किया।

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काशी में लोलार्क कुंड में लोलार्क षष्ठी का स्नान बुधवार की रात 12 बजे से शुरू हुआ। गुरुवार की शाम 5 बजे तक साढ़े 4 लाख से ज्यादा लोग स्नान कर चुके हैं। आस्था और विश्वास के अद्भुत संगम के बीच आयोजित धार्मिक मेले में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे करीब चार लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर परिवार की सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति की कामना की। पढ़ें पूरी खबर…