सरकार का ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने का विचार नहीं: संसद में मंत्रालय ने कहा- खजाने पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा; 5 राज्यों की OPS फंड वापसी की मांग खारिज
सरकार का ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने का विचार नहीं:संसद में मंत्रालय ने कहा- खजाने पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा; 5 राज्यों की OPS फंड वापसी की मांग खारिज
नई दिल्ली12 घंटे पहले
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ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने को लेकर सरकार का रुख पूरी तरह साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि OPS को वापस लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार ने इसके पीछे सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को मुख्य वजह बताया है।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारों ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से पुरानी पेंशन योजना में वापस जाने के बारे में केंद्र सरकार और पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण को सूचित किया था।

कैग रिपोर्ट और राज्यों का अधिकार
एक अन्य सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि राज्यों में OPS की बहाली पूरी तरह से राज्य की नीतिगत विवेकाधिकार का मामला है। हालांकि, कैग ने अपनी हालिया 'स्टेट फाइनेंस ऑडिट रिपोर्ट्स' में राज्यों द्वारा OPS में वापस लौटने के वित्तीय परिणामों और नुकसान को रेखांकित किया है।
2004 से लागू है NPS, अब आया UPS का ऑप्शन
- NPS की शुरुआत: NPS एक डिफाइंड कंट्रीब्यूशन-बेस्ड स्कीम है, जो 1 जनवरी 2004 या उसके बाद सेवा में शामिल होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए शुरू की गई थी।
- सुधार के लिए कमेटी: NPS के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले पेंशन लाभ में सुधार के उद्देश्य से तत्कालीन वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था।
- UPS की शुरुआत: कमेटी के सुझावों और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत के आधार पर 1 अप्रैल 2025 से 'यूनिफाइड पेंशन स्कीम' (UPS) को लागू किया जा चुका है।
- UPS की खासियत: यह NPS के तहत ही एक ऑप्शन है, जिसका उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद कम से कम ₹10,000 प्रति माह की न्यूनतम एश्योर्ड पे-आउट और महंगाई से जुड़ी निश्चित पेंशन लाभ देना है। यह एक फंड-बेस्ड पे-आउट सिस्टम है जो कर्मचारी और सरकार दोनों के नियमित योगदान और निवेश पर निर्भर करता है।
- AUM डेटा: 7 जुलाई तक केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए NPS के तहत कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹3.65 लाख करोड़ दर्ज किया गया है।


AUM और फिस्कल डेफिसिट क्या होता है?
एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM): इसका मतलब उस रकम से है, जिसे कोई वित्तीय संस्थान (जैसे PFRDA) निवेशकों या कर्मचारियों की तरफ से मैनेज करता है।
राजकोषीय घाटा: सरकार की कुल कमाई और उसके कुल खर्च के बीच का अंतर राजकोषीय घाटा है। सरकार का खर्च उसकी आमदनी से ज्यादा होता है, तो उसे इस घाटे को पूरा करने के लिए बाजार से उधार लेना पड़ता है।
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