स्कूल और कॉलेज के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड पर बैन, महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक सरकार का फैसला - karnataka government issues advisory saying no junk food within 50 metres of schools and colleges

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कर्नाटक खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (FSDA) ने स्कूलों और कॉलेजों के 50 मीटर के दायरे में ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रो ...और पढ़ें

स्कूल और कॉलेज के आसपास जंक फूड को लेकर जारी की गई ए़डवाइजरी।

स्कूल और कॉलेज के आसपास जंक फूड को लेकर जारी की गई ए़डवाइजरी।

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। कर्नाटक खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (FSDA) विभाग ने एक एडवाइजरी जारी की है जिसमें राज्य के स्कूलों और कॉलेजों के 50 मीटर के दायरे में ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाई गई है।

यह एडवाइजरी जुलाई में 134 स्कूलों और कॉलेजों के आस-पास मौजूद फूड बिजनेस एस्टेब्लिशमेंट के एफएसडीए द्वारा किए गए निरीक्षणों के बाद जारी की गई है।

एडवाइजरी में क्या कहा गया?

एफएसडीए ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, “जांच के दौरान खाने-पीने की चीजों की क्वालिटी, साफ-सफाई, फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स का पालन, लेबलिंग की जरूरतों, एक्सपायर हो चुके फूड प्रोडक्ट्स की बिक्री और फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन की वैधता की जांच की गई। यह देखा गया कि स्कूल और कॉलेज परिसर के अंदर और आस-पास मौजूद कुछ फूड बिजनेस प्रतिष्ठान ज्यादा फैट, शुगर और नमक वाले फूड प्रोडक्ट्स बेच रहे थे।”

विभाग ने बताया कि नतीजों के आधार पर 24 जुलाई को एक एडवाइजरी जारी की गई थी। इसमें कहा गया कि स्कूल और कॉलेज परिसर के 50 मीटर के दायरे में ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री न की जाए, हेल्दी खाने के विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए और फूड बिजनेस ऑपरेटर फूड सेफ्टी नियमों का सख्ती से पालन करें।

'एडवाइजरी को प्रभावी ढंग से लागू कराएं अधिकारी'

एफएसडीए ने कहा, "जिले के नियुक्त अधिकारियों और फूड सेफ्टी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पूरे राज्य में इस एडवाइजरी को प्रभावी ढंग से लागू करें और स्कूल-कॉलेज मैनेजमेंट, फूड बिजनेस ऑपरेटरों और आम जनता के बीच जागरूकता फैलाएं।"

विभाग ने स्कूलों के पास मौजूद सभी खाने-पीने की दुकानों को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत लाइसेंस लेने और रजिस्ट्रेशन कराने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि फूड सेफ्टी अधिकारी स्कूलों और कॉलेजों के आस-पास नियमित रूप से जांच करेंगे।

इसमें कहा गया है कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रूल्स/रेगुलेशन्स, 2011 का उल्लंघन करने पर सुधार के लिए नोटिस जारी करना, लाइसेंस सस्पेंड या रद करना, फूड प्रोडक्ट्स जब्त करना और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विभाग ने कहा कि जांच में पाया गया कि कुछ स्कूलों में बच्चों को जो खाना दिया जा रहा था उसमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, जैसे सफेद ब्रेड, पास्ता और प्रोसेस्ड स्नैक फूड ज्यादा मात्रा में थे।

एफएसडीए ने 24 जुलाई की अपनी एडवाइजरी में कहा, "इस तरह के खाने से ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है। पूरे दिन लगातार एनर्जी बनाए रखने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए इन खानों में लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट को शामिल करके संतुलन बनाना जरूरी है।"

स्कूल मैनेजमेंट को दी गई हिदायत

इसमें कहा गया है कि स्कूल मैनेजमेंट को यह पक्का करना चाहिए कि स्कूल परिसर में ऐसे खाद्य पदार्थ न बेचे जाएं और मुख्य जगहों पर सही चेतावनी वाले साइन बोर्ड प्रमुखता से लगाए जाएं।

सलाह में कहा गया है कि स्कूल में मिलने वाले खाने को अनाज और प्रोटीन के ऐसे कॉम्बिनेशन के तौर पर तैयार किया जाए, जिनमें माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भरपूर हों। इसमें कहा गया है कि मेन्यू में साबुत अनाज, दालें, मोटे अनाज (मिलेट्स) और दूध व अंडे जैसे जानवरों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ शामिल होने चाहिए और ताजी, मौसमी व स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उपज का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

एडवाइजरी में आगे कहा गया कि खाने को ज्यादा पौष्टिक बनाने के लिए फोर्टिफाइड गेहूं का आटा, चावल, दूध, खाने का तेल और डबल फोर्टिफाइड नमक का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इसके लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (फोर्टिफिकेशन ऑफ फूड्स) रेगुलेशंस, 2018 में बताए गए मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।