गयाजी- दिघौरा पंचायत में योजनाओं में 50 लाख का गबन: RTI के जरिए खुलासा; जमीन पर प्रोजेक्ट्स नदारद, सरकारी खजाने से निकाली राशि - Gaya News
गयाजी22 मिनट पहले
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आरटीआई के सहारे जांच कराने वाले मिलन यादव ने बताया कि जांच में साफ हो गया है कि धरातल पर काम शून्य था और पैसे निकाल लिए गए।
गयाजी के टिकारी प्रखंड के दिघौरा पंचायत में सरकारी योजनाओं के नाम पर 50 लाख रुपए के गबन का मामला सामने आया है। आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी में सामने आया है कि पंचायत में प्रोजेक्ट्स धरातल पर नहीं थे, जबकि करीब 9 प्रोजेक्ट्स के नाम पर सरकारी खजाने से 45 से 50 लाख रुपए की राशि निकाल ली गई है।
दरअसल, दिघौरा पंचायत समिति सदस्य के बेटे मिलन यादव की ओर से आरटीआई के जरिए योजनाओं में खर्च की गई राशि के संबंध में जानकारी मांगी गई थी।

दिघौरा पंचायत समिति सदस्य के बेटे मिलन यादव ने आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी थी।
मिलन यादव ने पंचायत में चल रही विकास योजनाओं में गड़बड़ी की आशंका जताई थी
मिलन यादव ने पंचायत में चल रही विकास योजनाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका जताई थी। उन्होंने सूचना का अधिकार के तहत ब्योरा मांगा। काफी मशक्कत और लंबी प्रक्रिया के बाद जब दस्तावेज मिले, तो वे चौंकाने वाले थे। मिलन यादव ने प्राप्त कागजात के आधार पर 10 योजनाओं की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने पर पहुंचे पटना
जब स्थानीय स्तर पर उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया गया, तो निराश होने के बजाय मिलन यादव ने सीधे पंचायती राज विभाग के पटना मुख्यालय में गुहार लगाई। उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मुख्यालय हरकत में आया। पटना से अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम टिकारी की संबंधित पंचायत में भेजी गई।
जांच में खुली पोल: बिना काम के निकले पैसे
पटना से आई टीम ने जब स्थल निरीक्षण किया, तो शिकायतों की पुष्टि हो गई। जांच रिपोर्ट में सामने आई मुख्य बातें… 9 योजनाओं में धांधली: कुल 10 में से 9 योजनाओं में भारी वित्तीय अनियमितता पाई गई। फर्जीवाड़ा और गबन: करीब 45 से 50 लाख रुपये का गबन किया गया। कागजों पर ही बनीं योजनाएं: कई योजनाएं धरातल पर अस्तित्व में ही नहीं थीं, लेकिन उनकी पूरी राशि निकाल ली गई थी। एक ही काम के नाम पर बार-बार निकासी: कुछ योजनाओं के नाम पर अलग-अलग मदों से बार-बार स्वीकृति दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान ले लिया गया।
आरटीआई के सहारे जांच कराने वाले मिलन यादव ने बताया कि जांच में साफ हो गया है कि धरातल पर काम शून्य था और पैसे निकाल लिए गए। इस पूरे गबन में कुल 7 लोग दोषी हैं, जिनसे विभाग ने स्पष्टीकरण मांगा है। जांच रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपी जा चुकी है, लेकिन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होना अभी बाकी है।
मुख्यालय को जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद कार्रवाई का इंतजार
जांच रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपे जाने के बाद भी अब तक दोषियों पर सख्त एक्शन नहीं लिया गया है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ता को इंतजार है कि सरकार जल्द से जल्द इन 7 दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कर राशि की वसूली करे, ताकि पंचायत स्तर पर चल रहे भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके।
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