ट्रेन के दरवाजे या पायदान पर लटककर सफर किया तो सीधे जेल! रेलवे का कड़ा एक्शन; 500 रुपये जुर्माना और तीन महीने की सजा का कड़ा नियम
ट्रेनों में भीड़भाड़ के दौरान या युवाओं द्वारा सोशल मीडिया रील्स और स्टंट के चक्कर में चलती ट्रेन के दरवाजे (Footboard) पर लटककर सफर करने की आदत पर भारतीय रेलवे ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने देश भर के व्यस्त रेल रूटों, लोकल ट्रेनों और एक्सप्रेस गाड़ियों में अनधिकृत रूप से गेट पर खड़े होने या लटकने वाले यात्रियों के खिलाफ सघन चेकिंग अभियान शुरू कर दिया है।
अक्सर यात्री ताजी हवा लेने, जल्दी उतरने या डिब्बे के भीतर जगह न होने का हवाला देकर दरवाजे पर खड़े हो जाते हैं। लेकिन यह लापरवाही न केवल उनकी खुद की जान के लिए बड़ा खतरा बनती है, बल्कि सिग्नल के खंभों, ओएचई (Overhead Equipment) वायर और पुलों के गार्डर से टकराकर जानलेवा हादसों का कारण भी बनती है। इसी को देखते हुए रेलवे ने स्पष्ट किया है कि ऐसे यात्रियों पर अब किसी प्रकार की रियायत नहीं बरती जाएगी और उन्हें सीधे जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
रेलवे एक्ट की धारा 156: 3 महीने की जेल और ₹500 का जुर्माना
ट्रेन के दरवाजे, पायदान, छत या इंजन पर यात्रा करना भारतीय रेलवे कानून के तहत एक गंभीर दंडनीय अपराध है:
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रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 156 (Section 156 of Railways Act): इस धारा के अनुसार, यदि कोई यात्री रेलगाड़ी की छत, पायदान (Footboard) या इंजन पर यात्रा करता है या ऐसा करने का प्रयास करता है, और रेलवे कर्मचारी द्वारा चेतावनी दिए जाने के बावजूद वहां से हटने से मना करता है, तो उसे तत्काल ट्रेन से उतारा जा सकता है।
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सजा और जुर्माने का प्रावधान: दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को 3 महीने तक का कारावास (जेल) या ₹500 तक का नकद जुर्माना, अथवा दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं।
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सह-अपराधियों पर भी एक्शन: यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य यात्री को दरवाजे पर लटकने में मदद करता है या उसे अंदर आने से रोकता है, तो उसके खिलाफ भी रेलवे एक्ट की संबंधित धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
स्टंटबाजी और रील्स बनाने वालों पर धारा 145 और 153 भी लागू
आजकल कई युवा चलती ट्रेन के गेट पर एक हाथ से लटककर मोबाइल से वीडियो या इंस्टाग्राम रील्स बनाने का जोखिम उठाते हैं। रेलवे प्रशासन ने साफ कर दिया है कि स्टंटबाजी करने वालों को केवल धारा 156 तक सीमित नहीं रखा जाएगा:
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धारा 145 (उपद्रव और अशांति फैलाना): नशे की हालत में या सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालकर ट्रेन में उपद्रव करने पर टिकट जब्त करने के साथ जेल की सजा हो सकती है।
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धारा 153 (अन्य यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालना): यदि किसी यात्री के कृत्य से ट्रेन संचालन या अन्य सह-यात्रियों की सुरक्षा को जानबूझकर खतरे में डाला जाता है, तो इसके तहत 5 साल तक की सख्त कैद का प्रावधान है।
आरपीएफ का स्पेशल ड्राइव: स्टेशनों पर सीसीटीवी और बॉडी कैमरों से निगरानी
नई दिल्ली, मुंबई, हावड़ा, पटना, लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज जैसे प्रमुख जंक्शनों पर आरपीएफ की विशेष फ्लाइंग स्क्वॉड टीमें तैनात की गई हैं:
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स्टेशनों से ट्रेन छूटते समय गेट पर लटकने वाले यात्रियों को डिटेन किया जा रहा है।
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प्लेटफॉर्मों पर लगे हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षाकर्मियों के बॉडी-वॉर्न कैमरों के जरिए डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, जिन्हें रेलवे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाता है।
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यदि कोई यात्री बार-बार इस नियम का उल्लंघन करता हुआ पकड़ा जाता है, तो उसका नाम रेलवे के डिफाल्टर डेटाबेस में दर्ज कर भविष्य में सरकारी सेवाओं में पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान प्रतिकूल रिपोर्ट भी भेजी जा सकती है।
सुरक्षित सफर के लिए रेलवे की अहम अपील
भारतीय रेलवे ने सभी दैनिक यात्रियों और आम जनता से अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ न करें:
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यदि ट्रेन के भीतर अत्यधिक भीड़ है और चढ़ने की सुरक्षित जगह नहीं है, तो अगली ट्रेन का इंतजार करें।
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चलती ट्रेन में कभी भी चढ़ने या उतरने का प्रयास न करें।
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कोच के दरवाजे को केवल चढ़ने-उतरने के लिए खाली रखें और गेट के हैंडल को पकड़कर बाहर की ओर न झुकें।
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यदि कोई सह-यात्री दरवाजे पर खतरनाक स्थिति में खड़ा दिखे, तो तुरंत रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल करें या 'रेल मदद' (RailMadad) ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराएं ताकि अगले स्टेशन पर सुरक्षा बल आवश्यक कदम उठा सके।