छिमछिमा हनुमान मंदिर में भादो अमावस्या पर लगा मेला: श्योपुर सहित कई जिलों से आए श्रद्धालु, 500 पुलिस जवान और 4 ड्रोन से निगरानी - Sheopur News

विजयपुर क्षेत्र के प्रसिद्ध छिमछिमा हनुमान मंदिर में भादो अमावस्या के पहले शनिवार को विशाल मेला लगा। सुबह से ही मंदिर की ओर भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। रिमझिम बारिश और बदलते मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई। श्योपुर के अलावा मुरैना, भिंड

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मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों पर सुबह से ही गाड़ियों की लंबी लाइनें दिखीं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल चलकर मंदिर तक पहुंचे। पूरे इलाके में 'जय श्रीराम' और 'हनुमान जी' के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। हाथों में भगवा झंडा लिए और चेहरे पर आस्था का भाव लिए भक्त दर्शन के लिए कतारों में खड़े थे।

लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। मेले की सुरक्षा के लिए करीब 500 पुलिस जवान तैनात किए गए थे। भीड़ और पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रखने के लिए चार ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही थी।

अपने परिवार के साथ पूर्व मंत्री रामनिवास रावत।

अपने परिवार के साथ पूर्व मंत्री रामनिवास रावत।

महिला और पुरुष भक्तों के लिए दर्शन की अलग-अलग लाइनें बनाई गईं। पार्किंग, ट्रैफिक कंट्रोल और फायर ब्रिगेड सहित जरूरी व्यवस्थाएं भी की गई थीं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मेला क्षेत्र का दौरा कर व्यवस्थाओं को ठीक करने में लगे थे।

बारिश की बूंदें हों या तेज धूप, भक्तों के कदम छिमछिमा धाम की ओर बढ़ते रहे। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास का इलाका श्रद्धालुओं से भरा रहा। दूर-दराज से आए भक्तों ने हनुमान जी के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। जयकारों से गूंजता छिमछिमा धाम शनिवार को आस्था के महासंगम में बदल गया।

वन विकास निगम के अध्यक्ष और पूर्व वनमंत्री रामनिवास रावत ने अपने परिवार के साथ एक किलोमीटर दंडवत देकर हनुमान जी पर झंडा चढ़ाया।

मुगलकाल से जुड़ा है मंदिर का इतिहास विजयपुर से करीब 9 किलोमीटर दूर घने जंगल में स्थित छिमछिमा हनुमान मंदिर का इतिहास स्थानीय लोगों की मान्यताओं के अनुसार मुगलकाल से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि संत समर्थ गुरु ने यहां हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की थी। स्थानीय मान्यता है कि औरंगजेब के शासनकाल में मंदिर को तोड़ने के लिए मुगल सेना यहां पहुंची थी, लेकिन एक चमत्कार के चलते सेना आगे नहीं बढ़ सकी। कहा जाता है कि मंदिर की ओर बढ़ते समय मुगल सैनिकों की आंखों की रोशनी चली गई, जिसके बाद सेना को वापस लौटना पड़ा।

मंदिर की हनुमान प्रतिमा।

मंदिर की हनुमान प्रतिमा।

जगह-जगह भंडारे, पेयजल की व्यवस्था मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की ओर से जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए हैं। करीब 10 से 12 स्थानों पर भंडारे, पेयजल और अन्य सेवा व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं। बारिश के बीच भी सेवादार श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहे।